एन. चंद्रशेखरन के इस्तीफे ने मचाई हलचल, रतन टाटा के इस करीबी ने ऐसे दिलाई ग्रुप को नई पहचान

टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के इस्तीफे से टाटा ग्रुप में बड़े नेतृत्व बदलाव की चर्चा तेज हो गई है. उनका कार्यकाल फरवरी 2027 तक रहेगा. चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने सेमीकंडक्टर, बैटरी, एविएशन और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे नए क्षेत्रों में विस्तार किया. एयर इंडिया को टाटा ग्रुप में वापस लाना भी उनके कार्यकाल की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा.

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Highlights

  • एन. चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया, लेकिन उनका कार्यकाल फरवरी 2027 तक जारी रहेगा.
  • उनके नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने सेमीकंडक्टर, बैटरी, एविएशन और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे नए सेक्टर्स में बड़ा विस्तार किया.
  • एयर इंडिया को दोबारा टाटा ग्रुप में लाना और ‘वन टाटा’ रणनीति को मजबूत करना उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा.

N Chandrasekaran: टाटा ग्रुप में एक बार फिर बड़ा नेतृत्व बदलाव सामने आया है. टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. हालांकि, वह तत्काल पद से नहीं हटेंगे और अपने मौजूदा कार्यकाल के खत्म होने तक फरवरी 2027 तक चेयरमैन की जिम्मेदारी संभालते रहेंगे. उनका यह फैसला ऐसे समय आया है, जब टाटा संस की वार्षिक आम बैठक 18 अगस्त को होने वाली है. इस बैठक में चंद्रशेखरन की निदेशक के रूप में दोबारा नियुक्ति पर शेयरधारकों को मतदान करना था. चंद्रशेखरन ने अपने इस्तीफे में साफ किया है कि वह 20 फरवरी 2027 को मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद दोबारा नियुक्ति के लिए खुद को पेश नहीं करेंगे. उन्होंने टाटा संस के बोर्ड से नए उत्तराधिकारी को जल्द तय करने का अनुरोध भी किया है.

2017 में संभाली थी टाटा ग्रुप की कमान

एन. चंद्रशेखरन ने 1987 में टाटा ग्रुप ज्वाइन किया था. उन्होंने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस में लंबा सफर तय किया और 2009 में कंपनी के सीईओ बने. इसके बाद 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया. उनके कार्यकाल को टाटा ग्रुप के लिए बड़े रणनीतिक बदलावों का दौर माना गया.

जब उन्होंने फरवरी 2017 में टाटा संस की कमान संभाली थी, तब ग्रुप के सामने कमजोर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों, रणनीतिक दिशा और कारोबार को आधुनिक बनाने जैसी कई चुनौतियां थीं. अगले 8 वर्षों में उन्होंने ग्रुप की कंपनियों को ज्यादा स्पष्ट रणनीतिक दिशा देने और नए क्षेत्रों में विस्तार पर जोर दिया.

‘वन टाटा’ पर दिया जोर

चंद्रशेखरन की प्रमुख पहलों में ‘वन टाटा’ सोच को मजबूत करना शामिल रहा. इसका मकसद ग्रुप की अलग-अलग कंपनियों के बीच बेहतर तालमेल, संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और टाटा की मूल पहचान को मजबूत करना था. उन्होंने पारंपरिक कारोबार के साथ नए क्षेत्रों में भी बड़े निवेश पर जोर दिया.

उनके नेतृत्व में टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स का गठन, एयरएशिया इंडिया, एयर इंडिया और विस्तारा के इंटीग्रेशन जैसी बड़ी रणनीतिक पहलों को आगे बढ़ाया गया. टाटा मोटर्स के कारोबार में भी रणनीतिक बदलाव किए गए और पैसेंजर व्हीकल तथा कमर्शियल व्हीकल कारोबार को अलग दिशा देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी.

सेमीकंडक्टर से बैटरी तक नए क्षेत्रों में एंट्री

चंद्रशेखरन के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में टाटा ग्रुप का नए दौर के उद्योगों में प्रवेश भी रहा. ग्रुप ने सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी और एविएशन मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश की दिशा पकड़ी. टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स गुजरात के धोलेरा में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट और असम के जगीरोड में ओएसएटी फैसिलिटी विकसित कर रही है. वहीं, टाटा ग्रुप की बैटरी कंपनी अग्रतास गुजरात के साणंद में 20 गीगावॉट-आवर क्षमता वाली सेल मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी विकसित कर रही है. एविएशन सेक्टर में भी ग्रुप ने एयरबस सी295 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की फाइनल असेंबली लाइन शुरू की.

एयर इंडिया को वापस टाटा ग्रुप में लाना भी बड़ा पड़ाव

चंद्रशेखरन के दौर में एयर इंडिया का टाटा ग्रुप में वापस आना भी बेहद महत्वपूर्ण रहा. 2021 में एयर इंडिया के अधिग्रहण के बाद ग्रुप ने एयरलाइन कारोबार को फिर से अपने पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा बनाया. इसके अलावा बिगबास्केट और 1एमजी जैसे कारोबारों के अधिग्रहण के जरिए ई-कॉमर्स और डिजिटल हेल्थ जैसे क्षेत्रों में भी मौजूदगी बढ़ाई गई.

रतन टाटा के भरोसेमंद सहयोगी रहे चंद्रशेखरन

एन. चंद्रशेखरन को रतन टाटा के भरोसेमंद सहयोगियों में गिना जाता रहा है. टाटा ग्रुप में लंबा अनुभव रखने वाले चंद्रशेखरन ने टीसीएस से लेकर टाटा संस के चेयरमैन पद तक अपनी पहचान बनाई. 2017 में टाटा संस की कमान संभालना ग्रुप के लिए एक महत्वपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन था. इसके बाद उन्होंने रतन टाटा की विरासत और टाटा की मूल कारोबारी सोच को आगे बढ़ाते हुए ग्रुप को नई रणनीतिक दिशा देने पर जोर दिया.

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