होर्मुज संकट से पेट्रोल-डीजल निर्यात और LPG सप्लाई की बढ़ी टेंशन, रूस से तेल आयात बढ़ाने की तैयारी में सरकार
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज मार्ग को लेकर तनाव को देखते हुए भारत सरकार ईंधन आपूर्ति सुरक्षित रखने के लिए सतर्क मोड में आ गई है. हालात बिगड़ने पर पेट्रोल-डीजल निर्यात पर अस्थायी रोक, रूस से तेल आयात बढ़ाने और LPG की मांग प्रबंधन जैसे कदमों पर विचार किया जा रहा है. सरकारी रिफाइनरियों ने उत्पादन बढ़ाना शुरू कर दिया है.
Iran Disruption impact on Crude Oil: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज मिडवॉटर्स टैंकर आवाजाही बाधित होने की आशंका ने पेट्रोल-डीजल के निर्यात पर रोक लगने समेत LPG की सप्लाई की टेंशन बढ़ा दी है. इसी समस्या से निपटने के लिए भारत सरकार ने ईधन आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए कई इमरजेंसी विकल्पों पर मंथन शुरू कर दिया है. सूत्रों के मुताबिक अगर हालात हफ्तों तक बिगड़े रहते हैं तो पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर अस्थायी रोक, रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाना और मांग प्रबंधन जैसे कदम उठाए जा सकते हैं.
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला और ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया. यूरोप में गैस की कीमतें भी जोरदार बढ़ीं. सऊदी अरब और कतर की ऊर्जा सुविधाओं पर हमलों के बाद उत्पादन में बाधा आई है, जिससे सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है.
दिग्गज गैस कंपनियों ने बढ़ाया उत्पादन
सबसे ज्यादा चिंता LPG को लेकर है, क्योंकि भारत अपनी खपत का बड़ा हिस्सा आयात करता है और इसका ज्यादातर हिस्सा खाड़ी देशों से आता है. अगर सप्लाई बाधित होती है तो मौजूदा स्टॉक सीमित समय तक ही जरूरतें पूरी कर पाएंगे. इसी को देखते हुए इंडियन ऑयल, HPCL और BPCL जैसे सरकारी रिफाइनरियों ने कुछ संयंत्रों में LPG उत्पादन बढ़ाना शुरू कर दिया है.
राशनिंग पर विचार
सरकार जरूरत पड़ने पर ग्रामीण क्षेत्रों में वैकल्पिक ईंधन रखने वाले उपभोक्ताओं के लिए LPG राशनिंग जैसे कदमों पर भी विचार कर रही है. साथ ही रूसी कच्चे तेल की अतिरिक्त खेपों को भारत की ओर मोड़ने की संभावना भी तलाशी जा रही है, ताकि खाड़ी क्षेत्र से सप्लाई कम होने की स्थिति में अंतर पूरा किया जा सके.
मंत्रालय ने क्या कहा
ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक तेल मंत्रालय का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और देश में प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता और विजिबिल्टी सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे. हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय तनाव ज्यादा लंबे समय तक नहीं टिक सकता, लेकिन तनाव बढ़ने पर वैश्विक ऊर्जा बाजार में और उथल-पुथल देखने को मिल सकती है.
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