Tata Sons की अक्टूबर में हो सकती है AGM, विवादों को जल्दी सुलझाने की तैयारी; रतन टाटा के भाई जिमी पर सभी की नजरें
Tata Sons IPO: दशकों तक, खासकर रतन टाटा के कार्यकाल के दौरान, टाटा संस और पूरे टाटा ग्रुप से जुड़े मुद्दों पर ट्रस्टीज के बीच आम सहमति थी. SDTT के पास टाटा संस की 27.98% और SRTT के पास 23.56% हिस्सेदारी है, जिससे दोनों ट्रस्टों के पास कुल मिलाकर 51.54% हिस्सेदारी हो जाती है.

Tata Sons IPO: टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स का हिस्सा रही कुछ चैरिटेबल संस्थाओं के बीच बढ़ती दरार की वजह से अलग-अलग ट्रस्टीज पर सबकी नजरें टिकी हैं. होल्डिंग कंपनी की सालाना आम बैठक (AGM) से पहले गवर्नेंस के अहम मुद्दों पर उनका रुख और भी महत्वपूर्ण हो गया है. कई ट्रस्टीज के लिए यह स्थिति नई और अनजान है, क्योंकि दशकों से चली आ रही आम सहमति की जगह अब गवर्नेंस, प्रभाव और ट्रस्टीज की भविष्य की भूमिका जैसे मुद्दों पर तीखी बहस ने ले ली है.
ट्रस्टीज के बीच तालमेल
दशकों तक, खासकर रतन टाटा के कार्यकाल के दौरान, टाटा संस और पूरे टाटा ग्रुप से जुड़े मुद्दों पर ट्रस्टीज के बीच आम सहमति थी. हालांकि, टाटा संस की लिस्टिंग पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के निर्देश ने एक नया रेगुलेटरी पहलू जोड़ दिया है. टाटा ट्रस्ट्स ने लिस्टिंग का विरोध किया है और टाटा संस से दूसरे विकल्पों पर विचार करने को कहा है.
17 सितंबर को हुई बोर्ड मीटिंग में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस रुख को फिर से दोहराया. उस मीटिंग में नोएल टाटा एक तरफ और बाकी बोर्ड दूसरी तरफ था, जिससे उनके बीच खुली फूट दिखाई दी. बाकी बोर्ड के सदस्यों ने लिस्टिंग और एन चंद्रशेखरन को टाटा संस का चेयरमैन दोबारा नियुक्त करने का समर्थन किया, जबकि नोएल टाटा दोनों के ही खिलाफ थे.
नोएल टाटा की भूमिका
नोएल टाटा सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) और सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) दोनों के बोर्ड में शामिल हैं. वे फरवरी 2019 में SRTT और फरवरी 2022 में SDTT से जुड़े थे. सौतेले भाई रतन टाटा के निधन के बाद अक्टूबर 2024 में वे टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन बने. नोएल टाटा टाटा संस के नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं, जिससे कंपनी में उनकी सीधी भूमिका है. टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की 66% हिस्सेदारी है.
दो ट्रस्टीज के विचार नहीं आए सामने
लिस्टिंग के मुद्दे पर जिमी नवल टाटा और जहांगीर एचसी जहांगीर, जो दोनों SRTT के ट्रस्टी हैं उनके विचार अभी तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं. उनके रुख पर सबकी नजरें रहने की उम्मीद है, क्योंकि ट्रस्ट्स एक ऐसी स्थिति से निपट रहे हैं, जिसमें RBI का रेगुलेटरी रुख टाटा संस के सामने मौजूद विकल्पों को तय कर सकता है.
दिवंगत रतन टाटा के छोटे भाई और SRTT के तीन स्थायी ट्रस्टियों में से एक, जिमी टाटा, लाइमलाइट से दूर रहने वाले व्यक्ति हैं. उनके पास टाटा संस के 3,262 शेयर हैं, जो कंपनी का लगभग 0.81 फीसदी हिस्सा है. वे इन ट्रस्टों में सबसे लंबे समय से काम कर रहे ट्रस्टी हैं.
सूत्रों का कहना है कि भले ही वे कई वर्षों से टाटा ट्रस्ट की बैठकों में शामिल नहीं हुए हैं, लेकिन उन्हें हर मामले की जानकारी रहती है. वे रतन टाटा के बहुत करीबी थे.
लिस्टिंग बना बड़ा मुद्दा
पुणे के रहने वाले और जहांगीर हॉस्पिटल इकोसिस्टम से जुड़े समाजसेवी जहांगीर, फरवरी 2019 में नोएल टाटा के साथ SRTT में शामिल हुए थे. मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि ट्रस्टियों के लिए यह बिल्कुल नया और अनजान क्षेत्र है. रतन टाटा के कार्यकाल में हमेशा आम सहमति रहती थी, लेकिन अब लिस्टिंग एक बड़ा और अहम मुद्दा बन गया है.
रिजर्व बैंक का फैसला
RBI के टाटा संस को ‘अपर लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी’ (NBFC) बनाए रखने के फैसले का मतलब है कि कंपनी को उस कैटेगरी में आने वाली संस्थाओं के लिए लागू रेगुलेटरी नियमों का पालन करना होगा. इससे यह सवाल कंपनी और ट्रस्ट, दोनों के लिए अहम हो गया है कि टाटा संस इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है. इन ट्रस्टों के पास मिलकर कंपनी की कंट्रोलिंग हिस्सेदारी है.
किसके पास कितनी हिस्सेदारी?
SDTT के पास टाटा संस की 27.98% और SRTT के पास 23.56% हिस्सेदारी है, जिससे दोनों ट्रस्टों के पास कुल मिलाकर 51.54% हिस्सेदारी हो जाती है. टाटा के अन्य चैरिटेबल ट्रस्टों को मिलाकर चैरिटेबल ट्रस्टों की कुल हिस्सेदारी लगभग 66% हो जाती है.
शेयर ट्रस्टों के होते हैं, न कि व्यक्तिगत ट्रस्टियों के. ट्रस्टी अपने अधिकारों का इस्तेमाल संबंधित ट्रस्ट बोर्ड के जरिए करते हैं. हालांकि, एक ट्रस्टी ने कहा कि ट्रस्टियों के लिए चैरिटेबल संस्थाओं को चलाने से जुड़ी व्यावहारिक जिम्मेदारियां लिस्टिंग के साथ जरूरी नहीं कि बदलें.
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रस्टी के 99% काम खास खर्च वाले प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देना होता है और लिस्टिंग से इसमें कोई बदलाव नहीं आएगा. जो चीज बदलेगी, वह है उन्हें अपनी ताकत के बारे में होने वाला एहसास.
बोर्ड का गठन
TVS मोटर के चेयरमैन एमेरिटस और टाटा संस के पूर्व डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन एक और ट्रस्टी हैं जो दोनों मुख्य ट्रस्टों में शामिल हैं. वे 2016 में टाटा ट्रस्ट्स से जुड़े थे और उन्हें 12 नवंबर, 2025 से SDTT में तीन साल का नया कार्यकाल दिया गया, साथ ही उन्हें इसका वाइस-चेयरमैन भी बनाया गया. वे टाटा ट्रस्ट्स के नॉमिनी भी हैं.
टाटा संस बोर्ड
श्रीनिवासन की पोजीशन खास है, क्योंकि शेयरहोल्डर रिलेशनशिप के दोनों तरफ उनकी भूमिकाएं हैं- टाटा संस के मालिकाना हक वाले ट्रस्ट के ट्रस्टी के तौर पर और टाटा संस बोर्ड में नॉमिनी के तौर पर. सीनियर एडवोकेट और महाराष्ट्र के पूर्व एडवोकेट जनरल डेरियस खंबाटा भी दोनों बोर्ड में कॉमन हैं. उन्होंने 2016 में ट्रस्टी के पद से इस्तीफा दे दिया और नवंबर 2023 में दोनों ट्रस्ट में वापस आ गए. उनका लीगल बैकग्राउंड उन्हें एक रोल देता है.