RBI MPC: रिजर्व बैंक ने CRR में की 0.5 फीसदी की कटौती, रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं

रिजर्व बैंक ने लगातार 11वीं बार रेपो रेट में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया है. हाल ही में आए जीडीपी के आंकड़े ने रिजर्व बैंक पर दबाव बढ़ा दिया है. क्योंकि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के दौरान जीडीपी ग्रोथ रेट महज 5.4 फीसदी रही है.

सस्ते कर्ज की उम्मीदों को झटका. Image Credit: RBI-MPC

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी ने एक बार फिर से रेपो रेट में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया है. रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी ने रेपो रेट को 6.50 फीसदी पर बरकरार रखने का फैसला किया है. हालांकि, केंद्रीय बैंक ने कैश रिजर्व रेश्यो (CRR) में कटौती का ऐलान किया है.

CRR में हुई कितनी कटौती?

रिजर्व बैंक ने CRR को 4.50 फीसदी से घटाकर 4 फीसदी कर दिया है. यानी आधे फीसदी की कटौती हुई है. रिजर्व बैंक के इस फैसले से 1.16 लाख करोड़ रुपये की लिक्विडिटी सिस्टम में आएगी. CRR में कटौती उम्मीद से अधिक हुई है, क्योंकि अनुमान था कि 0.25 फीसदी की कटौती हो सकती है.

CRR में कटौती ऐसे समय में की गई है जब आरबीआई ने विदेशी करेंसी मार्केट में महत्वपूर्ण हस्तक्षेप के बाद रुपये को स्थिर करने के अपने प्रयासों को जारी रखा है. इस फैसले से लिक्विडिटी की चुनौतियों से निपटने की कोशिश की गई है

स्टांस बना हुआ है न्यूट्रल

शक्तिकांत दास ने कहा कि MPC ने 4-2 की बहुमत से ब्याज दर को 6.5 फीसदी पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है. जबकि SDF दर 6.25 फीसदी और MSF दर 6.75 फीसदी पर बनी हुई है. केंद्रीय बैंक का स्टांस न्यूट्रल बना हुआ है. MPC ने सर्वसम्मति से स्टांस को न्यूट्रल बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की है, जो मौजूदा आर्थिक स्थितियों के प्रति सतर्क दृष्टिकोण का संकेत देता है.

GDP ग्रोथ प्रोजेक्शन घटा

आरबीआई ने GDP ग्रोथ प्रोजेक्शन घटाया, साल 2024-25 में अब 6.6 फीसदी रहेगी ग्रोथ रेट, पहले 7.2 फीसदी का लगाया था अनुमान

खाद्य महंगाई दर अभी भी टेंशन

शक्तिकांत दास ने कहा कि खाद्य महंगाई दर Q3 के दौरान अधिक रहने की उम्मीद है, लेकिन FY25 की Q4 से इसमें कमी आने की उम्मीद है. दास ने बताया कि उच्च मुद्रास्फीति उपभोक्ताओं को उनकी डिस्पोजेबल इनकम को कम करके प्रभावित करती है, जो बदले में खर्च और ओवरऑल इकोनॉमिक डायनामिक को प्रभावित करती है. RBI ने वित्त वर्ष 2025 के लिए CPI मुद्रास्फीति को 4.5 फीसदी से बढ़ाकर 4.8 फीसदी पर आंका है, जो महंगाई और ग्रोथ को संतुलित करने में लगातार चुनौतियों को दर्शाता है.

गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौसम संबंधी मुश्किलें, वित्तीय अस्थिरता और जियो-पॉलिटिकल तनाव को जोखिम के रूप में चिह्नित किया है. इन कारणों की वजह से महंगाई बढ़ सकती है.

EMI पर फौरी राहत नहीं

रेपो रेट के 6.50% पर स्थिर रहने के चलते होम लोन EMI या रियल एस्टेट मार्केट में तुरंत कोई बदलाव नहीं होगा. चूंकि रेपो रेट में बदलाव नहीं हुआ है. इसलिए बैंकों द्वारा अपनी उधार दरों को समायोजित करने की संभावना नहीं है. इसलिए आपकी EMI अभी स्थिर रहेगी.

आखिर बार कब हुआ था बदलाव

रिजर्व बैंक ने लगातार 11वीं बार रेपो रेट में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया है. फरवरी 2023 के बाद से रेपो रेट 6.50 फीसदी पर स्थिर है. अप्रैल 2022 में रिजर्व बैंक ने इमरजेंसी बैठक बुलाकर रेपो रेट बढ़ाने की शुरुआत की थी. इसके बाद लगातार रेपो रेट में इजाफा हुआ और ये 4 फीसदी से 6.50 फीसदी पर आ गया.