स्टील इंडस्ट्री के लिए शुरू होगी नई हेजिंग व्यवस्था, MSME से लेकर इंफ्रा कंपनियों तक को बड़ा फायदा
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और स्टील यूजर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SUFI) ने भारत में स्टील और कमोडिटी डेरिवेटिव्स बाजार को मजबूत करने के लिए साझेदारी की है. इस पहल का उद्देश्य स्टील उद्योग को कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए एक पारदर्शी और कुशल हेजिंग प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना है.

भारतीय शेयर बाजार के दिग्गज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने देश के स्टील सेक्टर को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. एनएसई ने बुधवार को स्टील यूजर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SUFI) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं.
इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य भारत में स्टील और कमोडिटी डेरिवेटिव्स इकोसिस्टम को मिलकर विकसित करना है. इससे स्टील उद्योग से जुड़े कारोबारियों को कीमतों में होने वाले भारी उतार-चढ़ाव के जोखिम से बचने के लिए एक सुरक्षित और पारदर्शी मंच मिलेगा.
कीमतों के जोखिम से मिलेगी सुरक्षा
भारत दुनिया के सबसे बड़े स्टील उत्पादकों और उपभोक्ताओं में से एक है. ऑटोमोबाइल, इंफ्रास्ट्रक्चर, इंजीनियरिंग और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे बड़े सेक्टर्स में स्टील का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है. ऐसे में इसकी कीमतों में होने वाला बदलाव पूरी इकोनॉमी पर असर डालता है.
एनएसई (NSE) ने अपने बयान में कहा कि इस नई पहल से स्टील इंडस्ट्री के लिए एक कुशल ‘प्राइस-रिस्क मैनेजमेंट फ्रेमवर्क’ तैयार होगा. इसके जरिए कंपनियां एक्सचेंज-ट्रेडेड डेरिवेटिव्स के माध्यम से कीमतों के जोखिम को आसानी से हेज (Hedge) कर सकेंगी.
इन सेक्टर्स और कारोबारियों को होगा सीधा फायदा
इस साझेदारी से स्टील वैल्यू चेन से जुड़े कई तरह के हितधारकों को लाभ पहुंचेगा, जिनमें शामिल हैं:
- स्टील मैन्युफैक्चरर्स (उत्पादक) और प्रोसेसर्स
- एमएसएमई (MSMEs) और ओईएम (OEMs)
- इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां और अंतिम उपभोक्ता (End-users)
मिलकर करेंगे बाजार का विकास
समझौते के तहत एनएसई और सूफी (SUFI) मिलकर नए प्रोडक्ट्स के डिजाइन, मार्केट आउटरीच, इंडस्ट्री कंसल्टेशन और कैपेसिटी बिल्डिंग पर काम करेंगे. इससे भारत में स्टील और अन्य प्रासंगिक कमोडिटी डेरिवेटिव्स प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे.
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NSE के चीफ बिजनेस डेवलपमेंट ऑफिसर श्रीराम कृष्णन का कहना है, “SUFI के साथ हमारी यह साझेदारी भारतीय स्टील बाजार के कारोबारियों की हेजिंग जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. इसके जरिए हम विश्वसनीय और लिक्विड डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स तैयार करेंगे.”
उन्होंने आगे कहा कि यह समझौता भारत में एक आधुनिक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कमोडिटी डेरिवेटिव्स मार्केट बनाने की हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है. इससे घरेलू स्टील वैल्यू चेन में सही कीमत तय करने में काफी मदद मिलेगी.