जेनरिक्स के बाद अब बायोसिमिलर्स पर दांव! Indian Pharma की अगली बड़ी ग्रोथ स्टोरी बन सकती हैं ये कंपनियां; रखें नजर

भारतीय फार्मा इंडस्ट्री अब Generics के बाद Biosimilars पर बड़ा दांव लगा रही है. Biologic दवाओं के पेटेंट खत्म होने से इस सेगमेंट में तेज ग्रोथ की उम्मीद है. Biocon, Aurobindo Pharma और Dr. Reddy’s Laboratories जैसी कंपनियां रिसर्च, मैन्युफैक्चरिंग और नए प्रोडक्ट डेवलपमेंट पर निवेश बढ़ा रही हैं.

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भारतीय फार्मा इंडस्ट्री अब अपनी अगली बड़ी ग्रोथ की ओर बढ़ रही है. वर्षों तक जेनरिक्स दवाओं के दम पर वैश्विक बाजार में मजबूत पहचान बनाने के बाद अब भारतीय दवा कंपनियां बायोसिमिलर्स पर फोकस बढ़ा रही हैं. आने वाले वर्षों में दुनिया की कई महंगी बायोलॉजिक दवाओं के पेटेंट खत्म होने वाले हैं, जिससे बायोसिमिलर्स का बाजार तेजी से बढ़ने की उम्मीद है. ऐसे में कुछ कंपनियां इस अवसर को भुनाने की तैयारी में जुटी हैं.

क्या होते हैं बायोसिमिलर्स

जेनरिक्स और बायोसिमिलर्स में बड़ा अंतर होता है. जेनरिक्स दवाएं सामान्य केमिकल दवाओं की कॉपी होती हैं, जिन्हें पेटेंट खत्म होने के बाद अपेक्षाकृत आसानी से बनाया जा सकता है. वहीं बायोलॉजिक्स जीवित कोशिकाओं से तैयार की जाने वाली जटिल दवाएं होती हैं, जिनका इस्तेमाल कैंसर, डायबिटीज और ऑटोइम्यून बीमारियों के इलाज में किया जाता है.

इनकी हूबहू कॉपी बनाना संभव नहीं होता, इसलिए इनके समान प्रभाव वाली दवाओं को बायोसिमिलर्स कहा जाता है. इन्हें विकसित करने में कई वर्षों के रिसर्च, आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट और भारी निवेश की जरूरत होती है. यही वजह है कि इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा कम और मुनाफे की संभावना अधिक मानी जाती है.

Biocon सबसे आगे

बायोसिमिलर्स के क्षेत्र में Biocon भारत की सबसे मजबूत कंपनी मानी जाती है. फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, FY26 में कंपनी के कुल रेवेन्यू का करीब 60 फीसदी हिस्सा बायोसिमिलर्स कारोबार से आया. कंपनी 120 से अधिक देशों में मौजूद है और उसके पास 30 से ज्यादा बायोसिमिलर्स तथा 3 जीएलपी-1 प्रोडक्ट्स का पोर्टफोलियो है.

FY26 में कंपनी का कुल रेवेन्यू बढ़कर 16,927 करोड़ रुपये हो गया. हालांकि, वायाट्रिस कारोबार के एकीकरण से जुड़ी लागत बढ़ने के कारण शुद्ध मुनाफा घटकर 369 करोड़ रुपये रह गया. बुधवार को कंपनी का शेयर 0.62 फीसदी गिरकर 434.60 रुपये पर बंद हुआ.

Aurobindo Pharma बना रही मजबूत आधार

Aurobindo Pharma भी बायोसिमिलर्स को अपनी अगली ग्रोथ का प्रमुख आधार बना रही है. कंपनी ने 2018 से अब तक करीब 450 मिलियन डॉलर का निवेश किया है. क्यूराटेक बायोलॉजिक्स के जरिए कंपनी को यूरोप में चार और कनाडा में दो बायोसिमिलर्स की मंजूरी मिल चुकी है. इसके अलावा अमेरिका, यूरोप और कनाडा में कई अन्य बायोसिमिलर्स के लिए आवेदन प्रक्रिया जारी है.

FY26 में कंपनी का रेवेन्यू बढ़कर 33,653 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि ग्रॉस मार्जिन भी लगातार बेहतर हुआ है. कंपनी को उम्मीद है कि बायोसिमिलर्स कारोबार भविष्य में उसके मुनाफे को नई ऊंचाई दे सकता है. बुधवार को कंपनी का शेयर 0.17 फीसदी गिरकर 1,550.20 रुपये पर बंद हुआ.

Dr. Reddy’s Laboratories केवल बायोसिमिलर्स पर निर्भर नहीं

Dr. Reddy’s Laboratories ने केवल बायोसिमिलर्स ही नहीं, बल्कि पेप्टाइड्स, कंज्यूमर हेल्थकेयर और इनोवेशन-लेड थेरेपीज को भी अपनी भविष्य की रणनीति का हिस्सा बनाया है. कंपनी को कनाडा में जेनरिक सेमाग्लूटाइड इंजेक्शन की मंजूरी मिल चुकी है और अमेरिका में अबाटासेप्ट बायोसिमिलर के लिए आवेदन भी समीक्षा के दौर में है.

FY26 में कंपनी का रेवेन्यू बढ़कर 33,700 करोड़ रुपये हुआ, लेकिन अमेरिका में जेनरिक्स कारोबार पर दबाव के कारण ऑपरेटिंग मार्जिन घट गया. कंपनी का मानना है कि भविष्य में कई नए ग्रोथ इंजन उसकी आय बढ़ाने में मदद करेंगे. बुधवार को कंपनी का शेयर 1.34 फीसदी गिरकर 1,229.50 रुपये पर बंद हुआ.

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