40% टूटने के बाद क्या फिर दौड़ेगा यह कॉपर स्टॉक, सोना-चांदी स्टॉक के बाद अब क्यों इधर टिक गई नजर?
40% की भारी गिरावट के बाद Jain Resource Recycling के शेयर में रिकवरी के संकेत दिख रहे हैं. Q4FY26 में मार्जिन दबाव, ईरान-इजरायल तनाव और बढ़ती फ्रेट कॉस्ट ने कंपनी की कमाई को प्रभावित किया.
Copper stock Rally: शेयर बाजार में रिकॉर्ड तेजी के बीच एक ऐसा स्टॉक भी है जिसने निवेशकों को तगड़ा झटका दिया और फिर वापसी की राह पर लौट आया. हम बात कर रहे हैं Jain Resource Recycling की. हालिया ऊंचाई से यह स्टॉक करीब 40 फीसदी टूट चुका है. हालांकि, निचले स्तरों से अब इसमें एक रिबाउंड देखने को मिल रहा है. निवेशक अब इस बात का आकलन कर रहे हैं कि क्या पिछली तिमाही में मार्जिन पर आए भारी दबाव का असर शेयर की कीमत में पहले ही एड्जस्ट हो चुका है?
कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ अभी भी मजबूत है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ कमोडिटी-लिंक्ड रीसाइक्लिंग मॉडल से बाहर निकलकर ज्यादा मुनाफे वाले वैल्यू-एडेड कॉपर बिजनेस में अपनी जगह बना पाएगी?
FY26 के शानदार आंकड़े, फिर क्यों टूटा शेयर?
ऊपरी तौर पर देखने पर वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के नतीजे बेहद दमदार नजर आते हैं, लेकिन कहानी में ट्विस्ट चौथी तिमाही (Q4FY26) के आंकड़ों ने डाला.
- रेवेन्यू: करीब 48% बढ़कर ₹9,543 करोड़ रहा (FY25 में ₹6,429 करोड़ था).
- EBITDA: ₹365 करोड़ से बढ़कर करीब ₹559 करोड़ हो गया.
- नेट प्रॉफिट (PAT): ₹223 करोड़ से बढ़कर करीब ₹347 करोड़ पर पहुंच गया.
- EBITDA मार्जिन: 5.7% से मामूली सुधार के साथ 5.9% रहा.
Q4FY26 में कहां बिगड़ा खेल?
सालाना आंकड़े अच्छे थे, लेकिन चौथी तिमाही में कंपनी के मार्जिन बुरी तरह प्रभावित हुए. Q4FY26 में रेवेन्यू सालाना आधार पर बढ़कर ₹3,105 करोड़ (Q4FY25 में ₹1,760 करोड़) रहा. लेकिन, EBITDA मार्जिन 5.3% से गिरकर 3.5% पर आ गया.
तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) आधार पर रेवेन्यू तो 12% बढ़ा, लेकिन EBITDA 45% घटकर ₹110 करोड़ (Q3FY26 में ₹198.9 करोड़) रह गया. मुनाफा भी 48% टूट गया. यानी, कंपनी ने माल तो ज्यादा बेचा, लेकिन उस पर कमाई बेहद कम हुई. रीसाइक्लिंग बिजनेस में मेटल की कीमतें, स्क्रैप कॉस्ट और फ्रेट (भाड़ा) का बड़ा रोल होता है, जहां कंपनी मात खा गई.
Q4FY26 में मार्जिन घटने की दो बड़ी वजहें
मैनेजमेंट के मुताबिक, प्रति टन EBITDA घटने के पीछे दो बाहरी और अस्थायी कारण थे:
- लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) फॉर्मूला: कॉपर की कीमतों में तेज उछाल तो आया, लेकिन कंपनी का रियलाइजेशन फॉर्मूला उस रफ्तार से नहीं बढ़ पाया. इससे पूरी वैल्यू चेन पर दबाव आ गया.
- भू-राजनीतिक तनाव (Iran-Israel Conflict): मार्च 2026 में ईरान-इजरायल विवाद के चलते ग्लोबल शिपिंग रूट्स प्रभावित हुए. माल ढुलाई , पोर्ट डिस्चार्ज और फ्यूल कॉस्ट अचानक बढ़ गई, जिससे प्रोसेसिंग का खर्च बढ़ गया.
अब ‘कॉपर’ के भरोसे बड़ी छलांग की तैयारी
जैन रिसोर्स रीसाइक्लिंग अब केवल बेसिक स्क्रैप रीसाइक्लिंग तक सीमित नहीं रहना चाहती. कंपनी का पूरा फोकस अब वैल्यू-एडेड कॉपर प्रोडक्ट्स पर है, जिससे मार्जिन को स्थिर और मजबूत किया जा सके.
- रेवेन्यू में हिस्सेदारी: Q4FY26 में कॉपर और कॉपर अलॉय प्रोडक्ट्स का रेवेन्यू शेयर बढ़कर 55% हो गया (जो पिछली तिमाही में 52% और साल भर पहले 45% था). लीड (Lead) का हिस्सा 40% और एल्युमिनियम व अन्य का 5% रहा.
- वैल्यू-एडेड पोर्टफोलियो: कंपनी अब कॉपर एनोड, कॉपर कैथोड, कॉपर वायर रॉड, बसबार और प्रोफाइल्स जैसे प्रीमियम प्रोडक्ट्स की तरफ बढ़ रही है.
कैपेसिटी पाइपलाइन
- कॉपर एनोड: पहला फर्नेस (800 MT प्रति माह) चालू हो चुका है. दूसरा फर्नेस चालू होने के बाद कुल क्षमता 1,600 MT प्रति माह हो जाएगी.
- कॉपर कैथोड: सिविल कंस्ट्रक्शन पूरा हो चुका है. फेज-1 की कमिशनिंग Q2FY27 और फेज-2 की Q3FY27 में होने की उम्मीद है (मशीनरी डिलीवरी में शिपिंग विवाद के कारण थोड़ी देरी हुई).
- कॉपर वायर रॉड: इसके अगस्त 2026 तक शुरू होने की उम्मीद है (क्षमता: 600 MT प्रति माह).
- कॉपर बसबार और प्रोफाइल्स: इसके सितंबर 2026 तक चालू होने का टारगेट है (क्षमता: 1,500 MT प्रति माह).
कच्चे माल की सुरक्षा, अहमदाबाद JV और अन्य प्रोजेक्ट्स
रीसाइक्लिंग बिजनेस की सबसे बड़ी जरूरत स्क्रैप की निरंतर सप्लाई है. इसके लिए कंपनी कई मोर्चों पर काम कर रही है:
- अहमदाबाद जॉइंट वेंचर (Jain C&Y Circular Solution): यह प्लांट सालाना 72,000 MT स्क्रैप प्रोसेस करेगा (जिसमें 36,000 MT मोटर/अल्टरनेटर स्क्रैप, 24,000 MT केबल स्क्रैप और 12,000 MT अन्य स्क्रैप शामिल हैं). इससे हर साल करीब 25,000 MT प्रोसेस्ड कॉपर और कॉपर इनगॉट्स मिलेंगे.
- एंटीमनी एक्सट्रैक्शन (Lead Recycling): बैटरी स्क्रैप से एंटीमनी निकालने का यह प्रोजेक्ट Q3FY27 में शुरू होगा. यह हर महीने 1,000 MT लीड-एंटीमनी बुलियन को प्रोसेस कर 100 MT एंटीमनी का आउटपुट देगा.
- प्लास्टिक रीसाइक्लिंग: इसके लिए कंपनी ₹15 करोड़ के कैपेक्स के साथ 6 एकड़ जमीन पर एक स्टैंडअलोन यूनिट लगा रही है, जो Q3FY27 तक शुरू होगी.
- कुवैत इन्वेस्टमेंट: पश्चिम एशिया से कच्चे माल की सोर्सिंग मजबूत करने के लिए यह प्रोजेक्ट तैयार है, लेकिन शिपिंग दिक्कतों के कारण मशीनरी डिस्पैच में देरी हुई है.
निवेशकों को अब किन बातों पर रखनी होगी नजर?
स्टॉक में दोबारा बड़ी तेजी आएगी या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी अपने वादों को जमीन पर कितना उतार पाती है. निवेशकों को इन 4 फैक्टर्स को ट्रैक करना चाहिए:
- कॉपर कैथोड, वायर रॉड और बसबार प्रोजेक्ट्स समय पर शुरू हो पाते हैं या नहीं.
- क्या वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स सेगमेंट में आने से कॉपर बिजनेस का मार्जिन दोबारा सुधरता है?
- क्या ग्लोबल फ्रेट चार्जेस और जियोपॉलिटिकल तनाव कम होते हैं?
- कंपनी का नेटवर्क 120 से ज्यादा देशों में है, लेकिन क्या यह बड़ा सेटअप केवल रेवेन्यू बढ़ाने के बजाय नेट प्रॉफिट में तब्दील हो पाता है?
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जैन रिसोर्स रीसाइक्लिंग फिलहाल बदलाव के दौर से गुजर रही है. इसका पुराना बिजनेस मॉडल कमोडिटी की कीमतों और बाहरी उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील है, जबकि नया मॉडल बेहतर मार्जिन का भरोसा देता है. 40% के बड़े करेक्शन ने यह साफ कर दिया है कि निवेशक अब केवल ‘दावों’ पर नहीं, बल्कि ‘नतीजों और डिलीवरी’ पर पैसा लगाएंगे. अगर वित्त वर्ष 2027 (FY27) में प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे हुए, तो यह स्टॉक निवेशकों को फिर से मालामाल कर सकता है.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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