घर में 90 लाख की ज्वेलरी मिली, फिर भी नहीं लगा टैक्स; ITAT ने सुनाया बड़ा फैसला

घर में 90.59 लाख रुपये की ज्वेलरी मिलने के मामले में ITAT ने अहम फैसला सुनाया है. ट्रिब्यूनल ने कहा कि घर से ज्वेलरी मिलने मात्र से उसे टैक्सपेयर की संपत्ति नहीं माना जा सकता. ज्वेलरी की ओनरशिप, सोर्स, फैमिली सर्कम्स्टांसेज और डॉक्यूमेंट्स की भी जांच जरूरी है. निर्मल कुमार अग्रवाल के मामले में पत्नी की ज्वेलरी को उनकी संपत्ति नहीं माना गया है.

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Highlights

  • घर से 90.59 लाख रुपये की ज्वेलरी मिलने पर भी पूरी रकम को टैक्सेबल नहीं माना गया.
  • ITAT ने कहा कि ज्वेलरी की ओनरशिप, सोर्स और फैमिली सर्कम्स्टांसेज को देखना जरूरी है.
  • 48.9 ग्राम ज्वेलरी को उचित माना गया और CBDT इंस्ट्रक्शन 1916 के 100 ग्राम बेंचमार्क का भी उल्लेख किया गया.

Gold Jewellery Tax: घर में गोल्ड ज्वेलरी रखने को लेकर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की कार्रवाई और टैक्स देनदारी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में नागपुर बेंच ऑफ इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल यानी ITAT ने अहम फैसला सुनाया है. ट्रिब्यूनल ने कहा कि किसी घर से ज्वेलरी मिलने मात्र से उसे उस व्यक्ति की संपत्ति नहीं माना जा सकता, जिसके परिसर में सर्च हुई है. ज्वेलरी का ओनरशिप, उसका सोर्स, परिवार की परिस्थितियां और ज्वेलरी की नेचर जैसे पहलुओं को भी देखना जरूरी है.

यह मामला निर्मल कुमार अग्रवाल बनाम ACIT, सेंट्रल सर्किल-2(1), नागपुर से जुड़ा है. मामले में फैसला 10 अगस्त को सुनाया गया. अग्रवाल एक प्रैक्टिसिंग चार्टर्ड अकाउंटेंट और एस एन जे एंड एसोसिएट्स में पार्टनर थे. उनके घर पर 26 जुलाई 2016 को इनकम टैक्स सर्च हुई थी.

घर से मिली 90.59 लाख रुपये की ज्वेलरी

सर्च के दौरान कुल 2,434 ग्राम ज्वेलरी मिली, जिसकी वैल्यू 90.59 लाख रुपये थी. इसमें से 1,314 ग्राम ज्वेलरी, जिसकी वैल्यू 33.33 लाख रुपये थी, जब्त की गई. इसके अलावा सर्च के दौरान 7.06 लाख रुपये कैश भी मिला, जिसमें से 5 लाख रुपये जब्त किए गए. बाद में असेसिंग ऑफिसर ने इनकम टैक्स एक्ट की सेक्शन 69ए के तहत 50 लाख रुपये की एडिशन की. इसे अनएक्सप्लेंड मनी माना गया. टैक्सपेयर ने इस एडिशन को चुनौती दी.

इसके बाद कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स अपील्स ने काफी राहत दी, लेकिन चार ज्वेलरी आइटम से जुड़ी 3.86 लाख रुपये की एडिशन बरकरार रखी. इन आइटम का ग्रॉस वेट 158 ग्राम और नेट वेट 104.70 ग्राम था. इसमें डायमंड और प्रेशियस स्टोन ज्वेलरी भी शामिल थी. इसके बाद टैक्सपेयर ने ITAT का रुख किया.

पत्नी की ज्वेलरी को पति की संपत्ति नहीं माना

ITAT के सामने अहम सवाल यह था कि कॉमन रेजिडेंस से मिली ज्वेलरी को क्या अपने आप उस व्यक्ति की ज्वेलरी माना जा सकता है, जिसके घर पर सर्च हुई है. ट्रिब्यूनल ने ऐसी धारणा को स्वीकार नहीं किया. दो विवादित ज्वेलरी आइटम का वेट 55.8 ग्राम था और उनकी वैल्यू 2.58 लाख रुपये थी. अग्रवाल की पत्नी ने इन आइटम पर ओनरशिप का दावा किया.

उनका कहना था कि उन्हें ये ज्वेलरी उनके माता-पिता से दो बेटियों के जन्म के अवसर पर गिफ्ट के रूप में मिली थी. वैल्यूएशन रिपोर्ट में भी इन ज्वेलरी आइटम को पत्नी के नाम पर दर्ज किया गया था. ITAT ने इस स्पष्टीकरण को स्वीकार किया और माना कि परिवार में महत्वपूर्ण अवसरों पर इस तरह के गिफ्ट दिए जाना सामान्य पारिवारिक परंपरा का हिस्सा हो सकता है.

ट्रिब्यूनल ने कहा कि अगर ज्वेलरी की ओनरशिप स्पष्ट है और वह परिवार के किसी दूसरे सदस्य की है, तो केवल कॉमन रेजिडेंस से बरामद होने के आधार पर उसे टैक्सपेयर की अनएक्सप्लेंड इन्वेस्टमेंट नहीं माना जा सकता. सर्च के दौरान भी ऐसा कोई एविडेंस नहीं मिला कि अग्रवाल ने इन ज्वेलरी आइटम में इन्वेस्टमेंट किया था.

खुद की ज्वेलरी में भी सिर्फ 48.9 ग्राम पर सवाल

इसके बाद ट्रिब्यूनल ने अग्रवाल की अपनी ज्वेलरी की जांच की. उनकी कुल ज्वेलरी 121.5 ग्राम बताई गई थी. इसमें से 72.6 ग्राम ज्वेलरी वर्ष 2008 से 2011 के बीच बैंकिंग चैनल के जरिए खरीदी गई थी और इसका रिकॉर्ड बुक्स ऑफ अकाउंट में मौजूद था. इस तरह केवल 48.9 ग्राम ज्वेलरी ऐसी बची, जिस पर सवाल उठाया गया था.

ट्रिब्यूनल ने इस मात्रा को भी उचित माना. इसके लिए अग्रवाल की उम्र, पारिवारिक स्थिति और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा गया. फैसले के समय अग्रवाल की उम्र 41 वर्ष थी. उनकी शादी को 15 वर्ष हो चुके थे और उनकी दो बेटियां थीं. वह प्रैक्टिसिंग चार्टर्ड अकाउंटेंट भी थे. ट्रिब्यूनल ने फैमिली सर्कम्स्टांसेज, सोशल स्टेटस और कस्टमरी प्रैक्टिसेज को ध्यान में रखते हुए 48.9 ग्राम ज्वेलरी को रीजनबली एक्सप्लेंड माना.

100 ग्राम की सीमा का भी किया उल्लेख

ट्रिब्यूनल ने CBDT इंस्ट्रक्शन नंबर 1916 में दिए गए बेंचमार्क का भी उल्लेख किया. फैसले के अनुसार, 48.9 ग्राम ज्वेलरी एक मेल फैमिली मेंबर के लिए निर्धारित 100 ग्राम की सीमा से कम थी. ITAT ने इस सीमा को ज्वेलरी पजेशन को रीजनबली एक्सप्लेंड मानने के आकलन में प्रासंगिक माना.

हालांकि, ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि कोई टैक्सपेयर बिना किसी सवाल के घर में किसी भी मात्रा में गोल्ड ज्वेलरी रख सकता है. हर मामले में ज्वेलरी की ओनरशिप, सोर्स और दूसरी परिस्थितियों की जांच महत्वपूर्ण रहेगी.

ज्वेलरी के सोर्स से जुड़े डॉक्यूमेंट जरूरी

फैसले से टैक्सपेयर्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आती है कि ज्वेलरी की ओनरशिप और उसके सोर्स को स्पष्ट रखना जरूरी है. परिवार के अलग-अलग सदस्यों की ज्वेलरी की ओनरशिप स्पष्ट होनी चाहिए. खरीदी गई ज्वेलरी के लिए इनवॉइस, बैंक रिकॉर्ड और बुक्स ऑफ अकाउंट जैसे डॉक्यूमेंट संभालकर रखना उपयोगी हो सकता है.

वहीं, गिफ्ट या इनहेरिटेड ज्वेलरी के मामले में भी उसके सोर्स और ओरिजिन की विश्वसनीय एक्सप्लेनेशन महत्वपूर्ण हो सकती है. ITAT ने CBDT इंस्ट्रक्शन नंबर 1916 को रीजनबल ज्वेलरी पजेशन के बेंचमार्क के रूप में प्रासंगिक माना, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि हर मामले के फैक्ट्स एंड सर्कम्स्टांसेज अलग हो सकते हैं.

60 फीसदी टैक्स रेट पर भी फैसला

इस मामले में ITAT ने सेक्शन 115बीबीई के तहत बढ़ी हुई 60 फीसदी टैक्स रेट को लागू करने से भी इनकार किया. ट्रिब्यूनल ने कहा कि अग्रवाल के मामले में सर्च 26 जुलाई 2016 को हुई थी, जबकि बढ़ी हुई टैक्स रेट बाद में लागू हुई. इसलिए इसे पुराने मामले पर लागू नहीं किया जा सकता.

अंततः ITAT ने टैक्सपेयर की अपील स्वीकार कर ली. यह फैसला बताता है कि घर में ज्वेलरी मिलने के मामले में केवल उसकी मात्रा या बरामदगी के आधार पर टैक्स देनदारी तय नहीं की जा सकती. ज्वेलरी की ओनरशिप, सोर्स, परिवार की परिस्थितियां और उपलब्ध डॉक्यूमेंट भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं.

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