जनवरी में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने पकड़ी रफ्तार, PMI बढ़कर 55.4 पर पहुंचा
जनवरी में भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में हल्की लेकिन अहम मजबूती देखने को मिली है. HSBC मैन्युफैक्चरिंग PMI दिसंबर के दो साल के निचले स्तर से उबरते हुए 55.4 पर पहुंच गया, जो उत्पादन, नए ऑर्डर और रोजगार में सुधार का संकेत देता है.
India Manufacturing PMI: भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से साल की शुरुआत में राहत भरी तस्वीर सामने आई है. जनवरी महीने में फैक्ट्रियों की गतिविधियों में फिर से तेजी दिखी है, जिससे यह संकेत मिलता है कि घरेलू मांग और उत्पादन दोनों ही स्तर पर उद्योग पटरी पर बने हुए हैं. हालांकि कारोबारियों का भरोसा पूरी तरह मजबूत नहीं हुआ है, फिर भी मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अब भी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहा है.
जनवरी में PMI में हल्की बढ़त
HSBC मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी PMI जनवरी में बढ़कर 55.4 पर पहुंच गया, जो दिसंबर 2025 में 55.0 था. दिसंबर का स्तर बीते दो साल का निचला स्तर माना जा रहा था. ऐसे में जनवरी का यह सुधार ऑपरेटिंग कंडीशंस में मजबूती का संकेत देता है. हालांकि यह आंकड़ा जनवरी के अंत में जारी फ्लैश अनुमान 56.8 से कम रहा, लेकिन लंबे समय के औसत से अब भी ऊपर है.
PMI का 50 से ऊपर रहना यह बताता है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में विस्तार जारी है. 50 से नीचे का स्तर गिरावट को दिखाता है, जबकि 50 का मतलब कोई बदलाव नहीं होता.
नए ऑर्डर और उत्पादन से मिला सहारा
HSBC की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजल भंडारी के मुताबिक जनवरी में मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को नए ऑर्डर मिले, उत्पादन बढ़ा और रोजगार में भी इजाफा हुआ. इससे सेक्टर में आई सुस्ती के बाद एक तरह की वापसी देखने को मिली. हालांकि इनपुट कॉस्ट में हल्की बढ़त दर्ज की गई, जबकि फैक्ट्री-गेट प्राइस यानी कंपनियों द्वारा वसूली जाने वाली कीमतों की रफ्तार कुछ धीमी रही. इसका असर मुनाफे के मार्जिन पर हल्के दबाव के रूप में दिखा.
कारोबारी भरोसा अभी कमजोर
भले ही नए ऑर्डर तेजी से बढ़े हों, लेकिन भविष्य को लेकर उद्योगों का भरोसा कमजोर बना हुआ है. आगे के उत्पादन को लेकर उम्मीदें जुलाई 2022 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई हैं. यह संकेत देता है कि कंपनियां आने वाले महीनों को लेकर सतर्क हैं.
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इस बीच HSBC फ्लैश इंडिया कंपोजिट आउटपुट इंडेक्स जनवरी में बढ़कर 59.5 हो गया, जो दिसंबर में 57.8 था. यह इंडेक्स मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर, दोनों के प्रदर्शन को दिखाता है. आंकड़ों से साफ है कि जनवरी में दोनों सेक्टरों में लगभग समान रफ्तार से ग्रोथ दर्ज की गई, जो देश की आर्थिक गतिविधियों के लिए सकारात्मक संकेत है.
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