अब घर तक खाना भी पहुंचाएगी Rapido, फूड डिलीवरी के कारोबार में स्विगी और जोमैटो को टक्कर देने की तैयारी

Rapido in Food Delivery Market: 2015 में बाइक-टैक्सी प्लेटफॉर्म के रूप में शुरू हुई रैपिडो तेजी से भारत में दूसरी सबसे बड़ी राइड-हेलिंग कंपनी बन गई है. जोमैटो के पास अभी भी 57.1 फीसदी बाजार हिस्सेदारी है. रैपिडो कमीशन वाले मुद्दे को एक गैप के रूप देख रही है.

रैपिडो Image Credit: Getty image/Money9live

Rapido in Food Delivery Market: राइड-हेलिंग रैपिडो फूड डिलीवरी सेक्टर में जोमैटो और स्विगी को टक्कर देने के लिए कमर कस रही है. फूड डिलीवरी के कारोबार में उतरने के प्लान पर रैपिडो ने काम करना शुरू कर दिया है. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, रैपिडो वर्तमान में अपने प्लेटफॉर्म पर फूड डिलीवरी सर्विस शुरू करने से लिए रेस्टोरेंट मालिकों के साथ बातचीत कर रहा है. कंपनी का मुख्य उद्देश्य खुद को मौजूदा फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म द्वारा आमतौर पर लगाए जाने वाले हाई कमीशन शुल्क के विकल्प के रूप में पेश करना है.

रेस्टोरेंट मालिकों के साथ बातचीत

रिपोर्ट के अनुसार, रैपिडो के सीनियर अधिकारी एक नए व्यवसाय मॉडल का पता लगाने के लिए रेस्टोरेंट मालिकों के साथ मीटिंग कर रहे हैं. रैपिडो के इस कारोबार में उतरने से कंपटीशन बढ़ सकता है. हालांकि चर्चाएं अभी भी शुरुआती फेज में हैं और कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. कंपनी जोमैटो और स्विगी द्वारा उपयोग किए जाने वाले कमीशन स्ट्रक्चर पर बढ़ती निराशा को भुनाने की कोशिश कर रही है.

डिलीवरी का काम संभालती है रैपिडो

फिलहाल रैपिडो अपने टू-व्हीलर्स वाहनों के बेड़े के जरिए अलग-अलग रेस्तराओं के लिए डिलीवरी सर्विस प्रदान करता है. यहां तक कि स्विगी के लिए भी कुछ डिलीवरी संभालता है, जो रैपिडो में एक निवेशक है. विशेष रूप से स्विगी के निवेश में कोई स्पेशल शर्त शामिल नहीं है. इससे रैपिडो को बिना किसी प्रतिबंध के फूड डिलीवरी सर्विस में विस्तार करने की अनुमति मिलती है.

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तेजी से बढ़ी रैपिडो

2015 में बाइक-टैक्सी प्लेटफॉर्म के रूप में शुरू हुई रैपिडो तेजी से भारत में दूसरी सबसे बड़ी राइड-हेलिंग कंपनी बन गई है. वार्षिक ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) में 1 अरब डॉलर से अधिक हासिल करने के बाद, रैपिडो अब 100 से अधिक शहरों में काम करती है और इस साल के अंत तक 500 शहरों तक अपनी पहुंच बढ़ाने की योजना बना रही है. कंपनी ने हाल ही में वेस्टब्रिज कैपिटल के नेतृत्व में विस्तारित 200 मिलियन डॉलर के फंडिंग राउंड के हिस्से के रूप में डच निवेशक प्रोसस से 30 मिलियन डॉलर जुटाए हैं.

जोमैटो-स्विगी का दबदबा

रैपिडो ने फूड डिलीवरी सेगमेंट में ऐसे समय कदम रखने की योजना बना रही है, जब यह सेक्टर चुनौतियों का सामना कर रहा है. इसमें कमीशन दरों पर विवाद और ग्रोथ में कमी शामिल है. इन मुद्दों के बावजूद, जोमैटो के पास अभी भी 57.1 फीसदी बाजार हिस्सेदारी है, जबकि स्विगी का भी दबदबा बना हुआ है.

जोमैटो-स्विगी को चुनौती

जेप्टो, ब्लिंकिट (जोमैटो के स्वामित्व में) और एक्सेल समर्थित स्विश जैसी अन्य स्टैंडअलोन सर्विसेज जैसे नए प्लेयर की दखल ने प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा दिया है. इसके अलावा 10 मिनट की फूड डिलीवरी की शुरुआत को नेशनल रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) से प्रतिरोध का सामना करना पड़ा है, जिसने जोमैटो-स्विगी के एकाधिकार को चुनौती देने के लिए तीसरे प्लेयर की मांग की है.

रैपिडो का फूड डिलीवरी बाजार में एंट्री, अपनी सर्विस को डायवर्सिफाई और क्विक कॉमर्स की बढ़ती मांग का लाभ उठाने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है. अपने मौजूदा दोपहिया वाहनों के बेड़े का लाभ उठाकर, रैपिडो का लक्ष्य हाइपरलोकल डिलीवरी की पेशकश करना हैं.

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