टाटा संस में उत्तराधिकारी की तलाश रुकी, रेगुलेटरी अड़चन से गहरी हुई लीडरशिप की अनिश्चितता
12 अगस्त को चंद्रशेखरन की चौंकाने वाली इस्तीफे की घोषणा से लीडरशिप को लेकर जो अनिश्चितता पैदा हुई थी, वह अब और गहरी हो गई है. लेकिन उनके उत्तराधिकारी की तलाश एक अहम शेयरहोल्डर से जुड़ी रेगुलेटरी अड़चन की वजह से रुकी हुई है.

नटराजन चंद्रशेखरन के इस्तीफे के ऐलान के दो हफ्ते से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी टाटा संस के नए चेयरनमैन की तलाश शुरू नहीं हो सकी है. पिछले महीने टाटा संस के चेयरमैन चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफे का ऐलान किया था. हालांकि, वे अपने कार्यकाल के पूरा होने तक इस पद पर बने रहेंगे, जो फरवरी 2027 में पूरा होगा. चंद्रशेखरन ने कहा है कि वो चेयरमैन के रूप में अगले कार्यकाल की मांग नहीं करेंगे. लेकिन उनके उत्तराधिकारी की तलाश एक अहम शेयरहोल्डर से जुड़ी रेगुलेटरी अड़चन की वजह से रुकी हुई है.
क्यों रुका है प्रोसेस?
ईटी ने इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से बताया कि सर्च प्रोसेस में देरी हो रही है, क्योंकि ‘सर रतन टाटा ट्रस्ट’ (SRTT), जो टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी में ज्यादातर हिस्सेदारी रखने वाली 13 चैरिटी में से एक है, पर चल रही जांच से जुड़ी पाबंदियों के कारण इंटरनल मीटिंग करने पर रोक लगी हुई है. इन लोगों ने बताया कि इस वजह से SRTT पांच सदस्यों वाले जॉइंट सर्च पैनल के लिए अपना प्रतिनिधि नॉमिनेट नहीं कर पा रहा है.
टाटा ट्रस्ट्स के पास हिस्सेदारी
रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए, टाटा ट्रस्ट्स (जिनके पास टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड की कुल 66% हिस्सेदारी है) ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से अनुरोध किया है कि वे SRTT को सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट द्वारा घोषित पैनल में अपना प्रतिनिधि नियुक्त करने की अनुमति दें.
लीडरशिप को लेकर अनिश्चितता
12 अगस्त को चंद्रशेखरन की चौंकाने वाली इस्तीफे की घोषणा से लीडरशिप को लेकर जो अनिश्चितता पैदा हुई थी, वह अब और गहरी हो गई है. यह स्थिति दिखाती है कि भारत के सबसे पुराने कॉरपोरेट ग्रुप के लिए उत्तराधिकार की प्रक्रिया को संभालना कितना मुश्किल साबित हो रहा है, खासकर तब जब मौजूदा चेयरमैन और ट्रस्ट के प्रमुख नोएल टाटा के बीच सत्ता का संघर्ष चल रहा है.
इस प्रक्रिया के लिए जरूरी उठा-पटक से टाटा ग्रुप के जटिल मालिकाना ढांचे पर भी ध्यान गया है, जिससे टाटा संस में गवर्नेंस और पारदर्शिता में कमी को लेकर चिंताएं पैदा हुई हैं. अगर और देरी होती है, तो नोएल पर निवेशकों, रेगुलेटर्स और पॉलिसी बनाने वालों को यह भरोसा दिलाने का दबाव बढ़ेगा कि यह ग्रुप अब भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी लक्ष्यों को पूरा कर सकता है.
स्थगित करनी पड़ी थी एजीएम
जानकारों ने बताया कि कानूनी तौर पर चंद्रशेखरन फरवरी तक अपने पद पर बने रह सकते हैं, जबकि रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज ने टाटा संस को अपनी सालाना शेयरहोल्डर्स मीटिंग आयोजित करने के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया है.
SRTT द्वारा मीटिंग्स पर रोक लगाने की वजह से टाटा संस को पिछले महीने कोरम (जरूरी संख्या) की कमी के कारण अपनी सालाना आम बैठक (AGM) स्थगित करनी पड़ी थी. जानकारों ने बताया कि चैरिटी कमिश्नर के फैसले का इंतजार है, जबकि टाटा होल्डिंग कंपनी की अगली बोर्ड मीटिंग 17 सितंबर को तय है.