संकट के बीच बड़ा फैसला! RoDTEP के 100% फायदे बहाल, निर्यातकों को सीधी राहत
पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार ने निर्यातकों को राहत देते हुए RoDTEP स्कीम के पूरे फायदे फिर लागू कर दिए हैं. बढ़ते फ्रेट और बीमा खर्च से जूझ रहे एक्सपोर्ट सेक्टर को इससे राहत मिलेगी और ग्लोबल ट्रेड में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने में मदद मिलेगी.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और महंगे होते शिपिंग खर्च के बीच सरकार ने निर्यातकों को बड़ी राहत दी है. लंबे समय से दबाव झेल रहे एक्सपोर्ट सेक्टर के लिए केंद्र ने RoDTEP स्कीम के पूरे फायदे फिर से बहाल कर दिए हैं. इस फैसले से ऐसे समय में राहत मिली है जब वैश्विक व्यापार पहले से ही अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है.
RoDTEP के पूरे फायदे फिर बहाल
सरकार ने 23 फरवरी 2026 से 31 मार्च 2026 तक सभी योग्य निर्यात उत्पादों पर RoDTEP (Remission of Duties and Taxes on Exported Products) स्कीम के पूरे लाभ बहाल कर दिए हैं. यह घोषणा DGFT की ओर से जारी नोटिफिकेशन में की गई. ध्यान देने वाली बात यह है कि इससे पहले सरकार ने इस स्कीम के तहत मिलने वाले ड्यूटी बेनिफिट्स को आधा कर दिया था, जिससे निर्यातकों में नाराजगी थी और वे लगातार इसे वापस लेने की मांग कर रहे थे.
क्या है RoDTEP स्कीम
RoDTEP स्कीम 2021 में शुरू की गई थी. इसका मकसद निर्यातकों को उन टैक्स और ड्यूटी का रिफंड देना है जो उत्पादन और सप्लाई के दौरान लगते हैं, लेकिन किसी अन्य व्यवस्था के तहत वापस नहीं मिलते. इस स्कीम के तहत 0.3% से 3.9% तक रिफंड मिलता है, जो एक्सपोर्टर्स की लागत कम करने में मदद करता है.
बजट और फंडिंग की स्थिति
सरकार ने 2025-26 के लिए इस स्कीम के तहत 18,232 करोड़ रुपये का बजट तय किया था. वहीं 2026-27 के लिए इसे बढ़ाकर 21,709 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव था, लेकिन फिलहाल 10,000 करोड़ रुपये ही आवंटित किए गए हैं.
इस वजह से पहले दरों में कटौती की गई थी, जिसे अब वापस लिया गया है.
पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी परेशानी
निर्यातकों के लिए मुश्किलें केवल स्कीम तक सीमित नहीं हैं. अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है, जिससे व्यापार प्रभावित हुआ है. इसका असर शिपिंग लागत पर साफ दिख रहा है, समुद्री और हवाई मालभाड़ा बढ़ गया है, साथ ही बीमा प्रीमियम भी महंगे हो गए हैं.
फरवरी 2026 में भारत का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट सालाना आधार पर 0.81% घटकर 36.61 अरब डॉलर रहा. हालांकि ट्रेड डेफिसिट घटकर 27.1 अरब डॉलर पर आ गया. विशेषज्ञों का मानना है कि असली असर मार्च के आंकड़ों में दिखेगा, क्योंकि युद्ध 28 फरवरी से शुरू हुआ था. ऐसे में RoDTEP के फायदे बहाल करना निर्यातकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है.
