इस शहर में रखा है भारत का इमरजेंसी तेल रिजर्व, संकट में यहीं से मिलती है देश को सप्लाई, जानें कितने लीटर का भंडार
अंतरराष्ट्रीय तनाव, युद्ध और व्यापार से जुड़े जोखिमों को देखते हुए देश ने अपने यहां तेल का रणनीतिक भंडार यानी Strategic Petroleum Reserve बनाया है. यह भंडार देश के अलग-अलग हिस्सों में भूमिगत टैंकों और गुफाओं में रखा जाता है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तेल की सप्लाई जारी रह सके.
Petroleum Reserve: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. लेकिन अंतरराष्ट्रीय तनाव, युद्ध और व्यापार से जुड़े जोखिमों को देखते हुए देश ने अपने यहां तेल का रणनीतिक भंडार यानी Strategic Petroleum Reserve बनाया है. यह भंडार देश के अलग-अलग हिस्सों में भूमिगत टैंकों और गुफाओं में रखा जाता है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तेल की सप्लाई जारी रह सके.
हाल के सालों में दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और तेल सप्लाई में संभावित रुकावटों के कारण भारत सरकार अब अपने तेल भंडार को और बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है. भारतीय रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड यानी ISPRL इस पूरे प्रोजेक्ट को संभालती है. आने वाले सालों में देश में तेल भंडारण क्षमता को काफी बढ़ाया जाएगा.
भारत में कहां रखा है तेल का भंडार
S&P Global के मुताबिक भारत ने अपने पहले चरण में तीन प्रमुख स्थानों पर रणनीतिक तेल भंडार बनाए हैं. इन जगहों पर भूमिगत गुफाओं में बड़ी मात्रा में कच्चा तेल रखा गया है. पहला भंडार आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में बनाया गया है, जिसकी क्षमता करीब 1.33 मिलियन टन है.
दूसरा बड़ा भंडार कर्नाटक के मंगलुरु में है, जहां लगभग 1.5 मिलियन टन तेल स्टोर किया जा सकता है. तीसरा और सबसे बड़ा भंडार भी कर्नाटक के पडूर में बनाया गया है, जिसकी क्षमता करीब 2.5 मिलियन टन है. इन तीनों जगहों को मिलाकर भारत के पास अभी लगभग 5.33 मिलियन टन तेल स्टोर करने की क्षमता है.
अभी और बढ़ेगा भंडार
सरकार अब रणनीतिक तेल भंडार को और बढ़ाने की योजना बना रही है. दूसरे चरण में दो नए स्थानों पर अतिरिक्त भंडार बनाए जाएंगे. पहला नया प्रोजेक्ट ओडिशा के चांदीखोल में बनाया जाएगा, जहां करीब 4 मिलियन टन तेल रखने की योजना है.
दूसरा विस्तार कर्नाटक के पडूर में ही किया जाएगा, जहां अतिरिक्त 2.5 मिलियन टन क्षमता जोड़ी जाएगी. इस तरह दूसरे चरण में कुल 6.5 मिलियन टन अतिरिक्त भंडारण क्षमता तैयार की जाएगी.
आपात स्थिति में कैसे मिलती है तेल की सप्लाई
भारत के रणनीतिक तेल भंडार देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. अगर किसी कारण से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्लाई बाधित हो जाती है तो इन भंडारों से देश की जरूरतें पूरी की जा सकती हैं. फिलहाल भारत के रणनीतिक तेल भंडार करीब 9.5 दिनों के तेल आयात के बराबर सुरक्षा प्रदान करते हैं. इसके अलावा सरकारी तेल कंपनियों के पास अलग से भंडारण सुविधाएं हैं जो लगभग 64.5 दिनों के आयात के बराबर तेल रख सकती हैं.
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