कैबिनेट का बड़ा फैसला, 1.27 लाख करोड़ रुपये से बनेगा भारत का चिप इकोसिस्टम; सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को मंजूरी
केंद्र सरकार ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को मंजूरी देते हुए इसके लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये का बजट तय किया है. नई योजना का फोकस चिप निर्माण के साथ सप्लाई चेन, रिसर्च, टैलेंट डेवलपमेंट और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करना है.
Semiconductor Mission 2.0: भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2 को मंजूरी दे दी है. इस योजना के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है. नई योजना का मुख्य फोकस चिप बनाने वाली कंपनियों के साथ साथ सप्लाई चेन को भी मजबूत करना है. सरकार गैस, केमिकल और दूसरे जरूरी कच्चे माल बनाने वाली कंपनियों को भी प्रोत्साहन देगी. यह योजना छह साल तक लागू रहेगी. सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक चिप मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है.
1.27 लाख करोड़ रुपये मंजूर
केंद्रीय कैबिनेट ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2 को मंजूरी देते हुए 1.27 लाख करोड़ रुपये का बजट तय किया है. इस योजना का मकसद देश में चिप मैन्युफैक्चिरिंग के पूरे इकोसिस्टम को मजबूत करना है. सरकार अब केवल चिप फैक्टरी ही नहीं बल्कि उनसे जुड़ी सप्लाई चेन को भी बढ़ावा देगी. इससे घरेलू और विदेशी निवेश को गति मिलने की उम्मीद है.
नई योजना में सब्सिडी का स्ट्रक्चर बदला
सरकार ने मिशन 2 के तहत सब्सिडी के स्ट्रक्चर में बदलाव किया है. सिलिकन फैब यूनिट को अब 40 फीसदी कैपिटल सहायता मिलेगी जबकि अन्य फैब यूनिट को 35 फीसदी सब्सिडी दी जाएगी. एडवांस पैकेजिंग के लिए 35 फीसदी और सामान्य पैकेजिंग के लिए 25 फीसदी प्रोत्साहन मिलेगा. इसके अलावा रिसर्च और स्किल डेवलपमेंट को भी आर्थिक सहायता दी जाएगी.
मिशन 1 से तैयार हुई मजबूत नींव
सरकार ने 2021 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 1 शुरू किया था. इसके तहत अब तक 12 चिप प्लांट को मंजूरी मिल चुकी है. इनमें माइक्रोन, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, केन्स सेमीकॉन और सीजी सेमी जैसी कंपनियां शामिल हैं. कुछ प्लांट में प्रोडक्शन भी शुरू हो चुका है जबकि गुजरात में टाटा का चिप फैब निर्माणाधीन है.
2035 तक का टारगेट
सरकार का लक्ष्य 2029 तक भारत में घरेलू जरूरत की 70 से 75 फीसदी चिप डिजाइन और मैन्युफैक्चिरिंग कैपेसिटी डेवलप करना है. इसके बाद 2035 तक भारत को दुनिया के प्रमुख सेमीकंडक्टर देशों में शामिल करने की योजना है. सरकार का मानना है कि इससे इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चिरिंग, रोजगार और निर्यात को भी नई गति मिलेगी.
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कई राज्यों में बन रहे हैं नए चिप प्लांट
सेमीकंडक्टर मिशन के तहत गुजरात, असम, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में नए चिप प्लांट बनाए किए जा रहे हैं. गुजरात के धोलेरा में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ताइवान की पीएसएमसी की साझेदारी से भारत का पहला कमर्शियल चिप फैब बनाया जा रहा है. इसकी अनुमानित लागत 91000 करोड़ रुपये है और इसमें हर महीने 50000 वेफर तैयार करने की क्षमता होगी.
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