मेहली मिस्त्री ने टाटा ट्रस्ट से हटाए जाने को चैरिटी कमिश्नर के सामने दी चुनौती, ट्रस्टियों के अधिकार की जांच की मांग
Tata Trusts Controversy: 'सर रतन टाटा ट्रस्ट' (SRTT) और 'सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट' (SDTT) ने 15 अक्टूबर को मिस्त्री के इस अधिकार पर सवाल उठाया था कि क्या वे ट्रस्ट के कामकाज और हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) जैसे मुद्दों को चुनौती दे सकते हैं.

Tata Trusts Controversy: रतन टाटा के करीबी मेहली मिस्त्री ने गुरुवार को ‘बाई हीराबाई जमसेतजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन’ और ‘सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट’ (SDTT) के ट्रस्टी पद से पिछले साल 23 अक्टूबर को हटाए जाने को चुनौती दी. उन्होंने टाटा ट्रस्ट्स के उन दावों का खंडन किया, जिनमें उनकी इस कानूनी हैसियत पर सवाल उठाया गया था कि क्या वे ट्रस्ट के कामकाज (गवर्नेंस) की जांच कर सकते हैं.
आपत्तियों को दोहराया
‘सर रतन टाटा ट्रस्ट’ (SRTT) और ‘सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट’ (SDTT) ने 15 अक्टूबर को मिस्त्री के इस अधिकार पर सवाल उठाया था कि क्या वे ट्रस्ट के कामकाज और हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) जैसे मुद्दों को चुनौती दे सकते हैं.
चैरिटी कमिश्नर के पास दाखिल किए गए तीन जवाबों (रीजॉइंडर) में मिस्त्री ने ट्रस्ट के खिलाफ अपनी आपत्तियों को दोहराया. उन्होंने कहा कि ये आपत्तियां पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उठाई गई थीं. सुनवाई के दौरान, चैरिटी कमिश्नर ने टाटा ट्रस्ट्स को निर्देश दिया कि वे इन जवाबों पर अपना पक्ष 3 दिसंबर तक पेश करें.
ट्रस्टीशिप खत्म किए जाने को चुनौती
मिस्त्री ने अपनी ट्रस्टीशिप खत्म किए जाने को भी चुनौती दी. उन्होंने तर्क दिया कि मूल ट्रस्ट डीड (दस्तावेज) में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो किसी ट्रस्टी का कार्यकाल तीन साल तक सीमित करता हो. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा को वह लाभ क्यों दिया गया, जो उन्हें (मिस्त्री को) नहीं दिया गया.
23 अक्टूबर 2025 (संभवतः 2024) को जारी उस सर्कुलर की वैधता को चुनौती देते हुए, जिसके तहत उनकी ट्रस्टीशिप खत्म की गई थी, मिस्त्री ने कहा कि नोएल टाटा, वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी थी, जबकि जिमी एन. टाटा ने कोई जवाब ही नहीं दिया.
नोएल टाटा की पात्रता पर सवाल
मिस्त्री ने चैरिटी कमिश्नर से आग्रह किया कि वे उस प्रस्ताव की वैधता की जांच करें जिसके तहत उनकी ट्रस्टीशिप खत्म की गई. साथ ही, उन्होंने वोटिंग में शामिल हुए ट्रस्टियों के अधिकार और पात्रता की जांच करने की भी मांग की. उन्होंने कहा कि चैरिटी कमिश्नर कार्यालय को इस ‘चेंज रिपोर्ट’ (बदलाव की रिपोर्ट) को खारिज कर देना चाहिए.
अपने जवाबों में मिस्त्री ने फिर से इस बात पर जोर दिया कि ‘बाई हीराबाई’ ट्रस्ट के नियमों में स्पष्ट रूप से लिखा है कि ट्रस्टी नवसारी या तत्कालीन बॉम्बे प्रेसीडेंसी से जुड़े ‘प्रैक्टिसिंग पारसी’ (पारसी धर्म का पालन करने वाले) होने चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या नोएल टाटा इन शर्तों को पूरा करते हैं.
आयरलैंड के नागरिक हैं नोएल टाटा
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में अपनी टैक्स रेजिडेंसी से जुड़े सवालों के जवाब में मिस्त्री ने कहा कि नोएल टाटा आयरलैंड के नागरिक हैं और उनके पास UAE का ‘गोल्डन वीजा’ है. उन्होंने चैरिटी कमिश्नर से मांग की कि सभी ट्रस्टियों को हलफनामा (एफिडेविट) दाखिल करने के लिए कहा जाए, जिसमें वे ट्रस्ट डीड के तहत अपनी पात्रता की पुष्टि करें, जिसमें पारसी-जरथुस्त्र धर्म का पालन करने की शर्त भी शामिल है.