Happiest Minds में मेजॉरिटी हिस्सेदारी खरीदने की दौड़ में सबसे आगे ITC Infotech, जानें- क्यों अहम है ये डील
अगर यह डील पूरी हो जाती है, तो यह ITC Infotech के लिए अपने डिजिटल इंजीनियरिंग और AI-बेस्ड टेक्नोलॉजी सर्विस बिजनेस को बढ़ाने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा कदम होगा. ह डील एक इंडिपेंडेंट कंपनी के तौर पर एक दशक से अधिक समय बिताने के बाद कंट्रोल में बदलाव का संकेत होगी.

ITC Infotech मिड-टियर IT सर्विस कंपनी Happiest Minds Technologies में मेजॉरिटी हिस्सेदारी खरीदने की दौड़ में सबसे आगे है. डील की रूपरेखा, जिसमें हिस्सेदारी की साइज, वैल्यूएशन और ट्रांजैक्शन का स्ट्रक्चर शामिल है, अभी तय की जा रही है.
कौन बेचेगा हिस्सेदारी?
Moneycontrol की रिपोर्ट के अनुसार, Happiest Minds के फाउंडर और एग्जीक्यूटिव चेयरमैन अशोक सूटा कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रहे हैं. सूटा के पास अभी IT सर्विस कंपनी में सीधे 32 फीसदी से अधिक और अन्य प्रमोटर होल्डिंग्स के जरिए 40 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी है.
किसके पास कितनी हिस्सेदारी?
अशोक सूटा मेडिकल रिसर्च एलएलपी के पास कंपनी में लगभग 11.8 फीसदी हिस्सेदारी है. लगभग 403 रुपये की मौजूदा मार्केट कीमत पर, 83 वर्षीय IT इंडस्ट्री के दिग्गज सूटा की बेंगलुरु स्थित कंपनी में हिस्सेदारी की वैल्यू लगभग 2,600 करोड़ रुपये है.
किसी भी डील में सबसे पहले सूटा की प्रमोटर हिस्सेदारी का अधिग्रहण शामिल होगा, जिसके बाद SEBI के टेकओवर नियमों के तहत खरीदार को पब्लिक शेयरहोल्डर्स के लिए अनिवार्य ओपन ऑफर देना होगा.
यह डील क्यों अहम है?
अगर यह डील पूरी हो जाती है, तो यह ITC Infotech के लिए अपने डिजिटल इंजीनियरिंग और AI-बेस्ड टेक्नोलॉजी सर्विस बिजनेस को बढ़ाने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा कदम होगा. इससे क्लाउड, डेटा, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में कंपनी की मौजूदगी मजबूत होगी और साथ ही उसका ग्लोबल क्लाइंट बेस भी बढ़ेगा. अक्टूबर 2024 में ITC Infotech ने क्लाउड सर्विस कंपनी Blazeclan Technologies का अधिग्रहण 485 करोड़ रुपये तक में पूरा किया.
बदलाव का संकेत
Happiest Minds के लिए, यह डील एक इंडिपेंडेंट कंपनी के तौर पर एक दशक से अधिक समय बिताने के बाद कंट्रोल में बदलाव का संकेत होगी. 2011 में IT इंडस्ट्री के दिग्गज अशोक सूटा द्वारा शुरू की गई और बेंगलुरु में हेडक्वार्टर वाली इस कंपनी ने डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन सर्विस में अपनी एक खास पहचान बनाई है और इसके ग्राहकों में अलग-अलग सेक्टर की कंपनियां शामिल हैं.
IT इंडस्ट्री में कंसोलिडेशन
यह संभावित डील ऐसे समय में हो रही है जब IT सर्विस इंडस्ट्री में कंसोलिडेशन तेजी पकड़ रहा है. कंपनियां अपना दायरा बढ़ाने, AI और डिजिटल इंजीनियरिंग में अपनी क्षमताएं मजबूत करने और टेक्नोलॉजी पर होने वाले ऐच्छिक खर्च में कमी के बीच अपने कस्टमर पोर्टफोलियो का विस्तार करने की कोशिश कर रही हैं.
इकोनॉमिक अनिश्चितता
इसके अलावा, मैक्रो-इकोनॉमिक अनिश्चितता, महामारी के बाद ऊंची ब्याज दरें और कड़े बजट कुछ ऐसी चुनौतियां हैं जिनका सामना यह इंडस्ट्री कर रही है. नवंबर 2022 में जेनरेटिव AI के आने के बाद सॉफ्टवेयर नौकरियों को लेकर चिंताएं भी नेगेटिव माहौल को और बढ़ा रही हैं.
पिछले महीने भारत की आठवीं सबसे बड़ी IT कंपनी पर्सिस्टेंट सिस्टम्स ने लगभग 1.3 अरब डॉलर में जर्मन डिजिटल इंजीनियरिंग फर्म नागरो (Nagarro) के अधिग्रहण की घोषणा की. कोफोर्ज (Coforge) ने भी 2.35 अरब डॉलर में अमेरिका बेस्ड AI और डिजिटल इंजीनियरिंग फर्म एनकोरा (Encora) का अधिग्रहण किया.