Tata Steel vs JSW Steel: स्टील की तेजी में किस शेयर में कमाई का दम ज्यादा; प्रॉफिट और वैल्यूएशन में कौन आगे
टाटा स्टील और JSW स्टील दोनों भारत में स्टील की बढ़ती मांग से फायदा उठा सकते हैं, लेकिन दोनों की स्थिति अलग है. जून तिमाही में JSW स्टील ने कम कर्ज, 94 फीसदी कैपेसिटी यूज और बेहतर मुनाफे के दम पर मजबूत प्रदर्शन किया. टाटा स्टील का भारत कारोबार अच्छा रहा, लेकिन यूरोप की इकाइयों का दबाव बना हुआ है.
Highlights
- JSW Steel ने कमाई में मारी बाजी, जून तिमाही में 4696 करोड़ रुपये का मुनाफा, जबकि Tata Steel का मुनाफा 2385 करोड़ रुपये रहा
- कर्ज के मामले में JSW Steel आगे, JSW का नेट डेट 46157 करोड़ रुपये रहा, जबकि Tata Steel का कर्ज 84173 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
- स्टील की तेजी में JSW मजबूत दावेदार, 94 फीसदी क्षमता उपयोग, वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स की 61 फीसदी हिस्सेदारी और कम P E इसे फिलहाल बेहतर स्थिति में रखते हैं.
देश में स्टील की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है, जिससे आने वाले समय में स्टील सेक्टर में तेजी रहने की उम्मीद है. इस तेजी का फायदा इस सेक्टर की दिग्गज कंपनियां जैसे की Tata Steel और JSW Steel को भी मिलेगा, जिस वजह से इसने शेयर निवेशकों को रडार पर है. जून 2026 तिमाही के नतीजों में दोनों कंपनियों ने मजबूत प्रदर्शन किया है. हालांकि कमाई, मार्जिन, कर्ज और प्रोडक्शन कैपेसिटी के मामले में दोनों की स्थिति अलग है. JSW Steel ने कम रेवेन्यू के बावजूद Tata Steel के करीब EBITDA और ज्यादा प्रॉफिट दर्ज किया है. वहीं Tata Steel के पास देश में मजबूत कारोबार और बड़े विस्तार की योजना है.
कमाई के मामले में कौन आगे
जून 2026 तिमाही में Tata Steel का कंसोलिडेटेड रेवेन्य 60794 करोड़ रुपये रहा. कंपनी का EBITDA 9370 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की तुलना में 25 फीसदी ज्यादा है. इस दौरान कंपनी का नेट प्रॉफिट 2385 करोड़ रुपये रहा.
JSW Steel का रेवेन्यू 47364 करोड़ रुपये रहा. इसके बावजूद कंपनी ने 9383 करोड़ रुपये का EBITDA दर्ज किया, जो Tata Steel से थोड़ा ज्यादा है. कंपनी का नेट प्रॉफिट 4696 करोड़ रुपये रहा, जो Tata Steel के मुकाबले करीब दोगुना है. हालांकि JSW Steel के आंकड़ों की पिछली अवधि से सीधी तुलना करते समय Bhushan Power and Steel के जेएसडब्ल्यू जेएफई ज्वाइंट वेंचर में जाने को ध्यान में रखना जरूरी है.
मार्जिन और प्रोडक्शन कैपेसिटी में कौन मजबूत
Tata Steel के भारत कारोबार का EBITDA मार्जिन 27 फीसदी रहा. कंपनी का EBITDA प्रति टन तिमाही आधार पर 3255 रुपये बढ़कर 19162 रुपये हो गया. इससे भारत में कंपनी के घरेलू कारोबार की मजबूत स्थिति का पता चलता है.
हालांकि Tata Steel के यूरोप कारोबार का प्रदर्शन कुल नतीजों पर दबाव डाल रहा है. नीदरलैंड इकाई का EBITDA केवल 4 मिलियन यूरो रहा, जबकि ब्रिटेन कारोबार अभी भी घाटे में है.
दूसरी ओर JSW Steel की भारत में कैपेसिटी उपयोग दर 94 फीसदी रही, जो एक साल पहले 88 फीसदी थी. कंपनी की कुल बिक्री में वैल्यू एडेड और स्पेशल प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 61 फीसदी रही. इससे कंपनी को बेहतर मार्जिन बनाए रखने में मदद मिल सकती है.
कर्ज के मामले में JSW Steel को बढ़त
दोनों कंपनियों के बीच सबसे बड़ा अंतर कर्ज के मामले में दिखाई देता है. जून तिमाही के अंत में Tata Steel का नेट डेट बढ़कर 84173 करोड़ रुपये हो गया. कंपनी का नेट डेट टू EBITDA रेशियो 2.3 गुना रहा.
JSW Steel का नेट डेट जून 2026 के अंत में घटकर 46157 करोड़ रुपये रह गया, जो मार्च में 53870 करोड़ रुपये था. कंपनी का नेट डेट टू EBITDA अनुपात 1.46 गुना रहा. वहीं नेट डेट टू इक्विटी रेशियो 0.42 गुना है.
JSW Steel के कर्ज में कमी से कंपनी को आगे विस्तार के लिए ज्यादा वित्तीय गुंजाइश मिलती है. तिमाही के दौरान Fitch और CARE Ratings ने भी कंपनी की क्रेडिट रेटिंग में सुधार किया है.
भविष्य की ग्रोथ के लिए दोनों की बड़ी तैयारी
Tata Steel ने Neelachal Ispat Nigam में सालाना 48 लाख टन की अतिरिक्त स्टील कैपेसिटी बढ़ाने को मंजूरी दी है. इस विस्तार पर करीब 33873 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. कंपनी भारत में अपने कुल कारोबार को 4 करोड़ टन या उससे ज्यादा की कैपेसिटी तक ले जाने का लक्ष्य रखती है.
JSW Steel ने भी वित्त वर्ष 2032 तक ज्वाइंट वेंचर समेत अपनी कुल कैपेसिटी को करीब 6.2 करोड़ टन सालाना तक बढ़ाने की योजना बनाई है. कंपनी का लक्ष्य करीब 13 फीसदी की एनुअल कंपाउंड ग्रोथ हासिल करना है.
इसके अलावा Vijayanagar में BF 3 फर्नेस की कैपेसिटी बढ़ाकर 45 लाख टन की गई है. कंपनी Kadapa में नया इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस भी लगा रही है. Odisha में POSCO के साथ 60 लाख टन कैपेसिटी वाला नया प्लांट भी भविष्य की ग्रोथ का अहम हिस्सा है.
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Tata Steel या JSW Steel किसमें ज्यादा दम
स्टील सेक्टर में तेजी आने पर दोनों कंपनियों को फायदा मिल सकता है. Tata Steel की सबसे बड़ी ताकत भारत में उसका मजबूत कारोबार, बड़ा पैमाना और विस्तार की योजनाएं हैं. हालांकि यूरोप के कारोबार का प्रदर्शन कंपनी के लिए एक चुनौती बना हुआ है.
JSW Steel की स्थिति कर्ज, कैपेसिटी और वैल्यू एडेड प्रोडक्ट के मामले में फिलहाल बेहतर दिखाई देती है. कंपनी का कम कर्ज और मजबूत प्रॉफिट उसे आगे विस्तार के लिए ज्यादा वित्तीय लचीलापन देता है.
इस आधार पर भारत के स्टील अपसाइकिल का फायदा उठाने के लिहाज से JSW Steel फिलहाल ज्यादा मजबूत स्थिति में नजर आता है. हालांकि Tata Steel के यूरोपीय कारोबार में सुधार और दोनों कंपनियों की विस्तार योजनाओं की रफ्तार आगे की तस्वीर बदल सकती है.
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