खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे केंद्रीय मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल, पीएम मोदी नहीं जाएंगे ईरान

प्रधानमंत्री मोदी यात्रा नहीं करेंगे क्योंकि उनका शेड्यूल बहुत व्यस्त है, जिसमें इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्राएं शामिल हैं. ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की फरवरी में इजराइल और अमेरिका के हमले में मौत हो गई थी. वे 86 साल के थे.

अयातुल्ला अली खामेनेई (फाइल फोटो) Image Credit: tv9 bharatvarsh

भारत सरकार ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन को भेजेगी. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिए गए निमंत्रण के बाद, भारत सरकार की ओर से दो बड़े अधिकारी 4 जुलाई से शुरू होने वाले अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होंगे.

पीएम मोदी नहीं करेंगे ईरान की यात्रा

खबरों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी यात्रा नहीं करेंगे क्योंकि उनका शेड्यूल बहुत व्यस्त है, जिसमें इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्राएं शामिल हैं. ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की फरवरी में इजराइल और अमेरिका के हमले में मौत हो गई थी. वे 86 साल के थे.

हाई-लेवल डेलीगेशन भेजने का मतलब

ईरान के अधिकारियों को उम्मीद है कि सरकारी अंतिम संस्कार में लाखों लोग शोक मनाने के लिए शामिल होंगे. भारत का एक हाई-लेवल डेलीगेशन भेजने का फैसला यह दिखाता है कि वह ईरान को लंबे समय से अपने ‘विस्तारित पड़ोस’ का हिस्सा मानता है और दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंध हैं.

36 साल तक रहे सुप्रीम लीडर

अयातुल्ला अली खामेनेई 28 फरवरी को मारे गए थे. यह वही दिन था जब तेहरान पर इजराइल और अमेरिका ने हवाई हमले किए थे. उन्होंने 36 साल तक ‘सुप्रीम लीडर’ के तौर पर इस्लामिक रिपब्लिक की अगुवाई की थी. सरकारी मीडिया ने बताया है कि अंतिम संस्कार की तैयारियों में 7 जुलाई को तेहरान के दक्षिण में स्थित एक और पवित्र शहर, कोम में होने वाले कार्यक्रम भी शामिल होंगे.

फरवरी में उनकी हत्या के बाद से ही खामेनेई के अंतिम संस्कार की तारीख को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं. इस्लामिक कानून के मुताबिक, मरने वाले को जल्द से जल्द दफनाया जाना चाहिए – आदर्श रूप से मौत के एक दिन के भीतर – हालांकि कुछ मामलों में छूट दी जा सकती है, खासकर युद्ध के दौरान. शुरुआती खबरों में कहा गया था कि उन्हें जून के आखिर में दफनाया जा सकता है, लेकिन बाद में सरकारी मीडिया ने पुष्टि की कि अंतिम संस्कार की रस्में जुलाई में होंगी.

2 करोड़ लोगों के शामिल होने की उम्मीद

तेहरान, मशहद और कोम में होने वाले अंतिम संस्कार में लगभग 2 करोड़ लोगों के शामिल होने की उम्मीद है. प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ समेत पाकिस्तान के अधिकारियों के भी इसमें शामिल होने की संभावना है. अगर लोगों की संख्या इन अनुमानों के बराबर रहती है, तो यह ईरान के इस्लामिक गणराज्य के संस्थापक अयातुल्ला रूहोल्लाह खोमैनी के 1989 में हुए अंतिम संस्कार में शामिल हुए 1 करोड़ लोगों की संख्या से भी ज्यादा हो सकती है.

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