अमेरिका पहुंचे जिनपिंग के लिए ट्रंप ने तोड़ा प्रोटोकॉल, ट्रेड, टेक्नोलॉजी, ताइवान और ईरान पर होगी दोनों के बीच बातचीत
ट्रंप और फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप, शी और उनकी पत्नी पेंग लियुआन के स्वागत समारोह के लिए मैरीलैंड मिलिट्री बेस पर मौजूद थे. जॉइंट बेस एंड्रयूज पर ट्रंप का स्वागत आम राष्ट्रपति प्रोटोकॉल से अलग था. दोनों नेताओं के बीच गुरुवार को बातचीत होनी है, लेकिन किसी बड़ी सफलता की उम्मीद कम है.
Highlights
- ईरान एक और मुद्दा है जो दोनों नेताओं की परीक्षा ले सकता है.
- जॉइंट बेस एंड्रयूज पर ट्रंप का स्वागत आम राष्ट्रपति प्रोटोकॉल से अलग था.
- बातचीत में ताइवान का मुद्दा सबसे मुश्किल मुद्दों में से एक हो सकता है.
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग बुधवार को तीन दिन की राजकीय यात्रा पर वॉशिंगटन पहुंचे. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए जॉइंट बेस एंड्रयूज पर खुद उनका स्वागत किया. ट्रंप और फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप, शी और उनकी पत्नी पेंग लियुआन के स्वागत समारोह के लिए मैरीलैंड मिलिट्री बेस पर मौजूद थे. विमान के पास किया गया यह खास स्वागत दिखाता है कि वॉशिंगटन ने एक दशक से भी अधिक समय में शी की अमेरिकी राजधानी की पहली राजकीय यात्रा को कितना महत्व दिया है.
आम राष्ट्रपति प्रोटोकॉल से अलग स्वागत
जॉइंट बेस एंड्रयूज पर ट्रंप का स्वागत आम राष्ट्रपति प्रोटोकॉल से अलग था. राष्ट्रपति कार्यक्रमों के C-SPAN रिकॉर्ड के अनुसार, पिछली बार किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने मैरीलैंड मिलिट्री बेस पर किसी विदेशी नेता का व्यक्तिगत रूप से स्वागत 2015 में किया था, जब बराक ओबामा ने पोप फ्रांसिस का स्वागत किया था.
दी गई तोपों की सलामी
लगभग तीन साल में अपनी पहली अमेरिकी यात्रा पर पहुंचे चीनी राष्ट्रपति के साथ ट्रंप ने हाथ मिलाया और संक्षिप्त बातचीत की. समारोह के दौरान एक मिलिट्री बैंड ने धुन बजाई और स्वागत के समय औपचारिक तोपों की सलामी दी गई. एक समय, जब B-1 बॉम्बर विमान ऊपर से गुजरा तो ट्रंप का चेहरा कुछ अजीब सा हो गया. बाद में दोनों नेता अलग-अलग बेस से रवाना हुए. उनकी औपचारिक बातचीत गुरुवार को होनी है.
सबसे बड़ी आर्थिक ताकतों के बीच बातचीत
इस यात्रा में भव्य समारोह के साथ-साथ ट्रेड, टेक्नोलॉजी, ताइवान, ईरान और दुनिया की दो सबसे बड़ी आर्थिक ताकतों के बीच अन्य विवादों पर मुश्किल बातचीत भी शामिल होगी. सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को वॉशिंगटन पहुंचने के बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और अमेरिका को प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार होना चाहिए.
शिन्हुआ के अनुसार, शी ने लिखित बयान में कहा कि अगर दोनों देश मिलकर काम करें तो अमेरिका की यह यात्रा सफल रहेगी.
किन मुद्दों पर चर्चा होगी
दोनों नेताओं के बीच गुरुवार को बातचीत होनी है, लेकिन किसी बड़ी सफलता की उम्मीद कम है. अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने फॉक्स न्यूज को बताया कि अमेरिका-चीन व्यापार समझौता, जिसकी समय सीमा 10 नवंबर को खत्म होने वाली थी, उसे दो महीने बढ़ाकर 10 जनवरी तक कर दिया गया है.
बेसेंट ने कहा कि ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन से पहले हुई बातचीत के दौरान उन्होंने और चीनी उप-प्रधानमंत्री हे लिफेंग ने इस विस्तार पर सहमति जताई थी. वॉशिंगटन में चीनी दूतावास ने इस पर तुरंत कोई टिप्पणी नहीं की.
टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में लीडर बनने की होड़
दोनों पक्ष खास सेक्टर के टैरिफ, ड्रग तस्करी के खिलाफ सहयोग और सेनाओं के बीच बेहतर संचार जैसे सीमित समझौतों पर भी आगे बढ़ सकते हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चर्चा का एक और संभावित विषय है. इसमें वॉशिंगटन और बीजिंग टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में लीडर बनने की होड़ में हैं, साथ ही तेजी से आगे बढ़ रहे AI सिस्टम से जुड़े जोखिमों को भी मैनेज करने की कोशिश कर रहे हैं.
ताइवान और एक्सपोर्ट कंट्रोल पर मतभेद बरकरार
बातचीत में ताइवान का मुद्दा सबसे मुश्किल मुद्दों में से एक हो सकता है. उम्मीद है कि शी इस खुद से चलने वाले द्वीप पर बीजिंग के दावे को दोहराएंगे, जबकि वॉशिंगटन चीन को संवेदनशील टेक्नोलॉजी के एक्सपोर्ट पर अपनी पाबंदियां बनाए रखेगा.
यह भी उम्मीद है कि शी, ट्रंप पर ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री कम करने का दबाव डालेंगे. ट्रंप प्रशासन ने दिसंबर में ताइवान के लिए 11 अरब डॉलर के हथियार पैकेज को मंजूरी दी थी, जो द्वीप के लिए अब तक की सबसे बड़ी बिक्री थी, जबकि लगभग 14 अरब डॉलर का एक और पैकेज रुका हुआ है.
ट्रंप पहले भी ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री को बातचीत का एक जरिया बता चुके हैं.
ईरान से तनाव और बढ़ा
ईरान एक और मुद्दा है जो दोनों नेताओं की परीक्षा ले सकता है. बीजिंग के तेहरान के साथ करीबी संबंध हैं, और वॉशिंगटन का मानना है कि चीन संघर्ष में गतिरोध को तोड़ने में मदद करने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर सकता है. हालांकि, ट्रंप ने कहा है कि उन्हें चीन की मदद की जरूरत नहीं है.
दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक चीन ने भी ऐसे कदम उठाए हैं जिनसे युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल के बाज़ार को स्थिर करने में मदद मिली है, जैसे कि मांग कम करना और रणनीतिक भंडार जारी करना. साथ ही, वॉशिंगटन ने ईरान के साथ व्यापार जारी रखने वाले देशों के खिलाफ पहले दी गई धमकियों के बावजूद प्रमुख चीनी बैंकों पर सेकेंडरी प्रतिबंध नहीं लगाए हैं.
भव्य समारोह वाली राजकीय यात्रा
शी की यात्रा में गुरुवार को व्हाइट हाउस में एक औपचारिक राजकीय भोज शामिल है, जिसमें Apple के CEO टिम कुक, Nvidia के CEO जेन्सेन हुआंग और OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन जैसे टेक्नोलॉजी एग्जीक्यूटिव्स के शामिल होने की उम्मीद है.
कार्यक्रम में व्हाइट हाउस में एक सैन्य समारोह भी शामिल है, जिसमें जेट फ्लाईओवर और नेशनल आर्काइव्स का दौरा होगा, जहां अमेरिकी संविधान और स्वतंत्रता की घोषणा के मूल दस्तावेज रखे गए हैं. इस भव्य कार्यक्रम का मकसद मई में चीन की यात्रा के दौरान ट्रंप को मिले औपचारिक स्वागत का जवाब देना है.
आसानी से समझौता होने की उम्मीद नहीं
सावधानीपूर्वक तैयार की गई कूटनीति के बावजूद, दोनों नेता अपने देशों की स्थिति के बारे में बिल्कुल अलग-अलग सोच के साथ बैठक में शामिल हो रहे हैं.
व्हाइट हाउस के पूर्व अधिकारी एडगार्ड कागन ने कहा कि ट्रंप का मानना है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था समय के साथ मजबूत होगी, जबकि शी का मानना है कि चीन आगे बढ़ रहा है और सत्ता का संतुलन बीजिंग के पक्ष में झुक रहा है. यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब नवंबर में होने वाले कांग्रेस के चुनावों से पहले ट्रंप को ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और ईरान के साथ युद्ध को लेकर जनता की नाराजगी के कारण घरेलू दबाव का सामना करना पड़ रहा है.
वहीं दूसरी ओर, शी के नेतृत्व में चीन का विदेशी व्यापार मजबूत रहा है. इस दौरान उन्हें परिवारों के कम खर्च और प्रॉपर्टी मार्केट में लंबे समय से जारी मंदी का सामना करना पड़ रहा है. ये नेता इस साल के आखिर में फिर से मिल सकते हैं. हो सकता है कि उनकी मुलाकात नवंबर में चीन में होने वाले एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन समिट या दिसंबर में अमेरिका में होने वाली G20 बैठक में हो.
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