कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर तक पहुंचने के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में नहीं होगी तत्काल वृद्धि: रिपोर्ट
मिडिल ईस्ट तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं, लेकिन भारत में फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की संभावना नहीं है. पीटीआई के अनुसार, सरकार स्थिति पर नजर रख रही है और तेल कंपनियां कीमतों में उतार-चढ़ाव को फिलहाल अपने मार्जिन से संभाल रही हैं.
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है. इसके बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतों में फिलहाल तत्काल बढ़ोतरी की संभावना नहीं है. पीटीआई में सूत्रों के हवाले से यह जानकारी देते हुए कहा है कि सरकार और तेल कंपनियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 9% उछलकर 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया. वहीं अमेरिकी क्रूड (WTI) भी 8.6% बढ़कर 72.79 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया जो शुक्रवार को करीब 67 डॉलर के आसपास था.
भारत पर क्यों पड़ता है असर
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और अपनी जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. यही तेल रिफाइनरियों में प्रोसेस होकर पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन में बदलता है इसलिए वैश्विक बाजार में तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर दबाव पड़ सकता है.
सरकार कर रही स्थिति की निगरानी
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर कच्चे तेल, एलपीजी और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई की समीक्षा की. मंत्रालय ने कहा है कि देश में ईंधन की उपलब्धता और किफायती कीमत सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे.
इसके अलावा वाणिज्य मंत्रालय ने भी निर्यात-आयात पर संभावित असर को लेकर लॉजिस्टिक्स कंपनियों, शिपिंग लाइनों और अन्य हितधारकों के साथ बैठक की है, ताकि आपूर्ति चेन सुचारू बनी रहे.
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी चिंता बढ़ गई है. भारत का करीब आधा तेल आयात इसी मार्ग से होता है. युद्ध की स्थिति के बाद ईरान ने जहाजों को इस रास्ते से दूर रहने की चेतावनी दी है जिससे टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है.
अभी क्यों नहीं बढ़ेंगे दाम
क्रूड ऑयल में बढ़ोतरी के बावजूद फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की संभावना कम है. दरअसल भारत में अप्रैल 2022 से ईंधन के खुदरा दाम स्थिर हैं. इस दौरान सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) कभी नुकसान सहती हैं तो कभी कीमतें कम होने पर मार्जिन बनाती हैं. पीटीआई के अनुसार, सरकार ऐसी नीति अपनाती है जिसमें अंतरराष्ट्रीय कीमतें कम होने पर कंपनियां मार्जिन बनाती हैं और कीमतें बढ़ने पर उपभोक्ताओं को राहत दी जाती है. जब तक कच्चे तेल की कीमतों में तेज और लंबे समय तक उछाल नहीं आता, तब तक खुदरा कीमतों में तुरंत बदलाव की संभावना नहीं है.
तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत
सरकारी तेल कंपनियां इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने हाल के वर्षों में अच्छा मुनाफा कमाया है. चालू वित्त वर्ष की दिसंबर तिमाही में ही इन कंपनियों ने करीब ₹23,743 करोड़ का संयुक्त मुनाफा दर्ज किया है. इससे कंपनियों के पास कीमतों में उतार-चढ़ाव को संभालने की क्षमता बनी हुई है.
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