युद्ध ग्रस्त माहौल में पीएम मोदी के पास शांति का मंत्र, WITT के मंच से बोले TV9 के CEO & MD बरुण दास

टीवी 9 के सीईओ एवं एमडी ने कहा कि हमने इतिहास में दो विश्व युद्ध झेले हैं. इसके अलावा 1973 का अरब तेल प्रतिबंध, 1979 की ईरानी क्रांति और 1990 का खाड़ी युद्ध भी देखा है- उन्होंने आज के वैश्विक संकट को इससे भी बड़ा बताया.

TV9 के CEO & MD बरुण दास. Image Credit: Tv9 Network

टीवी9 के सीईओ एवं एमडी बरुण दास ने व्हाट इंडिया थिंक्स टुडे के मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की उपस्थिति और अब तक 8,932 दिनों के कार्यकाल के साथ देश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले राष्ट्राध्यक्ष के तौर पर उनके मार्गदर्शन के लिए हम आभारी हैं. बरुण दास ने इसी के साथ आज के युद्ध ग्रस्त माहौल में पीएम मोदी के विजन की अहमियत को भी रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते अशांति का माहौल है. ग्लोबल इकोनोमी को संचालित करने वाले तीन एफ यानी फ्यूल, फूड और फाइनेंस युद्ध की चपेट में हैं. ऊर्जा संकट खतरे में है. मानवता का संकट खड़ा हो सकता है.

टीवी9 के सीईओ एवं एमडी ने कहा कि हमने इतिहास में दो विश्व युद्ध झेले हैं. इसके अलावा 1973 का अरब तेल प्रतिबंध, 1979 की ईरानी क्रांति और 1990 का खाड़ी युद्ध भी देखा है- उन्होंने आज के वैश्विक संकट को इससे भी बड़ा बताया. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया का युद्ध लंबा खिंचने की आशंका है. ऐसी अनिश्चितता भरे माहौल में आखिर भारत क्या सोचता है. दुनिया भारत की पहल की ओर देख रही है.

संवाद और कूटनीति ही शांति का पथ

बरुण दास ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर से दुनिया को याद दिलाया है कि संवाद और कूटनीति ही सबसे सुगम रास्ता हो सकता है. उन्होंने युद्ध रोकने में प्रधानमंत्री मोदी की कोशिशों को भी रेखांकित किया. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री दुनिया के प्रमुख देशों के राष्ट्राध्यक्षों से बातचीत के जरिए इस गंभीर संकट का हल निकालने का प्रयास कर रहे हैं.

बरुण दास ने इसी के साथ टीवी9 नेटवर्क के वार्षिक प्रमुख शिखर सम्मेलन व्हाट इंडिया थिंक्स टुडे में माईहोम ग्रुप के चेयरमैन रामेश्वर राव गारू, इंडस्ट्री के दिग्गज, विदेश से आए मेहमान और वहां उपस्थित सभी विशिष्ठ जनों का स्वागत करते हुए देश और दुनिया की बड़ी चुनौतियों की तरफ इशारा किया. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया के हालात से पहले से टैरिफ वॉर ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्था को झकझोर कर रख दिया. 83 अरब लोग इससे किसी ना किसी रूप में जूझ रहे हैं.

पीएम मोदी के नेतृत्व में देश बढ़ रहा

हालांकि बरुण दास ने यह भी कहा कि वैश्विक उथल-पुथल के बीच भी पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत न केवल आगे बढ़ रहा है, बल्कि दुनिया को स्थिर करने में भी मदद कर रहा है. भारत की सभ्यता और विरासत सतत संवाद पर आधारित है, ना कि आधिपत्य या जबरन अधिकार जताने में. उन्होंने इस 5000 साल से भी पुरानी संस्कृति बताया और इस संदर्भ में प्राचीन साहित्य, महाभारत और भगवद गीता के महत्व को रेखांकित किया.

टीवी9 के सीईओ एवं एमडी बरुण दास ने कहा कि मैं हमेशा खुद को प्रबंधन और नेतृत्व का छात्र मानता हूं. मैं हमेशा से मोदी जी की शासन शैली को गहराई से देखता रहा हूं और उससे सीखता रहा हूं. मैंने उनकी शख्सियत से तीन खास मंत्र सीखा है- रिटर्न टू गवर्नेंस यानी जनोपयोगी शासन, मल्टीप्लायर इफेक्ट यानी अर्थव्यवस्था में सुधार के नए निवेश और सीडीआर यानी पुरानी कार्यशैली में नए सुधार. आज यह देश के डीएनए में शामिल है. उन्होंने यह भी बताया कि मैं सदा यह मानता हूं कि मोदी जी इंडिया फर्स्ट दृष्टिकोण केवल भारत तक सीमित नहीं रहा. आज दुनिया कई मायनों में कुरुक्षेत्र में दिखती है. ऐसे में मुझे दुनिया के समक्ष एक नया मोदी मंत्र दिखाई दे रहा है. और वह नया मोदी मंत्र है- समबुद्धि. कुरुक्षेत्र की महाभारत में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को इसी समबुद्धि की मुख्य सलाह दी थी.

समान व्यवहार और निष्पक्षता से शांति

बरुण दास ने आगे कहा कि शांति का आशय सभी के साथ समान व्यवहार और निष्पक्षता से है. उन्होंने बताया कि भारत की विदेश नीति में 5 स (5-S) का स्पष्ट असर दिखता है, मसलन सम्मान, संवाद, सहयोग, शांति और समृद्धि. इसी मे समबुद्धि का क्रियान्वयन है. आज वैश्वीकरण के बदले राष्ट्रवाद पर अधिक जोर है. भारत अपने प्रमुख साझेदार देशों और गुटों के साथ व्यापार समझौते में परिपक्व दृष्टिकोण अपनाने के लिए दुनिया में जाना जाता है. हालात बताते हैं कि मिसाइल ग्लोबल मार्केट को छिन्न-भिन्न कर सकती है, ऐसे समय में शांति महज आदर्श नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिरता की आवश्यकता है.

विकसित भारत को साकार करने के करीब

टीवी9 के सीईओ एवं एमडी ने आगे कहा कि हमें मोदी जी केवल बाहरी कुरुक्षेत्र से ही नहीं लड़ रहे हैं बल्कि भारत के भीतर भी उनके सामने अनेक कठिन चुनौतियां हैं. मेरे विचार से मुख्य रूप से ये चुनौतियां हैं: 1: गरीबी और समावेशिता, 2: आर्थिक और इंफ्रास्ट्रक्चरर विकास, 3: स्थिरता और हरित ऊर्जा, 4: नई तकनीक, विशेष रूप से एआई का लाभ उठाना. इन सभी मोर्चों पर पिछले करीब 12 सालों में मोदी जी के नेतृत्व में भारत का विकास उल्लेखनीय है. इसमें कोई संदेह नहीं कि हम 2047 तक विकसित भारत के अपने सपने को साकार करने की राह पर अग्रसर हैं. इसका प्रमाण हाल की अनेक उपलब्धियां हैं. 1.4 अरब लोगों के देश का संचालन अत्यंत चुनौतीपूर्ण है. मेरे जीवनकाल में ऐसा कोई अन्य नेता नहीं, जिसने किसी देश के लिए इतने बड़े और साहसिक लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें पूरा करने का साहस दिखाया हो, जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी ने किया है.

लोकतंत्र हमेशा राष्ट्रीय हित में निहित हो

बरुण दास ने इस दौरान यह भी कहा कि बेशक लोकतंत्र में मतभेद देखने को मिलते हैं, लोकतंत्र वाद-विवाद से ही फलता-फूलता है. लेकिन लोकतंत्र को हमेशा राष्ट्रीय हित में निहित रहना चाहिए. इन चुनौतियों के बावजूद भारत नए वर्ल्ड ऑर्डर का केंद्र बन गया है. इसीलिए इस वर्ष हमारे शिखर सम्मेलन का विषय है… “भारत और विश्व”. उन्होंने कहा कि अगर आज भारत जो सोचता है वह न केवल प्रासंगिक है… बल्कि ग्लोबल परिदृश्य को भी आकार देता है… तो यह मोदी की दूरदृष्टि और नेतृत्व के कारण है.

आज भारत की आवाज पहले से महत्वपूर्ण

टीवी9 के सीईओ एवं एमडी ने अंत में कहा कि जब दुनिया संतुलन की तलाश में है… और जब भारत की आवाज… पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है… तो उस आवाज को आकार देने वाले नेताओं से सुनने का समय आ गया है. इसी के साथ… मैं एक बार फिर माननीय प्रधानमंत्री जी को इस शिखर सम्मेलन में उपस्थित होने के लिए

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