गर्मी, सूखा और कमजोर मानसून, क्या 1950 के बाद सबसे मजबूत El Nino बढ़ाएगा भारत की मुश्किलें
El Nino को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह 1950 के बाद सबसे मजबूत El Nino बन सकता है. इसका असर भारत समेत कई देशों में मौसम, खेती और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. भारत में कमजोर मानसून, सूखे जैसे हालात और भीषण गर्मी का खतरा बढ़ सकता है.

El Nino: दुनियाभर के मौसम वैज्ञानिक एक बार फिर El Nino को लेकर चिंता जता रहे हैं. कई क्लाइमेट जानकारों के मुताबिक इस बार बनने वाला El Nino साल 1950 के बाद सबसे मजबूत घटनाओं में शामिल हो सकता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका असर केवल मौसम तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि खेती, पानी, बिजली और अर्थव्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है. भारत के लिए यह स्थिति ज्यादा चिंता वाली मानी जा रही है क्योंकि देश की खेती और पानी की जरूरत काफी हद तक मानसून पर निर्भर करती है. अगर El Nino मजबूत हुआ तो देश में भीषण गर्मी, कमजोर बारिश और सूखे जैसे हालात बन सकते हैं.
क्या होता है El Nino
El Nino एक नेचुरल क्लाइमेट प्रोसेस है जो प्रशांत महासागर के तापमान और हवाओं में बदलाव के कारण बनती है. सामान्य स्थिति में समुद्र के ऊपर चलने वाली हवाएं पूर्व से पश्चिम की ओर बहती हैं. लेकिन El Nino के दौरान ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं या दिशा बदल देती हैं. इससे प्रशांत महासागर के बीच और पूर्वी हिस्से में गर्म पानी जमा होने लगता है. यही बदलाव दुनिया के कई हिस्सों में मौसम का संतुलन बिगाड़ देता है.
1950 के बाद सबसे मजबूत El Nino
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस बार बनने वाला El Nino काफी खतरनाक हो सकता है. कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इसकी ताकत 1982-83, 1997-98 और 2015-16 जैसे सुपर El Nino से भी ज्यादा हो सकती है. साल 1997-98 का El Nino पूरी दुनिया में भारी तबाही का कारण बना था. इससे बाढ़, सूखा, चक्रवात और जंगलों में आग जैसी घटनाएं तेजी से बढ़ी थीं. अब वैज्ञानिकों को डर है कि जलवायु परिवर्तन के कारण इसका असर पहले से ज्यादा गंभीर हो सकता है.
भारत पर क्या असर पड़ सकता है
भारत को El Nino से सबसे ज्यादा खतरा कमजोर मानसून का रहता है. मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 2026 में मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है. अगर बारिश कम हुई तो खेती पर सीधा असर पड़ेगा. देश के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात बन सकते हैं. इसके अलावा रिजर्व में पानी की कमी और बिजली की मांग बढ़ने का खतरा भी रहेगा. ग्रामीण इनकम और खाने की कीमतों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है.
हीटवेव का बढ़ सकता है खतरा
El Nino के दौरान भारत में तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ सकता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार गर्मी का असर काफी गंभीर हो सकता है क्योंकि धरती पहले से ही ग्लोबल वार्मिंग के कारण ज्यादा गर्म हो चुकी है. कई राज्यों में लंबे समय तक हीटवेव चल सकती है. शहरों में पानी की कमी और बिजली संकट की समस्या भी बढ़ सकती है.
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पहले भी भारी तबाही ला चुका है El Nino
इतिहास में कई बार El Nino ने दुनिया को गंभीर संकट में डाला है. 1876 से 1878 के दौरान आए शक्तिशाली El Nino के समय भारत समेत कई देशों में भयानक अकाल पड़ा था. फसलें खराब हो गई थीं और लाखों लोगों की मौत भूख और बीमारी से हुई थी. हालांकि आज मौसम पूर्वानुमान और डिजास्टर मैनेजमेंट पहले से बेहतर है, लेकिन वैज्ञानिक मानते हैं कि एक मजबूत El Nino आज भी अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन पर भारी दबाव डाल सकता है.