टाटा स्टील ने सिर्फ 100 रुपये में बेच दिया ये लाइसेंस, 4,08,00,000 इक्विटी शेयरों के ट्रांसफर को दी मंजूरी
जुलाई में टाटा स्टील के बोर्ड द्वारा बनाई गई डायरेक्टर्स की कमिटी ने 14 अगस्त को हुई बैठक में JFSPL के सभी 4,08,00,000 इक्विटी शेयरों के ट्रांसफर को मंजूरी दे दी. पनी अब अपने लंबे समय से चल रहे ग्रासरूट प्रोग्राम, खासकर टाटा फुटबॉल अकादमी पर ध्यान देना चाहती है.

टाटा स्टील ने 100 रुपये की डील में जमशेदपुर FC का ISL लाइसेंस चर्चिल ब्रदर्स को ट्रांसफर कर दिया है. टाटा स्टील ने जमशेदपुर फुटबॉल एंड स्पोर्टिंग प्राइवेट लिमिटेड (JFSPL) में अपनी पूरी हिस्सेदारी चर्चिल ब्रदर्स स्पोर्ट्स क्लब को सिर्फ 100 रुपये में बेच दी है. इसके साथ ही कंपनी इंडियन सुपर लीग से बाहर हो गई है और एक प्रोफेशनल फुटबॉल क्लब की मालिक के तौर पर अपनी भूमिका खत्म कर ली है.
शेयरों का ट्रांसफर
जुलाई में टाटा स्टील के बोर्ड द्वारा बनाई गई डायरेक्टर्स की कमिटी ने 14 अगस्त को हुई बैठक में JFSPL के सभी 4,08,00,000 इक्विटी शेयरों के ट्रांसफर को मंजूरी दे दी. उसी दिन शेयर खरीद समझौता (SPA) पर हस्ताक्षर किए गए. यह डील 31 अगस्त तक पूरी होने की उम्मीद है, बशर्ते ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन और अन्य जरूरी शर्तों से मंजूरी मिल जाए.
बिक्री की यह कीमत FIFA वर्ल्ड कप में इस्तेमाल होने वाली आधिकारिक फुटबॉल की कीमत से लगभग 150 गुना कम है, जिसकी अधिकतम कीमत करीब 15,000 रुपये होती है.
जमशेदपुर FC ने ISL क्यों छोड़ा?
टाटा स्टील के फैसले से जमशेदपुर FC के जरिए प्रोफेशनल क्लब फुटबॉल में उनकी एक दशक से ज्यादा की भागीदारी खत्म हो गई. कंपनी अब अपने लंबे समय से चल रहे ग्रासरूट प्रोग्राम, खासकर टाटा फुटबॉल अकादमी पर ध्यान देना चाहती है, साथ ही स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट करना जारी रखेगी.
अनिश्चितता के बीच फैसला
AIFF ने टाटा स्टील से अपने फैसले पर फिर से विचार करने को कहा था, लेकिन कंपनी ने आखिरकार बाहर निकलने का फैसला किया. क्लब के मौजूदा खिलाड़ी और कोचिंग से जुड़े इंतजाम अब प्रस्तावित डील के तहत दूसरी जगह ट्रांसफर किए जाएंगे, जिससे फुटबॉल से जुड़े काम अलग ओनरशिप के तहत जारी रह सकेंगे. यह ट्रांसफर ISL को लेकर फैली अनिश्चितता के बीच हो रहा है, जिसमें इसके कमर्शियल स्ट्रक्चर और लंबे समय के भविष्य पर भी सवाल उठ रहे हैं.
चर्चिल ब्रदर्स की ISL में वापसी का रास्ता
चर्चिल ब्रदर्स की ISL में संभावित वापसी गोवा के इस ऐतिहासिक क्लब के लिए मुश्किल भरे दौर के बाद होगी. शुरुआत में चर्चिल 2024-25 I-लीग स्टैंडिंग में टॉप पर रहे और उन्हें चैंपियनशिप दी गई. हालांकि, इंटर काशी ने उन पॉइंट्स और एलिजिबिलिटी फ़ैसलों को चुनौती दी जिनके आधार पर कॉम्पिटिशन हुआ था, और यह विवाद आख़िरकार कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन फ़ॉर स्पोर्ट (CAS) तक पहुंच गया.
CAS ने इंटर काशी के पक्ष में फैसला सुनाया, उनके पॉइंट्स बहाल किए और उन्हें I-लीग चैंपियन घोषित किया, जबकि चर्चिल ने ऑटोमैटिक प्रमोशन का मौका गंवा दिया.
इसके बाद चर्चिल ने ISL में एंट्री के लिए कोशिश की, लेकिन उन्हें मौजूदा क्लबों और AIFF के विरोध का सामना करना पड़ा. उनकी एंट्री की अपील ठुकरा दी गई और बाद में 2025-26 I-League से हटने का फैसला करने के बाद क्लब को I-League 2 में डिमोट कर दिया गया.