भारतीयों के घर में कितना सोना, हो गया खुलासा, दुनिया के 10 सेंट्रल बैंक मिलकर भी रह गए पीछे

भारत के घरों में जमा सोना अब दुनिया के शीर्ष 10 सेंट्रल बैंक के गोल्ड रिजर्व से भी ज्यादा हो गया है. ASSOCHAM की रिपोर्ट के अनुसार, अगर इस सोने का छोटा हिस्सा भी फाइनेंशियल सिस्टम में लाया जाए, तो 2047 तक भारत की जीडीपी में 7.5 ट्रिलियन डॉलर का अतिरिक्त इजाफा हो सकता है. गोल्ड लोन और गोल्ड-लिंक्ड स्कीम्स के जरिए इसे प्रोडक्टिव एसेट में बदला जा सकता है, जिससे इकोनॉमी को नई रफ्तार मिल सकती है.

सोना Image Credit: canva/AI image

India Household Gold Holdings: भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़ी एक बेहद अहम रिपोर्ट सामने आई है, जिसने देश की पारंपरिक बचत की ताकत को नए नजरिए से दिखाया है. उद्योग संगठन ASSOCHAM के मुताबिक, भारतीय घरों के पास मौजूद सोने का भंडार अब दुनिया के शीर्ष 10 केंद्रीय बैंकों के कुल गोल्ड रिजर्व से भी ज्यादा हो चुका है. यह न केवल भारत की सांस्कृतिक प्राथमिकताओं को दिखाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि देश के पास एक विशाल छिपी हुई आर्थिक ताकत मौजूद है, जिसे सही दिशा में इस्तेमाल किया जाए तो अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया जा सकता है.

दुनिया का सबसे बड़ा भंडार

रिपोर्ट के अनुसार, भारत के घरों में जमा सोने की कुल वैल्यू लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर आंकी गई है. यह निजी संपत्ति का एक बहुत बड़ा हिस्सा है और वैश्विक स्तर पर किसी भी देश के घरेलू गोल्ड स्टॉक से ज्यादा है. दिलचस्प बात यह है कि भारत के आधिकारिक गोल्ड रिजर्व करीब 880 टन हैं, जिससे देश दुनिया में आठवें स्थान पर आता है, लेकिन घरेलू स्तर पर रखा गया सोना इस आंकड़े को कई गुना पीछे छोड़ देता है.

अर्थव्यवस्था को मिल सकता है बड़ा बूस्ट

ASSOCHAM का मानना है कि अगर इस सोने के छोटे हिस्से को भी फाइनेंशियल सिस्टम में लाया जाए, तो इसका बड़ा आर्थिक असर हो सकता है. अनुमान है कि यदि हर साल घरेलू सोने का सिर्फ 2 फीसदी हिस्सा फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स में ट्रांसफर किया जाए, तो 2047 तक भारत के जीडीपी में 7.5 ट्रिलियन डॉलर का अतिरिक्त इजाफा हो सकता है. अगर भारत की जीडीपी 2047 तक करीब 34 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचती है, तो यह बढ़कर 41.5 ट्रिलियन डॉलर तक जा सकती है. यानी सोना सिर्फ आभूषण या बचत का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक ग्रोथ का इंजन बन सकता है.

किन सेक्टरों को होगा फायदा?

सोने को फाइनेंशियल सिस्टम में लाने से मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टरों को सीधा फायदा मिल सकता है. इससे निवेश बढ़ेगा, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और कंजम्पशन में तेजी आएगी. सोने के मौद्रिकरण, गोल्ड-लिंक्ड सेविंग स्कीम और गोल्ड लोन जैसे माध्यमों के जरिए इसे प्रोडक्टिव एसेट में बदला जा सकता है. हाल के वर्षों में गोल्ड लोन सेगमेंट में तेजी आई है और यह अब पारंपरिक बाजार से निकलकर एक मुख्यधारा रिटेल लेंडिंग कैटेगरी बनता जा रहा है.

गोल्ड लोन और बढ़ती मांग

वित्त वर्ष 2025-26 में नवंबर 2025 तक गोल्ड और ज्वेलरी के बदले दिए गए लोन का आंकड़ा 24.34 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. यह दिखाता है कि लोग अपने सोने को केवल स्टोर करने के बजाय उसे आर्थिक गतिविधियों में इस्तेमाल भी करने लगे हैं.

बढ़ती कीमतों का असर

2024-25 और 2026 की शुरुआत में सोने की कीमतों में आई तेजी ने वैल्यू को और बढ़ा दिया है. इससे परिवारों की बैलेंस शीट मजबूत हुई है और इसका सकारात्मक असर खपत और निवेश पर भी पड़ा है.

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