मई में रिटेल महंगाई बढ़कर 3.93% हुई, लगातार पांचवें महीने बढ़ोतरी, पहुंची RBI के 4 फीसदी टारगेट के करीब
कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) पर आधारित महंगाई दर अप्रैल के 3.48 फीसदी से बढ़कर 3.93 फीसदी हो गई. यह भारतीय रिजर्व बैंक के 4 प्रतिशत के मध्यम-अवधि के लक्ष्य के करीब पहुंच रही है. ताजा आंकड़े रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी की चिंता को और बढ़ा सकते हैं

Retail Inflation In May: देश में महंगाई का आंकड़ा एक बार फिर से बढ़ा है, जिससे आम लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर सकती हैं. शुक्रवार को सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने रिटेल महंगाई का आंकड़ा जारी कर दिया. मई में खुदरा महंगाई दर पिछले महीने के 3.48 फीसदी से बढ़कर मई में 3.93 फीसदी हो गई.
रिजर्व बैंक के लक्ष्य के करीब
कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) पर आधारित महंगाई दर अप्रैल के 3.48 फीसदी से बढ़कर 3.93 फीसदी हो गई. यह भारतीय रिजर्व बैंक के 4 प्रतिशत के मध्यम-अवधि के लक्ष्य के करीब पहुंच रही है.
सबसे तेज बढ़ोतरी
मई के आंकड़े इस कैलेंडर साल में कीमतों में सबसे तेज बढ़ोतरी दिखाते हैं, जिसमें हेडलाइन कंज्यूमर प्राइस इन्फ्लेशन (CPI) जनवरी में 2.74 प्रतिशत से बढ़कर मई में 3.93 प्रतिशत हो गई है. डेटा से पता चलता है कि साल की शुरुआत के मुकाबले अब कीमतों का दबाव बढ़ रहा है.
महंगाई लगातार पांच महीनों से बढ़ रही है, जो इस बात का संकेत है कि खाने-पीने की चीज़ों और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब आम लोगों के लिए कीमतों (कंज्यूमर प्राइस) पर भी दिखने लगा है.
आयातित महंगाई
यह बढ़ोतरी ग्लोबल स्तर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वेस्ट एशिया में लगातार तनाव के बीच हुई है. इन दोनों ही वजहों से इम्पोर्टेड इन्फ्लेशन (आयातित महंगाई) को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं.
ताजा आंकड़े रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी की चिंता को और बढ़ा सकते हैं, खासकर इसलिए क्योंकि अर्थशास्त्री पहले ही ईंधन की ऊंची कीमतों, सप्लाई में रुकावट और मौसम की वजह से खाने-पीने की चीज़ों की कीमतों पर पड़ने वाले असर के जोखिमों के बारे में आगाह कर चुके हैं.
अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इस साल के आखिर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है और इस फाइनेंशियल ईयर में 25 या 50 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी हो सकती है.
हालांकि, महंगाई RBI की 2-6 प्रतिशत की टॉलरेंस रेंज (स्वीकार्य सीमा) के भीतर बनी हुई है, लेकिन मई में हुई तेज बढ़ोतरी इस बात को पुख्ता करती है कि अगर कीमतों का दबाव बना रहता है, तो भविष्य में सख्त पॉलिसी अपनानी पड़ सकती है. विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अगर अल नीनो का जोखिम सच साबित होता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो महंगाई 5 प्रतिशत के स्तर को पार कर सकती है.