8th Pay Commission में OPS vs NPS पर घमासान, कर्मचारियों ने मांगी गारंटीड पेंशन
8th Pay Commission के सामने OPS vs NPS का मुद्दा अहम बना हुआ है. कर्मचारी और पेंशनर संगठन गारंटीड पेंशन, रिटायरमेंट सिक्योरिटी और पेंशन बेनिफिट्स में सुधार की मांग कर रहे हैं. MSA ने OPS बहाल करने और लास्ट पे ड्रॉन के 50% के बराबर गारंटीड पेंशन की मांग की है. FNPO ने NPS और UPS कर्मचारियों को डिफाइंड-बेनिफिट पेंशन फ्रेमवर्क में लाने की मांग की है.
Highlights
- 8th Pay Commission में OPS vs NPS पर बहस तेज, कर्मचारियों ने मांगी गारंटीड पेंशन.
- MSA ने OPS बहाली और लास्ट पे ड्रॉन के 50% के बराबर गारंटीड पेंशन की मांग की है.
- BPS ने 45,000 रुपये मिनिमम पेंशन और 67% पेंशन की मांग रखी है.
8th Pay Commission के सामने OPS vs NPS का मुद्दा लगातार अहम होता जा रहा है. कर्मचारी और पेंशनर संगठनों की ओर से रिटायरमेंट सिक्योरिटी बढ़ाने, गारंटीड पेंशन देने और पेंशन बेनिफिट्स में सुधार की मांग की जा रही है. खासतौर पर 2004 के बाद सरकारी सेवा में आए कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम यानी OPS और नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS का मुद्दा महत्वपूर्ण बना हुआ है.
18 महीने का दिया गया समय
8th Pay Commission का गठन 3 नवंबर 2025 को हुआ था और अब इसे बने 10 महीने से ज्यादा समय हो चुका है. कमीशन की अध्यक्षता जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं. कमीशन को सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज की सैलरी, पेंशन, अलाउंस और अन्य मुद्दों से जुड़ी शिकायतों और मांगों पर विचार करके बदलाव की सिफारिश करनी है.
कमीशन को अपनी फाइनल रिपोर्ट सरकार को सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है. इस दौरान देश के अलग-अलग शहरों में एम्प्लॉयी यूनियंस और एसोसिएशंस के साथ मीटिंग्स की जा रही हैं. सितंबर में पुडुचेरी में 9 सितंबर और चंडीगढ़ में 16, 17 और 18 सितंबर को मीटिंग्स हुईं. अक्टूबर में बेंगलुरु में 7 और 8 अक्टूबर को मीटिंग्स प्रस्तावित हैं.
OPS vs NPS क्यों बना बड़ा मुद्दा
8th Pay Commission के सामने फिटमेंट फैक्टर, सैलरी रिवीजन, पेंशन रिफॉर्म्स और अलाउंस समेत कई बड़े मुद्दे हैं. हालांकि, OPS और NPS के बीच का अंतर और रिटायरमेंट बेनिफिट्स की सिक्योरिटी कर्मचारी संगठनों की प्रमुख चिंताओं में शामिल है.
कई एम्प्लॉयी और पेंशनर ऑर्गेनाइजेशंस ने अपने मेमोरेंडम में कंट्रीब्यूटरी पेंशन व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है. इन संगठनों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था उनकी रिटायरमेंट सिक्योरिटी से जुड़ी अपेक्षाओं के अनुरूप पर्याप्त नहीं है. उनका जोर ऐसी पेंशन व्यवस्था पर है, जिससे कर्मचारियों और उनके परिवारों को रिटायरमेंट के बाद अधिक फाइनेंशियल सिक्योरिटी मिल सके.
MSA ने OPS बहाल करने की मांग की
मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन यानी MSA, सर्वे ऑफ इंडिया ने ओल्ड पेंशन स्कीम यानी OPS को फिर से लागू करने की मांग की है. संगठन ने लास्ट पे ड्रॉन के 50% के बराबर गारंटीड पेंशन देने की मांग रखी है. वहीं फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशंस यानी FNPO ने NPS और यूनिफाइड पेंशन स्कीम यानी UPS के तहत आने वाले कर्मचारियों को डिफाइंड-बेनिफिट पेंशन फ्रेमवर्क में वापस लाने की मांग की है.
संगठन का जोर रिटायरमेंट बेनिफिट्स में अधिक सिक्योरिटी देने पर है. रेलवे सीनियर सिटिजंस वेलफेयर सोसाइटी यानी RSCWS ने भी गारंटीड मिनिमम पेंशन और रिटायरमेंट सिक्योरिटी बढ़ाने की मांग की है. संगठन ने पेंशनर्स की फाइनेंशियल सिक्योरिटी और हेल्थकेयर सिक्योरिटी से जुड़े मुद्दों को भी 8th Pay Commission के सामने उठाया है.
Bharat Pensioners’ Samaj की बड़ी मांगें
भारत पेंशनर्स समाज यानी BPS ने भी पेंशन स्ट्रक्चर में बदलाव से जुड़ी कई मांगें रखी हैं. संगठन ने 45,000 रुपये की मिनिमम पेंशन, लास्ट पे ड्रॉन के 67% के बराबर पेंशन और लास्ट पे ड्रॉन के 50% के बराबर फैमिली पेंशन की मांग की है. इसके अलावा पेंशन पैरिटी और अन्य रिटायरमेंट बेनिफिट्स में सुधार की मांग भी की गई है. ये सभी मांगें 8th Pay Commission को दिए गए मेमोरेंडम और प्रपोजल का हिस्सा हैं.
2027 में आ सकती है फाइनल रिपोर्ट
8th Pay Commission के सामने पेंशन से जुड़े मुद्दों के अलावा कई अन्य मांगें भी रखी गई हैं. अलग-अलग एम्प्लॉयी यूनियंस और एसोसिएशंस ने हायर फिटमेंट फैक्टर, पेंशन पैरिटी में सुधार और मिनिमम पेंशन बढ़ाने जैसी मांगें भी की हैं. कमीशन की फाइनल रिपोर्ट सरकार को मई-जून 2027 तक सौंपे जाने की संभावना है. इसके बाद पेंशन स्ट्रक्चर और उससे जुड़े बदलावों पर सरकार की ओर से फैसला लिया जाएगा.
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