ईरान युद्ध से महंगी होंगी खाने-पीने की चीजें, 3 साल के हाई पर पहुंचा ग्लोबल फूड प्राइस इंडेक्स; अप्रैल में 1.6 फीसदी बढ़ोतरी

ईरान युद्ध के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने से खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ने की आशंका हैं. संयुक्त राष्ट्र के फूड प्राइस इंडेक्स में अप्रैल में 1.6 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई और यह 3 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया. वेजिटेबल ऑयल, मांस और अनाज की कीमतों में तेजी आई है, जबकि डीजल और उर्वरक महंगे होने से किसानों पर दबाव बढ़ा है.

फूड सप्लाई चेन Image Credit: MONEY9LIVE

Global Food Prices: दुनियाभर में खाने-पीने की चीजों की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. संयुक्त राष्ट्र के फूड प्राइस इंडेक्स ने तीन साल से ज्यादा का उच्च स्तर छू लिया है. इसकी बड़ी वजह ईरान युद्ध के कारण सप्लाई चेन में आई रुकावट मानी जा रही है. युद्ध के चलते अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लगभग बंद हो गया है, जिससे डीजल और उर्वरक जैसी जरूरी कृषि सामग्री की सप्लाई प्रभावित हुई है. इसका असर अब वैश्विक खाद्य बाजार में साफ दिखाई देने लगा है.

अप्रैल में 1.6 प्रतिशत बढ़ा फूड प्राइस इंडेक्स

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल में फूड-कमोडिटी प्राइस इंडेक्स में 1.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. यह इंडेक्स एक साल पहले के मुकाबले 2.5 प्रतिशत ज्यादा है. इस बढ़त में सबसे बड़ा योगदान वेजिटेबल ऑयल, मांस और अनाज की कीमतों का रहा.

वेजिटेबल ऑयल की कीमतों में सबसे ज्यादा उछाल

रिपोर्ट के अनुसार, वेजिटेबल ऑयल की कीमतों में मार्च के मुकाबले 5.9 प्रतिशत की तेजी आई और यह जुलाई 2022 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई. यह बढ़ोतरी ताड़, सोया, सूरजमुखी और रेपसीड तेलों की ऊंची कीमतों के कारण हुई. इंटरनेशनल ताड़ के तेल की कीमतें अप्रैल में लगातार पांचवें महीने बढ़ीं, जिसका मुख्य कारण जैव ईंधन क्षेत्र से मजबूत मांग , जिसे कई उत्पादक देशों में नीतिगत प्रोत्साहनों और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का समर्थन मिला. इसके अलावा, दक्षिण पूर्व एशिया में आने वाले महीनों में कम उत्पादन की चिंताओं से भी कीमतों पर दबाव पड़ा.

मांस और अनाज भी हुए महंगे

मांस की कीमतों का इंडेक्स मार्च के मुकाबले 1.2 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. वहीं, अनाज की कीमतों में 0.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. रिपोर्ट में कहा गया है कि मौसम संबंधी चिंताओं और 2026 में गेहूं की कम बुवाई की आशंका के कारण अनाज की कीमतें बढ़ी हैं. ईरान युद्ध के चलते किसान कम उर्वरक वाली फसलों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे गेहूं उत्पादन प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है.

डीजल और उर्वरक की लागत बढ़ने से किसानों पर दबाव

फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद से डीजल और उर्वरकों की कीमतों में तेजी आई है. दुनियाभर के किसान पहले ही खेती की लागत बढ़ने की चेतावनी दे चुके हैं. यूरोप के प्रमुख कृषि उत्पादक देशों फ्रांस और रोमानिया ने भी कम उत्पादन के संकेत दिए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती लागत से निपटने के लिए किसान मक्का की बुवाई घटा रहे हैं.

उपभोक्ताओं पर असर आने में लग सकता है समय

FAO का यह इंडेक्स कच्चे खाद्य उत्पादों की कीमतों को ट्रैक करता है, न कि रिटेल कीमतों को. इसका मतलब है कि खेतों पर बढ़ी लागत का असर ग्राहकों तक पहुंचने में थोड़ा समय लग सकता है. हालांकि, मार्च के मुकाबले आई यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत मानी जा रही है कि आने वाले समय में खाद्य महंगाई और बढ़ सकती है.

इसे भी पढ़ें- भारत का फॉरेक्स रिजर्व 7.79 अरब डॉलर गिरा, फिर कमजोर हुआ रुपया; संभालने में जुटा RBI