क्या घटेंगे स्मार्टफोन के दाम? सरकार लाई ₹62,500 करोड़ की नई स्कीम, मोबाइल कंपनियों को मिलेगा इंसेंटिव

केंद्र सरकार ने देश में मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए 62,500 करोड़ रुपये की नई स्कीम को मंजूरी दी है. यह स्कीम पांच साल तक चलेगी और कंपनियों को बिक्री, लोकल कंपोनेंट सोर्सिंग और रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर इंसेंटिव देगी. सरकार को इससे उत्पादन और एक्सपोर्ट बढ़ने के साथ करीब 60,000 प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है.

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव Image Credit:

Mobile Manufacturing Scheme: केंद्र सरकार ने भारत में मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए 62,500 करोड़ रुपये की नई स्कीम को मंजूरी दी है. केंद्रीय कैबिनेट से मंजूर यह योजना देश के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को नई रफ्तार दे सकती है. नई स्कीम मोबाइल फोन के लिए पहले से चल रही प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव यानी PLI स्कीम की जगह लेगी. यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक पांच साल के लिए लागू रहेगी.

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि पिछले एक दशक में भारत की मोबाइल फोन इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव आया है. उन्होंने बताया कि 10 साल पहले स्मार्टफोन भारत के टॉप 100 एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स में भी शामिल नहीं थे, लेकिन अब यह देश का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट आइटम बन गया है.

कैसे काम करेगी नई स्कीम?

नई स्कीम के तहत भारत में मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों को क्वालिफाइड सेल पर इंसेंटिव दिया जाएगा. योजना में तय शर्तों के आधार पर इंसेंटिव की दर 2.25 फीसदी से 5 फीसदी के बीच होगी. इसके अलावा, सरकार ने उन कंपनियों के लिए 1.5 फीसदी तक अतिरिक्त इंसेंटिव का प्रावधान किया है, जो मोबाइल फोन के प्रमुख कंपोनेंट और सब-असेंबली की ज्यादा खरीद भारत से करेंगी. सरकार का मकसद मोबाइल कंपनियों की आयात पर निर्भरता कम करना और देश में मजबूत लोकल सप्लाई चेन तैयार करना है.

भारतीय मोबाइल ब्रांड्स को मिलेगा अतिरिक्त फायदा

नई स्कीम में भारतीय मोबाइल ब्रांड्स के लिए भी खास प्रावधान किया गया है. प्रोडक्ट डिजाइन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट में निवेश करने वाली कंपनियों को योग्य बिक्री पर 3 फीसदी अतिरिक्त इंसेंटिव मिल सकता है. इस कदम का मकसद भारतीय कंपनियों को केवल मोबाइल फोन बनाने तक सीमित रखने के बजाय डिजाइन और नई तकनीक के विकास के लिए प्रोत्साहित करना है.

पुरानी PLI स्कीम के बाद नई योजना

नई योजना मोबाइल फोन के लिए शुरू की गई पहली PLI स्कीम के बाद लाई गई है. पुरानी मोबाइल फोन PLI स्कीम का कुल आउटले 40,000 करोड़ रुपये था. वहीं, सरकार ने इस सेक्टर से करीब 25,000 करोड़ रुपये का टैक्स कलेक्शन किया. इससे संकेत मिलता है कि योजना ने मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के साथ सरकार के लिए टैक्स रेवेन्यू भी जुटाया.

भारत में हर साल बन रहे 125 करोड़ मोबाइल फोन

भारत में फिलहाल हर साल करीब 125 करोड़ मोबाइल फोन का निर्माण किया जाता है. अश्विनी वैष्णव ने कहा कि जिन देशों के पास इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग की मजबूत क्षमता होती है, वे अक्सर एविएशन और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे एडवांस सेक्टर में भी विशेषज्ञता विकसित करते हैं. सरकार नई योजना के जरिए देश के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को और मजबूत करना चाहती है.

क्या सस्ते होंगे स्मार्टफोन?

नई स्कीम लागू होने के बाद स्मार्टफोन की कीमतों में तुरंत कमी आएगी, यह जरूरी नहीं है. हालांकि, लंबे समय में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और लोकल कंपोनेंट की खरीद बढ़ने से कंपनियों की उत्पादन लागत कम हो सकती है. इससे सप्लाई चेन भी मजबूत होने की उम्मीद है.

उत्पादन लागत में कमी का फायदा आगे चलकर ग्राहकों को मिल सकता है. इसके साथ ही बाजार में ज्यादा मोबाइल मॉडल उपलब्ध हो सकते हैं, नए स्मार्टफोन की उपलब्धता तेज हो सकती है और बिक्री के बाद मिलने वाली सेवाओं में भी सुधार हो सकता है. स्कीम में डिजाइन और रिसर्च पर जोर दिए जाने से भारतीय कंपनियां स्थानीय ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर नए प्रोडक्ट भी विकसित कर सकती हैं.

₹39 लाख करोड़ तक उत्पादन का अनुमान

सरकार को उम्मीद है कि नई स्कीम से अगले पांच साल में मोबाइल फोन का उत्पादन तेजी से बढ़ेगा. इस दौरान कुल उत्पादन करीब 39 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है. मोबाइल फोन एक्सपोर्ट में तेज बढ़ोतरी से भी उत्पादन को सहारा मिलने की उम्मीद है.

60,000 प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होने की उम्मीद

नई मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग स्कीम से करीब 60,000 प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है. मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली, इंजीनियरिंग और इससे जुड़ी सेवाओं में रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं. सरकार को उम्मीद है कि 62,500 करोड़ रुपये की यह स्कीम भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करेगी, नए निवेश को आकर्षित करेगी और ग्लोबल स्मार्टफोन सप्लाई चेन में भारत की स्थिति को और मजबूत बनाएगी.

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