F&O ट्रेडर्स सावधान! ITR में की है अगर ये गलती तो आ सकता है इनकम टैक्स नोटिस

आकलन वर्ष 2026-27 के लिए ITR-3 फॉर्म में F&O ट्रेडर्स के लिए नए खुलासे अनिवार्य किए गए हैं. अब टर्नओवर और मुनाफा-नुकसान अलग से बताना होगा. जानिए F&O आय की सही रिपोर्टिंग, टैक्स ऑडिट के नियम और रिटर्न भरने से पहले जरूरी सावधानियां.

F&O ट्रेडर्स

Highlights

  • F&O आय बिजनेस इनकम मानी जाएगी हमेशा
  • ITR-3 में अलग टर्नओवर विवरण अनिवार्य अब
  • गलत जानकारी देने पर नोटिस आने की संभावना

अगर आप शेयर बाजार में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग करते हैं और वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने जा रहे हैं, तो इस बार आपको कुछ नए नियमों का ध्यान रखना होगा. आयकर विभाग ने ITR-3 फॉर्म में बदलाव किए हैं, जिनके तहत F&O ट्रेडिंग से जुड़े टर्नओवर और मुनाफे या नुकसान की जानकारी अलग से देनी होगी. ऐसे में गलत जानकारी देने या जरूरी विवरण छोड़ने पर परेशानी हो सकती है.

बिजनेस इनकम मानी जाती है F&O से कमाई

आयकर नियमों के मुताबिक, F&O ट्रेडिंग से होने वाली आय को कैपिटल गेन नहीं, बल्कि बिजनेस इनकम माना जाता है. यानी यदि आप नियमित रूप से डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग करते हैं, तो उसकी कमाई या नुकसान को बिजनेस इनकम के तहत दिखाना होगा. इसी वजह से अधिकांश व्यक्तिगत निवेशकों और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) को ITR-3 फॉर्म भरना पड़ता है.

ITR-3 में क्या बदला है?

आकलन वर्ष 2026-27 के लिए जारी संशोधित ITR-3 फॉर्म में F&O ट्रेडर्स के लिए अलग रिपोर्टिंग की व्यवस्था की गई है. अब करदाताओं को F&O ट्रेडिंग का टर्नओवर और प्रॉफिट या लॉस अलग-अलग दर्ज करना होगा. पहले यह जानकारी सामान्य बिजनेस रिसीट्स के साथ शामिल की जाती थी, लेकिन अब अलग खुलासा जरूरी है. इससे आयकर विभाग को ट्रेडिंग से जुड़ी आय का बेहतर आकलन करने में मदद मिलेगी.

F&O टर्नओवर कैसे तय होता है?

F&O ट्रेडिंग में टर्नओवर की गणना सामान्य कारोबार की तरह नहीं होती. इसमें सभी लाभ और नुकसान की एब्सोल्यूट वैल्यू (Absolute Value) को जोड़कर टर्नओवर निकाला जाता है. यानी मुनाफा और नुकसान दोनों का कुल योग टर्नओवर माना जाता है. कुछ मामलों में ऑप्शन प्रीमियम जैसी रकम भी इसमें शामिल की जाती है. इसलिए रिटर्न दाखिल करने से पहले सही टर्नओवर की गणना करना जरूरी है.

टैक्स ऑडिट और रिकॉर्ड पर रखें ध्यान

यदि आपकी ट्रेडिंग गतिविधियां आयकर अधिनियम की निर्धारित शर्तों के तहत आती हैं, तो आपको टैक्स ऑडिट भी कराना पड़ सकता है. इसलिए ब्रोकर द्वारा जारी ट्रेड बुक, प्रॉफिट एंड लॉस स्टेटमेंट और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) का मिलान जरूर करें. समय पर और सही जानकारी के साथ ITR दाखिल करने से भविष्य में नोटिस या अन्य कर संबंधी परेशानियों से बचा जा सकता है. वहीं, यदि F&O ट्रेडिंग में नुकसान हुआ है, तो निर्धारित नियमों के तहत उसे आगे के वर्षों में समायोजित (Carry Forward) करने का लाभ भी मिल सकता है, बशर्ते रिटर्न समय सीमा के भीतर दाखिल किया गया हो.

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