Subhash Chandra insolvency: NCLT के ₹6.5 करोड़ के रीपेमेंट प्लान के खिलाफ सुनवाई करेगा NCLAT, बैंकों ने दी है चुनौती

लेनदारों की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपीलेट ट्रिब्यूनल से इस मामले पर जल्द सुनवाई करने का आग्रह किया. NCLAT मंगलवार सुबह 10 बजे मामले की सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया.

सुभाष चंद्रा Image Credit:

नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) मंगलवार (1 सितंबर) को लेनदारों की उस अपील पर सुनवाई करेगा, जिसमें जी ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा के रीपेमेंट प्लान को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) से मिली मंजूरी को चुनौती दी गई है. LIC हाउसिंग और कई बैंकों समेत लेनदारों ने सोमवार को NCLAT का रुख किया है.

सुनवाई के लिए सहमत

लेनदारों की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपीलेट ट्रिब्यूनल से इस मामले पर जल्द सुनवाई करने का आग्रह किया. NCLAT मंगलवार सुबह 10 बजे मामले की सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया.

बैंकों ने दी है प्लान को चुनौती

केनरा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UK) लिमिटेड और LIC हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड ने शनिवार को कहा कि वे NCLT के उस आदेश को चुनौती देंगे, जिसमें एसेल ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा के प्रस्तावित रीपेमेंट प्लान को मंजूरी दी गई थी. इससे उनकी पर्सनल गारंटी से जुड़े दावों के निपटारे को लेकर कानूनी लड़ाई और बढ़ जाएगी.

नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) मंगलवार (1 सितंबर) को लेनदारों की उस अपील पर सुनवाई करेगा, जिसमें जी ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा के रीपेमेंट प्लान को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) से मिली मंजूरी को चुनौती दी गई है. LIC हाउसिंग और कई बैंकों समेत लेनदारों ने सोमवार को NCLAT का रुख किया है.

लेनदारों की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपीलेट ट्रिब्यूनल से इस मामले पर जल्द सुनवाई करने का आग्रह किया. NCLAT मंगलवार सुबह 10 बजे मामले की सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया.

रीपेमेंट प्लान

केनरा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UK) लिमिटेड और LIC हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड ने शनिवार को कहा कि वे NCLT के उस आदेश को चुनौती देंगे, जिसमें एसेल ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा के प्रस्तावित रीपेमेंट प्लान को मंजूरी दी गई थी. इससे उनकी पर्सनल गारंटी से जुड़े दावों के निपटारे को लेकर कानूनी लड़ाई और बढ़ जाएगी.

6.25 करोड़ रुपये

25 अगस्त को NCLT ने चंद्रा के रीपेमेंट प्लान को मंजूरी दी. इस प्लान के तहत लगभग 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकार किए गए दावों के बदले लेनदारों को 6.25 करोड़ रुपये और इनसॉल्वेंसी प्रोसेस की लागत के तौर पर 25 लाख रुपये का भुगतान किया जाना है.

यह मामला चंद्रा द्वारा एस्सेल ग्रुप से जुड़ी कंपनियों के लिए लिए गए लोन के बदले दी गई पर्सनल गारंटी से जुड़ा है. कई लेनदारों की आपत्तियों के बावजूद इस प्लान को मंजूरी दी गई, क्योंकि ट्रिब्यूनल ने माना कि इसे जरूरी बहुमत का समर्थन हासिल था.

असहमति जताने वाले लेनदारों ने क्या कहा?

लेनदारों का तर्क था कि ये पांच कंपनियां चंद्रा की सहयोगी या संबंधित पार्टियां थीं और उन्हें रीपेमेंट प्लान पर वोटिंग से रोका जाना चाहिए था. PTI की रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के 144 पेज के आदेश में कहा गया है कि इन पांच कंपनियों के वोटों की वजह से ही इस प्लान को कमिटी ऑफ़ क्रेडिटर्स (CoC) में कुल 80.814 फीसदी मंजूरी मिल पाई.

ये पांच कंपनियां हैं – वीना इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड, डायरेक्ट मीडिया डिस्ट्रीब्यूशन वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड, वर्ल्ड क्रेस्ट एडवाइजर्स LLP, लेमोनेड कैपिटल एडवाइजर्स LLP और कॉर्पकॉल कैपिटल एडवाइजर्स LLP.

लेनदारों का तर्क

HDFC बैंक और IDBI ट्रस्टीशिप सर्विसेज (जो एडलवाइस और फ्रैंकलिन टेम्पलटन फंड्स का प्रतिनिधित्व कर रहे थे) के नेतृत्व में असहमति जताने वाले लेनदारों ने तर्क दिया कि ये पांच कंपनियां इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत ‘सहयोगी’ (Associates) की परिभाषा में आती हैं और उनके वोटों को नहीं गिना जाना चाहिए था.

कुल दावा राशि का 3.2 फीसदी हिस्सा रखने वाले HDFC बैंक ने पहले कहा था कि वह भी इस प्लान का विरोध करता है और NCLT के आदेश के खिलाफ अपील करने पर विचार कर रहा है. असहमति जताने वाले एक अन्य लेनदार, केनरा बैंक ने भी कहा कि वह NCLT के आदेश के खिलाफ NCLAT में अपील दायर कर रहा है.

केनरा बैंक, जिसके पास 1.60 प्रतिशत वोटिंग शेयर था, ने कहा कि उसने रीपेमेंट प्लान के खिलाफ वोट दिया था. X (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट में बैंक ने कहा कि उसने फोरेंसिक ऑडिट की भी मांग की थी, लेकिन कम वोटिंग शेयर होने के कारण इस अनुरोध को मंजूरी नहीं दी जा सकी. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UK) ने भी कहा कि उसने इस प्लान को खारिज कर दिया था और वह तुरंत NCLAT के सामने NCLT के आदेश को चुनौती देगा.

LIC हाउसिंग फाइनेंस ने कहा कि वह अन्य सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर अपील दायर करेगा. लेंडर्स ने कहा कि प्लान को इसलिए मंजूरी दी गई क्योंकि 80.81% वोटिंग शेयर वाले दूसरे फाइनेंशियल क्रेडिटर्स ने इसका समर्थन किया था. लेंडर्स ने बताया कि मंजूर किए गए क्लेम की कुल रकम 22,006.57 करोड़ रुपये थी. जबकि रीपेमेंट प्लान में सिर्फ 6.5 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव था.

सुभाष चंद्रा ने क्या कहा?

गुरुवार को जारी एक सार्वजनिक बयान में चंद्रा ने 22,000 करोड़ रुपये की रकम को उनके द्वारा व्यक्तिगत रूप से लिए गए कर्ज के तौर पर दिखाए जाने को गलत बताया. उन्होंने कहा कि यह रकम उन गारंटी से जुड़े क्लेम को दिखाती है जो उन्होंने कॉरपोरेट कर्ज के लिए दी थीं.

चंद्रा ने तर्क दिया कि रीपेमेंट प्लान का विरोध करने वाले लेंडर्स के क्लेम 22,000 करोड़ रुपये के बजाय लगभग 3,992 करोड़ रुपये हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ग्रुप बकाया देनदारियों को निपटाने के लिए प्रतिबद्ध है.

बड़ा हेयरकट

रिपोर्ट्स में 22,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के क्लेम की तुलना चंद्रा की व्यक्तिगत संपत्ति से वसूल की जाने वाली लगभग 6.25 करोड़ रुपये की रकम से की गई, जिसे लगभग 99.97% का हेयरकट बताया गया. सरकारी सूत्रों ने कहा कि यह तुलना पूरी तस्वीर नहीं दिखाती है.

सूत्रों ने बताया कि 22,006 करोड़ रुपये की रकम चंद्रा द्वारा व्यक्तिगत रूप से लिए गए करज़ को नहीं दिखाती है. यह रकम एसेल/जी से जुड़ी कई कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज के लिए व्यक्तिगत गारंटर के तौर पर उनके खिलाफ मंज़ूर किए गए क्लेम को दिखाती है.

सरकारी नोट के अनुसार, ‘इसलिए बताई गई 99.97% की कटौती (हेयरकट) बैंकों के 22,000 करोड़ रुपये के कर्ज पर 99.97 फीसदी का नुकसान नहीं है. नोट में कहा गया है कि यह कटौती खास तौर पर उस रकम से जुड़ी है जो व्यक्तिगत गारंटर के तौर पर चंद्रा से वसूली जा सकती है.

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