युद्ध हर रोज काट रहा आपकी जेब, दूध, ब्रेड से लेकर घूमना-फिरना हुआ महंगा; जानें 90 दिन में कितना बढ़ गया बोझ
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव का असर अब भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर साफ दिखाई दे रहा है. पिछले 90 दिनों में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, पीएनजी और कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसके साथ ही दूध, ब्रेड, पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स, पेंट और कारों के दाम भी बढ़े हैं.
War Impact on Economy: पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव का असर अब सीधे भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर दिखाई देने लगा है. अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर पहली बार 28 फरवरी को हमला किया था. इस हमले को करीब 90 दिन हो चुके हैं. इन 90 दिनों के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, सप्लाई चेन पर दबाव और परिवहन लागत बढ़ने से पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, एलपीजी, खाद्य पदार्थों और यहां तक कि कारों की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो आने वाले दिनों में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है.
पेट्रोल-डीजल ने बढ़ाया खर्च
15 मई के बाद से पेट्रोल की कीमतों में करीब 7.8 फीसदी और डीजल की कीमतों में लगभग 8.6 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है. राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत करीब 102 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है. इससे निजी वाहन चलाने वालों के मासिक ईंधन खर्च में सीधा इजाफा हुआ है. वहीं, ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ने से अन्य वस्तुओं के दाम भी प्रभावित हो रहे हैं.
सीएनजी और पीएनजी भी महंगी
दिल्ली-एनसीआर में 15 मई के बाद सीएनजी की कीमतों में चार बार बढ़ोतरी की जा चुकी है. कुल मिलाकर सीएनजी करीब 6 रुपये प्रति किलोग्राम महंगी हुई है. दिल्ली में इसकी कीमत लगभग 83.09 रुपये प्रति किलोग्राम और नोएडा, ग्रेटर नोएडा व गाजियाबाद में करीब 91.70 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई है.
घरेलू उपयोग की पाइप गैस यानी पीएनजी भी महंगी हो गई है. मुंबई में पीएनजी की कीमत 50 पैसे प्रति यूनिट बढ़कर 52 रुपये प्रति यूनिट हो गई है, जिससे रसोई का मासिक बजट प्रभावित हो सकता है.
कमर्शियल एलपीजी में बड़ा झटका
रेस्टोरेंट, होटल और छोटे कारोबारियों को सबसे बड़ा झटका कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों से लगा है. 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में करीब 993 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. यह लगभग 48 फीसदी की छलांग है, जिसके बाद इसकी कीमत करीब 3,071 रुपये तक पहुंच गई है. इसका असर खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है.
दूध, ब्रेड और रोजमर्रा का सामान भी महंगा
ईंधन और परिवहन लागत बढ़ने से दूध के दाम 2 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गए हैं. वहीं, ब्रेड की कीमत में 2 रुपये से 5 रुपये प्रति पैकेट तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, खाने-पीने के सामान और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स की कीमतों में 3 फीसदी से 7 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है. इसकी मुख्य वजह परिवहन खर्च, पैकेजिंग लागत और कच्चे तेल से जुड़े कच्चे माल की महंगाई है.
कारें और पेंट भी हुए महंगे
ऑटोमोबाइल कंपनियों ने भी बढ़ी लागत का बोझ ग्राहकों पर डालना शुरू कर दिया है. मारुति ने अपने वाहनों की कीमतों में 3,0000 रुपये तक की बढ़ोतरी की है, जबकि हुंडई ने कीमतें 12,800 रुपये तक बढ़ाई हैं. वहीं, पेंट उद्योग में कच्चे तेल से जुड़े केमिकल्स और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने के कारण दो चरणों में 10 फीसदी से 15 फीसदी तक कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई है.
बिजली और हवाई यात्रा पर भी असर
उत्तर प्रदेश में 1 जून से बिजली बिल पर 10 फीसदी तक अतिरिक्त सरचार्ज लगाया जाएगा, जिससे घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं का खर्च बढ़ेगा. उधर, विमानन क्षेत्र भी दबाव में है. एयर इंडिया और इंडिगो ने घरेलू उड़ानों में 22 फीसदी तक कटौती का ऐलान किया है. उड़ानों की संख्या कम होने से टिकट और महंगे हो सकते हैं.
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