महिलाओं को हर महीने पैसे देने वाली योजनाएं कितनी असरदार? EAC-PM की स्टडी में बड़ा खुलासा
देश में महिलाओं के लिए कैश ट्रांसफर योजनाओं का दायरा बढ़ रहा है. EAC-PM की स्टडी ने महाराष्ट्र और ओडिशा की योजनाओं के असर का अध्ययन किया है. इसमें महिलाओं के साथ परिवार के दूसरे सदस्यों की बचत और खर्च में भी बदलाव देखने को मिला. स्टडी बताती है कि Cash Transfer का असर सिर्फ लाभार्थी महिला तक सीमित नहीं रहता.

Women Cash Transfer Scheme: देश में महिलाओं के खाते में हर महीने सीधे पैसा पहुंचाने वाली योजनाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है. सवाल यह है कि इन योजनाओं से सिर्फ लाभ पाने वाली महिलाओं को फायदा होता है या इसका असर पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ता है? प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) की एक नई स्टडी ने इस बहस को एक नया एंगल दिया है. स्टडी के मुताबिक, महिलाओं को मिलने वाली सीधी नकद मदद का असर उनके परिवार के दूसरे सदस्यों की बचत और खर्च के व्यवहार पर भी पड़ सकता है.
15 से ज्यादा राज्यों में चल रही Cash Transfer योजनाएं
दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार ने 1 अगस्त को दिल्ली लक्ष्मी योजना यानी महिला समृद्धि योजना शुरू की. इसके तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये देने का प्रावधान है. इसके साथ ही दिल्ली भी उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की लिस्ट में शामिल हो गई है, जहां महिलाओं के लिए सीधे कैश ट्रांसफर की योजनाएं चल रही हैं.
फिलहाल देश में 15 से ज्यादा राज्यों में महिलाओं के लिए इस तरह की योजनाएं चल रही हैं. इन योजनाओं पर करीब 2.68 लाख करोड़ रुपये खर्च हो रहा है और लगभग 12 करोड़ लाभार्थियों तक इसका फायदा पहुंच रहा है. अलग-अलग राज्यों में महिलाओं को हर महीने 1000 से 2500 रुपये तक की राशि दी जा रही है.
महिलाओं के खाते में पैसा आया तो पुरुष रिश्तेदारों पर भी असर
EAC-PM की वर्किंग पेपर में महाराष्ट्र की Ladki Bahin Yojana और ओडिशा की Subhadra Yojana का अध्ययन किया गया. इसके लिए 1.6 लाख से ज्यादा State Bank of India खातों के मासिक लेनदेन के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया. स्टडी में महाराष्ट्र में एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिला. Ladki Bahin Yojana की लाभार्थी महिलाओं के पुरुष रिश्तेदारों के महीने के आखिरी में बैंक खाते का बैलेंस 23 फीसदी बढ़ गया, जबकि उनके खर्च में 49 फीसदी की गिरावट आई.
ऐसा क्यों हुआ?
रिपोर्ट के मुताबिक, इसका एक कारण परिवार के भीतर आर्थिक जिम्मेदारियों का बदलना हो सकता है. जब महिलाओं के पास अपनी नियमित और स्वतंत्र इनकम आती है, तो रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने का दबाव परिवार के दूसरे सदस्यों पर कम हो सकता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं की नियमित आय से परिवार के दूसरे सदस्यों को रोजमर्रा के खर्चों के लिए कम पैसा लगाना पड़ सकता है. इससे उनके खाते में अधिक पैसा बच सकता है और उनका खर्च कम हो सकता है.
Cash Transfer से सिर्फ खर्च नहीं, बचत भी बढ़ सकती है
रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि Cash Transfer का फायदा सिर्फ तत्काल खर्च पूरा करने तक सीमित नहीं है. उपलब्ध भारतीय और वैश्विक आंकड़ों के मुताबिक, इस तरह की मदद से परिवारों की खपत को स्थिर करने, बचत बढ़ाने, उत्पादक संपत्ति बनाने और संकट के समय आर्थिक सहारा देने में मदद मिल सकती है.
इसके अलावा मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, 100 से ज्यादा अध्ययनों के आधार पर बताया कि Unconditional Cash Transfer से खाद्य सुरक्षा, आय और बचत में सुधार देखा गया है. इसके साथ ही लोगों के खर्च और मानसिक कल्याण में भी सुधार हो सकता है. ऐसे लाभार्थियों के कर्ज चुकाने और रोजगार में बने रहने की संभावना भी अधिक पाई गई है.
लेकिन Cash Transfer ही हर समस्या का समाधान नहीं
हालांकि कई जानकार ये भी मानते हैं कि सरकार की Welfare Policy सिर्फ Cash Transfer तक सीमित नहीं होनी चाहिए. स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा जैसी जरूरी सेवाओं पर भी सरकारी निवेश जरूरी है.
EAC-PM की स्टडी में महाराष्ट्र और ओडिशा की योजनाओं को आगे Cash-plus model की दिशा में विकसित करने की बात कही गई है. यानी Cash Transfer के साथ Digital Literacy, क्षमता निर्माण और Self-Help Groups से जोड़ने जैसी सुविधाएं भी दी जा सकती हैं.
क्या ये योजनाएं सिर्फ ‘Freebies’ हैं?
महिलाओं को सीधे पैसा देने वाली योजनाओं को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज रही है. कई बार इन्हें ‘Freebies’ कहा जाता है, जबकि जानकारों का कहना है कि इनके आर्थिक प्रभाव को सिर्फ इस नजरिए से नहीं देखा जा सकता. Cash Transfer से महिलाओं के हाथ में सीधे पैसा आता है, जिससे उनके पास खर्च और बचत से जुड़े फैसले लेने की ज्यादा स्वतंत्रता हो सकती है. उपलब्ध अध्ययनों में यह भी नहीं पाया गया कि Cash मिलने वाले लोग शराब या सिगरेट जैसी चीजों पर ज्यादा पैसा खर्च करते हैं.
महाराष्ट्र की Ladki Bahin Yojana का राजनीतिक असर भी दिखा
महिलाओं के लिए Cash Transfer योजनाओं का राजनीतिक असर भी देखने को मिला है. महाराष्ट्र में Ladki Bahin Yojana 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा मुद्दा बनी थी. चुनाव के बाद Lokniti-CSDS के सर्वे में भी योजना के लाभार्थियों के बीच सत्तारूढ़ गठबंधन को ज्यादा समर्थन मिलने की बात सामने आई.
हालांकि कई जानकारों का कहना है कि इन योजनाओं को सिर्फ चुनावी फायदे के नजरिए से देखना सही नहीं होगा. असली सवाल यह है कि महिलाओं के हाथ में सीधे पैसा पहुंचने से परिवार की आर्थिक सुरक्षा, बचत और महिलाओं की निर्णय लेने की क्षमता पर कितना असर पड़ता है.
महाराष्ट्र और ओडिशा में बचत पर कितना असर?
EAC-PM की स्टडी में दोनों योजनाओं के लाभार्थियों के महीने के अंत में बैंक बैलेंस में उल्लेखनीय बढ़ोतरी मिली. महाराष्ट्र में खाते का बैलेंस करीब 84 फीसदी और ओडिशा में करीब 45 फीसदी बढ़ा. दोनों राज्यों में प्रति लाभार्थी लगभग 6884 रुपये और 6887 रुपये की अतिरिक्त राशि का असर देखा गया.
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