हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़ी शिकायतों में 41 फीसदी की बढ़ोतरी; 69% मामले क्लेम खारिज होने से जुड़े; 1 Finance की स्टडी में खुलासा
स्टडी बताती है कि हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते वक्त ग्राहक जिस सुरक्षा का भरोसा करते हैं, वही क्लेम के समय सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है. स्टडी में शामिल प्रमुख बीमा कंपनियों के बीच 48 अंकों का बड़ा अंतर देखने को मिला. इसका मतलब है कि सभी कंपनियां एक जैसी नहीं हैं.
भारत में हेल्थ इंश्योरेंस को लेकर ग्राहकों का भरोसा उस वक्त डगमगाता दिख रहा, जब उन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है. 1 Finance की एक नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़ी शिकायतों में 41 फीसदी की तेज बढ़ोतरी हुई है और इनमें से 69 फीसदी शिकायतें क्लेम न मिलने या देरी से जुड़ी हैं. इस रिपोर्ट के मुताबिक, FY24 में जहां कुल 97,503 शिकायतें दर्ज हुई थीं, वहीं FY25 में यह संख्या बढ़कर 1,37,361 हो गई.
यह डेटा ऐसे समय सामने आया है जब इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) के चेयरमैन अजय सेठ पहले ही इस सेक्टर में ‘गंभीर विफलताओं’ को लेकर चिंता जता चुके हैं.
संकट के समय सबसे बड़ी निराशा
स्टडी बताती है कि हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते वक्त ग्राहक जिस सुरक्षा का भरोसा करते हैं, वही क्लेम के समय सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है. 23 बीमा कंपनियों के करीब 36,000 कस्टमर रिव्यू के विश्लेषण में पाया गया कि असली समस्या सिर्फ क्लेम रिजेक्शन नहीं, बल्कि देरी, अस्पष्ट जवाब और कमजोर कस्टमर सपोर्ट है.
कई मामलों में मरीजों को अस्पताल में भर्ती के दौरान कैशलेस अप्रूवल नहीं मिला, जिससे उन्हें इलाज के लिए उधार लेना पड़ा. वहीं, कुछ को महीनों बाद रिइम्बर्समेंट मिला, वह भी पूरी रकम के बिना.
क्लेम सेटलमेंट रेश्यो की सीमाएं
रिपोर्ट यह भी बताती है कि क्लेम सेटलमेंट रेश्यो पूरी तस्वीर नहीं दिखाता. यह सिर्फ यह बताता है कि कितने क्लेम पास हुए. लेकिन यह नहीं बताता कि
- मंजूरी में कितना समय लगा
- ग्राहक को कितनी आर्थिक परेशानी हुई
- रिजेक्शन का कारण कितना स्पष्ट था
यही वजह है कि 1 Finance ने ‘सेंटिमेंट एनालिसिस’ के जरिए ग्राहक अनुभव को मापने की कोशिश की. इसमें ग्राहक की भावना, सेवा की विश्वसनीयता और आर्थिक असर जैसे तीन पैमानों को शामिल किया गया.
1 Finance की फीचर्ड लिस्ट के पांच हेल्थ इंश्योरर्स के सेंटीमेंट स्कोर और प्रमुख शिकायतें
| बीमा कंपनी | सेंटीमेंट स्कोर | प्राप्त रिव्यू | टॉप 2 शिकायत कैटेगरी |
| ICICI Lombard | 98 | 3,544 | खराब ग्राहक सहायता (18%) क्लेम अप्रूवल में समस्या (16%) |
| HDFC Ergo | 96 | 2,435 | खराब ग्राहक सहायता (21%) क्लेम रिजेक्शन का अस्पष्ट कारण (15%) |
| Bajaj Allianz | 93 | 2,524 | खराब ग्राहक सहायता (35%) क्लेम अप्रूवल में समस्या (18%) |
| Manipal Cigna | 69 | 1,250 | खराब ग्राहक सहायता (28%) क्लेम अप्रूवल में समस्या (15%) |
| Care Health | 50 | 6,755 | खराब ग्राहक सहायता (30%) क्लेम रिजेक्शन का अस्पष्ट कारण (17%) |
कंपनियों के बीच बड़ा अंतर
स्टडी में शामिल प्रमुख बीमा कंपनियों के बीच 48 अंकों का बड़ा अंतर देखने को मिला. इसका मतलब है कि सभी कंपनियां एक जैसी नहीं हैं. कुछ संकट के समय बेहतर सपोर्ट देती हैं, जबकि कुछ पूरी तरह विफल हो जाती हैं. दिलचस्प बात यह है कि खराब ग्राहक सहायता हर कंपनी में आम समस्या है, लेकिन फर्क इस बात से पड़ता है कि उस समस्या का असर ग्राहक के जीवन पर कितना गंभीर होता है.
पॉलिसी खरीदते समय क्या देखें?
रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ कम प्रीमियम देखकर पॉलिसी चुनना भारी पड़ सकता है. ग्राहकों को ये तीन सवाल जरूर पूछने चाहिए.
- क्या कैशलेस क्लेम तेजी और भरोसेमंद तरीके से मिलता है?
- क्या रिजेक्शन का कारण साफ और लिखित रूप में दिया जाता है?
- क्या क्लेम के दौरान जेब से बड़ा खर्च करने की नौबत आती है?
भरोसा ही असली प्रोडक्ट
विशेषज्ञों का मानना है कि हेल्थ इंश्योरेंस सिर्फ एक वित्तीय प्रोडक्ट नहीं, बल्कि संकट के समय भरोसे का वादा है. अगर वही वादा टूटता है, तो इसका असर सिर्फ जेब पर नहीं, बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक और मानसिक स्थिति पर पड़ता है.
