मिट्टी से मंडी तक: ऐसे ऑर्गेनिक खेती बदल रही किसानों की कमाई; जमीन से सीधे थाली तक पहुंच रहा उत्पादन

ऑर्गेनिक खेती जमीन से लेकर बाजार तक किसानों की कमाई का नया रास्ता बना रही है. मिट्टी की सेहत को नेचुरल तरीके से मजबूत करने से लेकर देसी बीजों की वापसी, ड्रिप इरिगेशन के जरिये पानी की बचत और केमिकल इनपुट को कम करने जैसे कदम खेती को सस्टेनेबल बना रहे हैं.

मिट्टी से मंडी तक: ऐसे ऑर्गेनिक खेती बदल रही किसानों की कमाई; जमीन से सीधे थाली तक पहुंच रहा उत्पादन
मिट्टी की सेहत

ऑर्गेनिक फार्मिंग का पहला कदम मिट्टी की सेहत को दोबारा मजबूत बनाना है. किसान गोबर खाद, कम्पोस्ट और हरी खाद के जरिये जमीन को नेचुरल पोषण देते हैं. इससे मिट्टी में माइक्रो ऑर्गेनिज्म सक्रिय रहते हैं और खेती की पैदावार स्थिर रहती है. कई राज्यों में किसान लगातार केमिकल इनपुट को कम कर नेचुरल संसाधनों पर लौट रहे हैं.
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नेचुरल कीट नियंत्रण

ऑर्गेनिक खेती में कीटनाशकों की जगह देसी तरीके अपनाए जाते हैं. नीम घोल, छाछ आधारित मिश्रण और फसलों का सही संयोजन खेत में कीटों की संख्या नियंत्रित करता है. इससे किसानों को खर्च भी कम करना पड़ता है और खेत की जैव विविधता सुरक्षित रहती है.
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पानी की बचत

ऑर्गेनिक फार्मिंग में पानी बचाने को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है. किसान ड्रिप इरिगेशन और स्प्रिंकलर तकनीक के जरिये फसलों को नियंत्रित मात्रा में नमी देते हैं. यह तरीका मिट्टी को कटाव से बचाता है और उत्पादन पर भी सकारात्मक असर डालता है.
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देसी बीजों की वापसी

देसी बीजों की मांग फिर बढ़ने लगी है. किसान परंपरागत बीजों को संरक्षित कर रहे हैं और फसल दर फसल उन्हें आगे बढ़ा रहे हैं. ये बीज स्थानीय मौसम के अनुकूल होते हैं और कई बार बीमारी व कीट प्रकोप का सामना बेहतर तरीके से कर पाते हैं.
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सीधे ग्राहक तक पहुंच

ऑर्गेनिक उत्पाद अब शहरों और गांवों में सीधे ग्राहकों तक पहुंचने लगे हैं. किसान छोटे मार्केट, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और समुदाय आधारित नेटवर्क के जरिये बिना बिचौलियों के अपनी फसल बेच रहे हैं. इससे उन्हें बेहतर दाम मिलता है और उपभोक्ताओं को ताजा, नेचुरल उत्पाद मिलता है.
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