एक घर बेचकर कई प्रॉपर्टी खरीदी, फिर भी नहीं लगा टैक्स! ITAT का बड़ा फैसला
मुंबई के एक व्यक्ति ने पुराना घर बेचकर मिले करोड़ों रुपये से कई आवासीय प्रॉपर्टी खरीदीं. इनकम टैक्स विभाग ने एक से ज्यादा घरों में निवेश पर धारा 54 की टैक्स छूट पर आपत्ति जताई. मामला ITAT पहुंचा, जहां पुराने नियमों को देखते हुए करदाता को राहत मिली. जानिए क्या था पूरा मामला और फैसला क्यों अहम है.

मुंबई के एक मामले में इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने प्रॉपर्टी बेचने से मिले पैसे को एक से ज्यादा आवासीय संपत्तियों में लगाने पर टैक्स छूट से जुड़ा अहम फैसला दिया है. मामला उस समय का है, जब इनकम टैक्स कानून में धारा 54 के तहत एक से ज्यादा घर में निवेश को लेकर मौजूदा नियम अलग थे.
₹23.76 करोड़ मिले, फिर कई प्रॉपर्टी में किया निवेश
मामला विवेक जुनेजा का है. उन्होंने अपनी मां के साथ संयुक्त रूप से रखी एक आवासीय संपत्ति बेची थी. बिक्री से उन्हें करीब 23.76 करोड़ रुपये मिले, जो संपत्ति में उनकी 50 फीसदी हिस्सेदारी थी.
इसके बाद उन्होंने मुंबई में करीब 4.90 करोड़ रुपये में एक फ्लैट खरीदा. बची रकम का एक हिस्सा कैपिटल गेन्स अकाउंट स्कीम (CGAS) में जमा किया गया. बाद में इस खाते से रकम निकालकर दो अन्य प्रॉपर्टी में भी निवेश किया गया.
इनकम टैक्स विभाग ने क्यों उठाई आपत्ति?
इनकम टैक्स विभाग का कहना था कि धारा 54 के तहत टैक्स छूट एक आवासीय घर में निवेश पर ही मिलनी चाहिए. विभाग ने पहले खरीदे गए फ्लैट पर छूट स्वीकार करने के बाद दूसरी प्रॉपर्टी में किए गए निवेश पर अतिरिक्त छूट देने से इनकार कर दिया. इसके अलावा, फ्लैट को रहने लायक बनाने में किए गए कुछ खर्चों पर भी विभाग ने सवाल उठाया था.
ITAT ने क्यों दी राहत?
ITAT ने मामले में लागू पुराने नियमों को ध्यान में रखा. संबंधित आकलन वर्ष 2013-14 का था. उस समय धारा 54 में ‘एक आवासीय घर’ जैसी भाषा थी. बाद में कानून में बदलाव कर ‘भारत में एक आवासीय घर’ की सीमा स्पष्ट की गई, जो आकलन वर्ष 2015-16 से लागू हुई. ट्रिब्यूनल ने माना कि बाद में किया गया बदलाव पुराने मामले पर लागू नहीं किया जा सकता. इसलिए सिर्फ इस आधार पर टैक्स छूट से इनकार नहीं किया जा सकता कि रकम एक से ज्यादा आवासीय संपत्तियों में लगाई गई थी.
पुराने प्रॉपर्टी सौदों के लिए क्यों अहम है फैसला?
ITAT ने फ्लैट को रहने लायक बनाने के लिए किए गए 20.44 लाख रुपये के खर्च को भी स्वीकार किया. साथ ही CGAS में जमा रकम को लेकर भी करदाता को राहत मिली. हालांकि, यह फैसला पुराने आकलन वर्ष और उस समय लागू धारा 54 के प्रावधानों से जुड़ा है. मौजूदा नियमों में धारा 54 के तहत आम तौर पर भारत में एक आवासीय घर तक ही छूट सीमित है. इसलिए इसे आज के हर प्रॉपर्टी सौदे पर सीधे लागू नहीं माना जा सकता.
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