157 साल पुराने TATA ग्रुप में मचा घमासान, SP ग्रुप से टूट सकता है 89 साल पुराना रिश्‍ता, कंपनी के पास बचे ये 4 ऑप्‍शन

टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा सन्‍स में बड़ी हिस्‍सेदारी रखने वाले शापूरजी पालोनजी ग्रुप कंपनी से एग्जिट लेने की सोच रहे हैं. इससे टाटा ग्रुप में घमासान मचा हुआ है. इससे 89 साल पुराना रिश्‍ता टूटने की कगार पर है. तो आखिर क्‍या है एग्जिट के विकल्‍प, आइए जानते हैं.

TATA और शापूरजी पालोनजी ग्रुप में मचा घमासान Image Credit: money9 live

TATA Group dispute with SP group: देश का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित बिजनेस ग्रुप TATA Group एक बार फिर सुर्खियों में है. रतन टाटा के निधन के बाद यह 157 साल पुराना समूह न केवल रणनीतिक फैसलों बल्कि पारिवारिक विवादों और कानूनी उलझनों के चलते भी चर्चा में आ गया है. इस बार विवाद का केंद्र बना है शापूरजी पालोनजी ग्रुप (SP Group), जो 1936 से Tata Sons का सबसे बड़ा और पुराना शेयरहोल्डर है. अब ये एग्जिट की सोच रहा है. इससे टाटा और शापूरजी ग्रुप के बीच 89 साल पुराना रिश्‍ता टूटने की कगार पर है.

कितनी है हिस्‍सेदारी?

SP ग्रुप के पास टाटा सन्स में 18.37% हिस्सेदारी है, लेकिन अब यह ऐतिहासिक साझेदारी टूटने की कगार पर है. न्‍यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, SP ग्रुप अपने भारी कर्ज संकट से निपटने के लिए यह हिस्सेदारी बेचने को तैयार है. टाटा सन्स इस बार स्थायी समाधान की तलाश में है. इसमें SP ग्रुप की हिस्सेदारी खरीदना भी एक विकल्प है. लेकिन मामला इतना आसान नहीं है, ऐसे में कंपनी के पास बचाव के 4 ऑप्‍शन हैं.

SP ग्रुप के एग्जिट के 4 संभावित विकल्‍प

हिस्सेदारी की सीधी खरीद (Buyback)

टाटा सन्स SP ग्रुप की पूरी 18.37% हिस्सेदारी खरीद सकता है. लेकिन इस डील की अनुमानित कीमत ₹3 लाख करोड़ हो सकती है. साथ ही SP ग्रुप को करीब 36% कैपिटल गेन टैक्स भी देना पड़ेगा, जिससे उनका हजारों करोड़ का नुकसान हो सकता है.

इक्विटी स्वैप (Equity Swap)

SP ग्रुप की टाटा सन्स में हिस्सेदारी को TCS, Tata Steel जैसे ग्रुप कंपनियों के शेयरों से बदला जा सकता है. इससे SP ग्रुप धीरे-धीरे अपनी हिस्सेदारी भुना सकता है और 2026 तक चुकाने वाले 1 बिलियन डॉलर कर्ज से राहत पा सकता है. हालांकि, इसके लिए टाटा सन्स को अपने आर्टिकल्‍स ऑफ एसोसिएशन में बदलाव करना होगा.

बाहरी खरीदार को बिक्री

SP ग्रुप अपनी हिस्सेदारी किसी प्राइवेट इक्विटी फंड या बाहरी निवेशक को बेच सकता है. इससे टाटा सन्स को कोई अतिरिक्त खर्च नहीं उठाना पड़ेगा. लेकिन ऐसा तभी संभव है जब टाटा सन्स खुद को लिस्टेड कंपनी बनाए, जिसका टाटा ट्रस्ट लगातार विरोध करते आए हैं.

टाटा सन्स का IPO

अगर टाटा सन्स पब्लिक हो जाए तो SP ग्रुप को औपचारिक एग्जिट का रास्ता मिल सकता है. मगर टाटा ट्रस्ट्स, जो कंपनी को कंट्रोल करते हैं, किसी भी हाल में इसका IPO नहीं चाहते. ऐसे में यह विकल्प भी मुश्किल नजर आता है.

यह भी पढ़ें: टाटा ट्रस्ट्स में घमासान! बोर्ड मीटिंग से पहले अमित शाह से मिले नोएल टाटा और एन चंद्रशेखरन, क्या है मामला?

SEBI की मंजूरी जरूरी

SP ग्रुप प्रमोटर की श्रेणी में आता है, चूंकि उसके पास टाटा ग्रुप के 10% से ज्‍यादा की हिस्‍सेदारी है, इसलिए किसी भी सौदे को RBI, SEBI, और शायद सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी की जरूरत होगी.

कैसे शुरू हुआ था टकराव?

2016 में साइरस मिस्त्री और रतन टाटा के बीच हुए हाई-प्रोफाइल विवाद ने टाटा और शापूरजी ग्रुप के रिश्‍तों में दरार डाल दी थी. मामला राष्ट्रीय कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां टाटा सन्स को जीत मिली. अब, लगभग एक दशक बाद, नोएल टाटा और मेहली मिस्त्री के बीच नई तनातनी की खबरें सामने आ रही हैं.

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