तमिलनाडु की छिनी बादशाहत, महाराष्ट्र बना नंबर-1 एक्सपोर्ट रेडी राज्य, जानें टॉप 5 में किसे मिली जगह
नीति आयोग के एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स 2024 में महाराष्ट्र ने तमिलनाडु को पीछे छोड़ते हुए देश का सबसे एक्सपोर्ट-रेडी राज्य बनने का स्थान हासिल किया है. बड़े राज्यों में तमिलनाडु, गुजरात, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश टॉप-5 में रहे, जबकि छोटे राज्यों में उत्तराखंड अव्वल रहा है.
नीति आयोग ने बुधवार को एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स (EPI) 2024 जारी किया. यह इंडेक्स भारतीय राज्यों और यूनियन टेरिटरीज की एक्सपोर्ट रेडीनेस और परफॉर्मेंस का व्यापक आकलन करता है. इस बार महाराष्ट्र बड़े राज्यों की कैटेगरी में टॉप रैंक पर रहा है. महाराष्ट्र ने तमिलनाडु को पीछे छोड़ते हुए देश का सबसे एक्सपोर्ट रेडी राज्य बनने का दर्जा हासिल किया है. आइये जानते हैं कि कैटेगरी में टॉप-5 एक्सपोर्ट-रेडी स्टेट्स में अन्य किन राज्यों का नाम है.
बड़े राज्यों की कैटेगरी में टॉप-5 एक्सपोर्ट-रेडी स्टेट्स
रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र ने 68.01 स्कोर के साथ पहला स्थान हासिल किया है. इसके बाद तमिलनाडु और गुजरात दूसरे और तीसरे नंबर पर रहे हैं. वहीं उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश टॉप-5 बड़े राज्यों में शामिल रहे. इस रिपोर्ट को नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में रिलीज किया.
क्या है इसका मकसद
EPI 2024 के तहत FY 2022 से FY 2024 की अवधि के दौरान राज्यों की एक्सपोर्ट परफॉर्मेंस और फ्यूचर पोटेंशियल का मूल्यांकन किया गया है. इस इंडेक्स का मकसद कम्पेटिटिव फेडरलिज्म को बढ़ावा देना और भारत के एक्सपोर्ट इकोसिस्टम को मजबूत करना है. स्कोर के आधार पर राज्यों और यूनियन टेरिटरीज को लीडर्स, चैलेंजर्स और एस्पायरर्स की कैटेगरी में बांटा गया है.
स्मॉल स्टेट्स का हाल
स्मॉल स्टेट्स, नॉर्थ ईस्ट और यूनियन टेरिटरीज की कैटेगरी में उत्तराखंड ने पहला स्थान हासिल किया है. इसके बाद जम्मू-कश्मीर और नागालैंड का नंबर रहा. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह रैंकिंग दिखाती है कि ट्रेडिशनल मैन्युफैक्चरिंग हब्स के बाहर भी एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस में लगातार सुधार हो रहा है.
किन आधार पर हुआ मूल्यांकन
रिपोर्ट के अनुसार, EPI 2024 का फ्रेमवर्क चार पिलर्स और 70 पैरामीटर्स पर आधारित है. इनमें एक्सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, पॉलिसी एंड गवर्नेंस, इंडस्ट्रियल एंड इनोवेशन इकोसिस्टम और एक्सपोर्ट परफॉर्मेंस शामिल हैं. पिछले एडिशन की तुलना में इस बार पांच नए डायमेंशंस जोड़े गए हैं और मौजूदा इंडिकेटर्स को और स्ट्रीमलाइन किया गया है. खास तौर पर लॉजिस्टिक्स, MSMEs, ह्यूमन कैपिटल, कॉस्ट कम्पेटिटिवनेस और फाइनेंस तक पहुंच पर ज्यादा फोकस किया गया है.
नीति आयोग का बयान
नीति आयोग ने कहा कि यह इंडेक्स सिर्फ रैंकिंग टूल नहीं, बल्कि एक पॉलिसी गाइड के तौर पर तैयार किया गया है जिससे राज्य अपनी कमियों की पहचान कर सकें. बेस्ट प्रैक्टिस अपनाएं और एक्सपोर्ट से जुड़े इंस्टीट्यूशनल मैकेनिज्म को मजबूत कर सकें. उम्मीद है कि इससे सेंटर और स्टेट्स के बीच बेहतर कोऑर्डिनेशन, टार्गेटेड इंटरवेंशंस और MSMEs की ग्लोबल ट्रेड में भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा.