दिवाली से पहले कम हुआ Vivo, Oppo और Xiaomi का दबदबा! चीनी स्मार्टफोन ब्रांड्स की हिस्सेदारी घटी; ये है वजह
भारतीय स्मार्टफोन बाजार में चीनी ब्रांड्स की हिस्सेदारी घटी है. वहीं, Lava और Ai+ जैसे घरेलू ब्रांड्स की हिस्सेदारी बढ़कर 7% हो गई. जानें स्मार्टफोन बाजार में इस बदलाव की वजह.

भारत के स्मार्टफोन बाजार में चीनी कंपनियों की पकड़ कमजोर हो रही है. मेमोरी चिप की रिकॉर्ड ऊंची कीमतों के कारण Vivo, Oppo और Xiaomi जैसी कंपनियां कम कीमत वाले स्मार्टफोन मॉडल घटा रही हैं. इसका फायदा भारतीय कंपनियों को मिल रहा है. जुलाई-सितंबर तिमाही में भारतीय स्मार्टफोन ब्रांड्स की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 7 फीसदी हो गई, जो अक्टूबर-दिसंबर 2018 के बाद सबसे ज्यादा है. दूसरी ओर, चीनी ब्रांड्स की हिस्सेदारी आठ साल से ज्यादा समय के निचले स्तर पर पहुंच गई है.
68% पर आई चीनी स्मार्टफोन ब्रांड्स की हिस्सेदारी
टेक्नोलॉजी मार्केट रिसर्च फर्म Omdia के मुताबिक, जुलाई-सितंबर तिमाही में भारतीय स्मार्टफोन बाजार में चीनी ब्रांड्स की हिस्सेदारी 68% रही. इससे पिछली तिमाही में यह 71% और एक साल पहले 75% थी. चीनी ब्रांड्स की बाजार हिस्सेदारी अप्रैल-जून 2020 की तिमाही में 80% के हाई लेवल पर पहुंच गई थी.
वहीं, Counterpoint Research के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई-सितंबर तिमाही में चीनी ब्रांड्स की हिस्सेदारी 67% रही. यह जनवरी-मार्च 2019 के बाद सबसे कम है.
Vivo, Oppo और Xiaomi घटा रही हैं सस्ते फोन के मॉडल
मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर कम कीमत वाले स्मार्टफोन पर पड़ रहा है. ऐसे में Vivo, Oppo और Xiaomi जैसी कंपनियां बजट फोन के मॉडल कम कर रही हैं. ये मॉडल लंबे समय से चीनी कंपनियों की बिक्री बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं. चीनी स्मार्टफोन कंपनियां पिछले चार से पांच तिमाहियों से लागत को संभालने के लिए अपने फोन के स्पेसिफिकेशन कम कर रही हैं. इसके अलावा, कंपनियों ने कम कीमत वाले सेगमेंट में मॉडल की संख्या भी घटाई है. वहीं, मुनाफा बनाए रखने के लिए मिड और प्रीमियम सेगमेंट की बिक्री पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है.
ET की रिपोर्ट के मुताबिक, स्मार्टफोन उद्योग में कंपनियों का मुनाफा पहले से ही सीमित है. ऐसे में मेमोरी चिप की रिकॉर्ड ऊंची कीमतों का चीनी कंपनियों पर ज्यादा असर पड़ रहा है. दूसरी ओर, Samsung और Apple जैसी कंपनियों को प्रीमियम स्मार्टफोन की पेशकश के कारण बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का फायदा मिल रहा है.
भारतीय ब्रांड्स की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 7% हुई
चीनी कंपनियों की ओर से बजट फोन के मॉडल घटाने से भारतीय ब्रांड्स के लिए बाजार में जगह बन रही है. Lava और Ai+ जैसी कंपनियां उन ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रही हैं, जो कम कीमत में स्मार्टफोन खरीदना चाहते हैं. Counterpoint Research के मुताबिक, जुलाई-सितंबर तिमाही में भारतीय ब्रांड्स की कुल बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 7% हो गई. एक साल पहले इसी अवधि में यह 2% थी. भारतीय ब्रांड्स की यह हिस्सेदारी अक्टूबर-दिसंबर 2018 के बाद सबसे ज्यादा है.
Ai+ की शिपमेंट में चार गुना से ज्यादा बढ़ोतरी
जुलाई 2025 में लॉन्च हुए Ai+ ने 30 सितंबर को समाप्त तीन महीनों के दौरान एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले चार गुना से ज्यादा शिपमेंट दर्ज की. वहीं, Mivi और Boltt ने पिछली तिमाही में स्मार्टफोन बाजार में एंट्री की.
भारतीय ब्रांड्स को ऐसे समय में फायदा मिल रहा है, जब मेमोरी चिप की महंगी कीमतों के कारण स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ रही हैं. बाजार में कम कीमत वाले फोन की मांग बनी हुई है, लेकिन ग्राहक बढ़ती कीमतों के बीच अपना बजट बढ़ाने से बच रहे हैं. भारतीय कंपनियां अपने मौजूदा मॉडल की रेंज बनाए रखकर ज्यादा संख्या में फोन बेचने पर ध्यान दे रही हैं.
भारत में स्मार्टफोन शिपमेंट 10 साल के निचले स्तर पर
मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों और स्मार्टफोन महंगे होने के कारण भारतीय बाजार में कुल शिपमेंट पर भी असर पड़ा है. जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत में स्मार्टफोन शिपमेंट सालाना आधार पर 20 से 26% घटकर 3.58 करोड़ यूनिट पर आ गई. यह करीब एक दशक का सबसे निचला स्तर है.
स्मार्टफोन बाजार में यह सुस्ती दिवाली से ठीक पहले देखने को मिली है. आमतौर पर दिवाली के दौरान स्मार्टफोन जैसे गैर-जरूरी खर्च वाले उत्पादों की खरीदारी बढ़ती है. हालांकि, इस बार बढ़ती कीमतों के कारण ग्राहक नए फोन खरीदने का फैसला टाल रहे हैं.
इसे भी पढ़ें- 3 साल में 1,829% तक रिटर्न, अब इस मल्टीबैगर शेयर का बोनस धमाका! हर 9 शेयर पर मिलेंगे 5 नए शेयर