अब कौन बनेगा टाटा संस का चेयरमैन, ग्रुप के भीतर किस बात को लेकर चल रही टेंशन; किसके पास मौका?

इस्तीफे की चिट्ठी में चंद्रशेखरन ने बताया है कि क्यों उन्हें एक और कार्यकाल नहीं मिला. लेकिन इन सब के बीच अब सवाल ये है टाटा संस की कमान किसके हाथों में जाएगी? हालांकि, चंद्रशेखरन 2027 तक अपने टर्म के खत्म होने तक इस पद पर बने रहेंगे.

एन. चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चैयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है. Image Credit: Getty image

देश के सबसे बडे कारोबारी समूह में से एक टाटा ग्रुप सुर्खियों में है, क्योंकि बुधवार को टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने करीब एक दशक बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफे की चिट्ठी में चंद्रशेखरन ने बताया है कि क्यों उन्हें एक और कार्यकाल नहीं मिला. लेकिन इन सब के बीच अब सवाल ये है टाटा संस की कमान किसके हाथों में जाएगी?

नोएल टाटा की कोशिश

फॉर्च्यून में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, जानकार सूत्रों ने बताया कि अगर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) आखिरकार होल्डिंग कंपनी को IPO लाने पर जोर देता है, तो नोएल टाटा, टाटा संस के बोर्ड को फिर से बनाने और चेयरमैन का पद संभालने की कोशिश कर सकते हैं. क्योंकि वह इस बात पर सोच रहे हैं कि 170 अरब डॉलर के ग्रुप पर टाटा परिवार के असर को कैसे बचाया जाए.

क्यों गर्म है लिस्टिंग का मामला?

RBI के 2026-27 के लिए टाटा संस को अपनी अपर-लेयर NBFC (NBFC-UL) लिस्ट में बनाए रखने के बाद यह मामला और भी जरूरी हो गया है. हालांकि, रेगुलेटर ने कहा कि यह क्लासिफिकेशन टाटा संस की अपनी कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की पेंडिंग एप्लीकेशन पर कोई असर नहीं डालता है.

RBI ने अभी तक टाटा संस की NBFC-UL फ्रेमवर्क से बाहर निकलने की रिक्वेस्ट पर फैसला नहीं किया है. रेगुलेटरी अनिश्चितता एप्लीकेशन रिजेक्ट होने पर लिस्टिंग की संभावना को खुला छोड़ देती है.

टाटा ट्रस्ट्स के पास कितनी हिस्सेदारी?

टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के लिए दांव IPO से कहीं ज्यादा हैं. टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस का लगभग 66 फीसदी हिस्सा है, लेकिन होल्डिंग कंपनी पर असर डालने की उसकी काबिलियत मौजूदा गवर्नेंस स्ट्रक्चर में शामिल है, जिसमें डायरेक्टर्स का नॉमिनेशन भी शामिल है.

किसके पास वीटो पावर?

नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन अभी टाटा संस बोर्ड में टाटा ट्रस्ट्स के नॉमिनी हैं और उनके पास जरूरी फैसलों पर वीटो पावर है. लिस्टेड टाटा संस पब्लिक शेयरहोल्डर्स, ज्यादा डिस्क्लोजर और रेगुलेटरी स्क्रूटनी लाएगा. साथ ही होल्डिंग कंपनी के जरिए ग्रुप की स्ट्रैटेजी को आकार देने की ट्रस्ट्स और टाटा परिवार की काबिलियत को कमजोर कर सकता है.

नोएल टाटा पहले ही टाटा संस की लिस्टिंग की संभावना का विरोध कर चुके हैं. उनका तर्क है कि होल्डिंग कंपनी को प्राइवेट रखने से ट्रस्ट्स को कैपिटल एलोकेशन और लॉन्ग-टर्म ग्रुप स्ट्रैटेजी पर अधिक असर बनाए रखने में मदद मिलती है, जबकि उनकी ओनरशिप से जुड़े परोपकारी मकसद भी बने रहते हैं.

टाटा परिवार को किस बात की चिंता?

इस सोच से वाकिफ एक सोर्स ने कहा कि चिंता यह है कि लिस्टिंग से टाटा संस धीरे-धीरे टाटा ट्रस्ट्स से ज्यादा इंडिपेंडेंट हो सकता है, भले ही उनकी बड़ी शेयरहोल्डिंग हो. टाटा परिवार खुद ट्रस्ट्स के जरिए ग्रुप के फैसलों पर असर डालता है. सोर्स ने कहा, ‘आखिरकार, अगर टाटा लिस्टिंग के लिए जाता है, तो टाटा परिवार, टाटा इकोसिस्टम के लिए बेमतलब हो जाएगा.’

इससे टाटा संस के बोर्ड की बनावट बहुत जरूरी हो जाती है. अगर RBI अनलिस्टेड रहने का रास्ता बंद कर देता है, तो नोएल टाटा कंपनी के नए रेगुलेटरी सिस्टम में आने से पहले बोर्ड में ट्रस्ट के साथ मजबूत रिप्रेजेंटेशन की मांग कर सकते हैं. सूत्रों ने कहा कि इसका मकसद जरूरी नहीं कि रोजाना के कामों को कंट्रोल करना हो, बल्कि यह सुनश्चित करना होगा कि जब टाटा संस पब्लिक-मार्केट गवर्नेंस के तहत आएगा, तो प्रिंसिपल शेयरहोल्डर का स्ट्रेटेजिक असर बना रहे.

एजीएम से पहले चंद्रशेखरन का इस्तीफा

लीडरशिप के सवाल ने स्थिति को और ज्यादा फ्लू्इड बना दिया है. एन. चंद्रशेखरन ने 18 अगस्त की शेयरहोल्डर मीटिंग से पहले टाटा संस के चेयरमैन का पद छोड़ दिया है, क्योंकि डायरेक्टर के तौर पर उनकी दोबारा नियुक्ति नहीं होगी. हालांकि, वह फरवरी 2027 तक अपने टर्म के खत्म होने तक इस पद पर बने रहेंगे.

नोएल टाटा और चंद्रशेखरन के बीच क्या हुआ?

टाटा संस के अंदर एयर इंडिया, टाटा डिजिटल और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे नए बिजनेस के परफॉर्मेंस और कैपिटल एलोकेशन को लेकर टेंशन सामने आई थी. नोएल टाटा ने घाटे में चल रहे बिजनेस के परफॉर्मेंस पर चंद्रशेखरन से अधिक क्लैरिटी मांगी थी, क्योंकि ये टाटा संस को उधार लेने और उसे NBFC-UL के तौर पर क्वालिफाई करने के लिए मजबूर कर सकते हैं.

टाटा ग्रुप के एक सोर्स ने कहा कि शॉर्ट में चंद्रशेखरन के जाने से नोएल टाटा को सिर्फ दूसरा चेयरमैन अपॉइंट करने के बजाय बोर्ड को रीसेट करने का मौका मिल सकता है.

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