रुपये ने महंगी कर दी विदेश में पढ़ाई, जानें कितना पड़ गया एक्स्ट्रा बोझ, युद्ध से अब तक 5.5% फीसदी टूटा
इजरायल ईरान युद्ध के बाद भारतीय रुपया तेजी से कमजोर हुआ है. फरवरी 2026 के अंत में जहां डॉलर के मुकाबले रुपया 90 से 91 के स्तर पर था, वहीं 18 मई तक यह गिरकर 96.18 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया. रुपये में करीब 5.5 फीसदी की गिरावट से विदेश में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की ट्यूशन फीस, हॉस्टल किराया और रोजमर्रा का खर्च काफी बढ़ गया है.
Rupee Fall: इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुए युद्ध का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है. 28 फरवरी 2026 को युद्ध शुरू होने के समय डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 90 से 91 के स्तर पर था. लेकिन युद्ध के चलते लगातार बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण 18 मई 2026 तक रुपया गिरकर 96.18 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया. यानी करीब ढ़ाई महीने में भारतीय मुद्रा में लगभग 5.5 फीसदी की कमजोरी दर्ज की गई है. इसका सबसे ज्यादा असर उन भारतीय छात्रों और परिवारों पर पड़ा है जो विदेश में पढ़ाई कर रहे हैं. फीस से लेकर रहने खाने तक का खर्च तेजी से बढ़ गया है.
विदेशी यूनिवर्सिटी की फीस पर बढ़ा बोझ
रुपये में गिरावट का सबसे सीधा असर विदेश में पढ़ रहे छात्रों की ट्यूशन फीस पर पड़ा है. अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप की यूनिवर्सिटीज में फीस डॉलर और पाउंड में जमा करनी होती है. ऐसे में रुपया कमजोर होने से भारतीय परिवारों को पहले से ज्यादा रकम चुकानी पड़ रही है. अगर किसी छात्र की सालाना फीस 40000 डॉलर है तो अब उसे करीब 2 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं. इससे मध्यम वर्गीय परिवारों का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है.
यदि आपकी सालाना फीस $40,000 है, तो रुपया गिरने के कारण खर्च में ₹2,16,000 की सीधी बढ़ोतरी हुई है.
Exchange Rate में बदलाव
- युद्ध से पहले (फरवरी 2026): $1 = ₹90.78
- वर्तमान में (18 मई 2026): $1 = ₹96.18
- प्रति डॉलर का नुकसान: ₹5.40 (रुपया करीब 5.95% कमजोर हुआ)
ट्यूशन फीस का गणित (सालाना $40,000 पर)
- पहले की लागत: $40,000 × ₹90.78 = ₹36,31,200
- अब की लागत: $40,000 × ₹96.18 = ₹38,47,200
- केवल फीस में अंतर: ₹2,16,000 का अतिरिक्त बोझ
रहने खाने का खर्च भी हुआ महंगा
विदेश में रहने वाले भारतीय छात्रों के लिए रोजमर्रा का खर्च भी तेजी से बढ़ गया है. हॉस्टल किराया, ग्रोसरी, ट्रांसपोर्ट और अन्य जरूरतों के लिए भारत से भेजे जाने वाले पैसों की वैल्यू घट गई है. पहले जितने रुपये में महीने का खर्च निकल जाता था अब उसी खर्च के लिए ज्यादा रकम भेजनी पड़ रही है. इससे कई परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बन गया है.
एजुकेशन लोन लेने वाले छात्र परेशान
जिन छात्रों ने विदेश में पढाई के लिए एजुकेशन लोन लिया है उनकी मुश्किल और बढ़ गई है. डॉलर मजबूत होने से बैंक से मिलने वाली लोन राशि अब कम पड़ रही है. कई छात्रों को अतिरिक्त लोन लेने या परिवार से और पैसे मंगाने की जरूरत पड़ रही है. अगर रुपया और कमजोर हुआ तो विदेश में पढ़ाई करना और महंगा हो सकता है.
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अब छात्र तलाश रहे नए विकल्प
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर छात्रों की पसंद पर भी दिखाई दे रहा है. कई छात्र अब लंबे कोर्स टालने या ऑनलाइन पढाई शुरू करने पर विचार कर रहे हैं. इसके अलावा खाड़ी देशों के बजाय जर्मनी, फ्रांस, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया जैसे सुरक्षित देशों की तरफ रुख बढ़ रहा है. छात्रों और अभिभावकों के बीच अब खर्च और सुरक्षा दोनों सबसे बड़ी चिंता बन गए हैं.
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