ड्रोन बनाने वाली कंपनी के प्रमोटर्स ने IPO के पैसे का किया गलत इस्तेमाल, सेबी ने लिया एक्शन; लगाया तगड़ा जुर्माना

Droneacharya IPO: सेबी ने कॉरपोरेट एडवाइजरी फर्म इंस्टाफिन फाइनेंशियल एडवाइजर्स, उसके पार्टनर संदीप घाटे और माइक्रो इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड को भी मार्केट से रोक दिया है. सेबी की जांच में पता चला कि DAIL ने अपने प्रमोटर डायरेक्टर्स, इंस्टाफिन और उसके पार्टनर घाटे के साथ मिलकर धोखेबाजी की.

ड्रोनआचार्य एरियल इनोवेशंस के प्रमोटर्स ने किया फ्रॉड. Image Credit: Canva

Droneacharya IPO: सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने SME कंपनी ड्रोनआचार्य एरियल इनोवेशंस (DIAL) और उसके प्रमोटर्स, प्रतीक श्रीवास्तव और निकिता श्रीवास्तव को IPO से मिली रकम का गलत इस्तेमाल करने, फाइनेंशियल स्टेटमेंट में गलत जानकारी देने और कंपनी के फंड को दूसरी जगह लगाने का दोषी पाया है. इसके बाद उन पर दो साल के लिए सिक्योरिटीज मार्केट में इंट्री करने पर रोक लगा दी है.

75 लाख रुपये का जुर्माना

सेबी ने कॉरपोरेट एडवाइजरी फर्म इंस्टाफिन फाइनेंशियल एडवाइजर्स, उसके पार्टनर संदीप घाटे और माइक्रो इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड को भी मार्केट से रोक दिया है और इन एंटिटीज पर कुल 75 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. अकेले कंपनी और उसके प्रमोटर्स पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया.

ड्रोनआचार्य एरियल इनोवेशंस का स्टॉक 23 दिसंबर 2022 से BSE SME प्लेटफॉर्म पर लिस्टेड है. कंपनी ड्रोन ऑपरेशन ट्रेनिंग, ड्रोन सप्लाई और मेंटेनेंस सर्विस और मैनेजमेंट कंसल्टेंसी और ट्रेनिंग सर्विस देती है.

कब आया था आईपीओ?

ड्रोनआचार्य एरियल इनोवेशंस ने 12 दिसंबर 2022 और 15 दिसंबर 2022 के बीच अपना IPO लॉन्च किया था, जिसके जरिए निवेशकों से 33.96 करोड़ रुपये जुटाए गए थे. यह ऑर्डर फाइनेंशियल ईयर 2022-23 और 2023-24 के लिए सेबी की जांच के बाद आया है.

कैसे दिया गया फ्रॉड को अंजाम

सेबी की जांच में पता चला कि DAIL ने अपने प्रमोटर डायरेक्टर्स, इंस्टाफिन और उसके पार्टनर घाटे के साथ मिलकर धोखेबाजी की. उन्होंने एक धोखाधड़ी वाली स्कीम बनाई जो स्क्रिप में ट्रेडिंग करने वाले इन्वेस्टर्स के साथ धोखाधड़ी के तौर पर काम करती थी.

इस स्कीम में IPO से पहले प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए ऑप्शनली कन्वर्टिबल प्रेफरेंस शेयर्स (OCPS) जारी करना शामिल था, जिसके बाद DAIL को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट करने का वादा किया गया था. लिस्टिंग के बाद DAIL ने आम जनता को गलत और गुमराह करने वाली कॉरपोरेट घोषणाओं के जरिए गुमराह किया, शेयर की कीमतों को बनावटी तरीके से बनाए रखा ताकि प्री-IPO इन्वेस्टर्स को कुछ समय के लिए हेरफेर की गई कीमतों पर निकलने का मौका मिल सके, जिसका नुकसान आम इन्वेस्टर्स को उठाना पड़ा. सेबी की जांच में पाया गया कि कंपनी अपने प्रॉफिट और रेवेन्यू को बढ़ा-चढ़ाकर बता रही थी.

पैसों का गलत इस्तेमाल

105 पेज के ऑर्डर में कहा गया है कि सेबी की जांच में पाया गया कि कंपनी ने चार वेंडर्स से ड्रोन और उससे जुड़े सामान खरीदने के लिए तय 27.98 करोड़ रुपये में से सिर्फ 70 लाख रुपये इस्तेमाल किए. सेबी के ऑर्डर के मुताबिक, कंपनी ने प्रॉस्पेक्टस में बताए गए कामों के अलावा दूसरे कामों के लिए 27.28 करोड़ रुपये इस्तेमाल किए. यह भी पाया गया कि फर्म ने IPO फंड के इस्तेमाल पर छमाही रिपोर्ट में डेविएशन और चूक के बारे में गलत जानकारी दी थी.

प्रमोटर्स ने क्या कहा?

अपने बचाव में कंपनी और उसके प्रमोटरों ने ‘पूरी तरह से’ कहा कि उनके सभी कामों को एक फ्रॉड स्कीम का हिस्सा बताने के लिए इतना गंभीर आरोप लगाने से DAIL का पूरा IPO और लिस्टिंग प्रोसेस ही फ्रॉड हो जाएगा, जिसे पूरी तरह से खारिज कर दिया जाना चाहिए.

इस बीच सेबी ने प्रमोटर्स और दूसरे आरोपियों को किसी भी एक्सचेंज-ट्रेडेड डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट में किसी भी ओपन पोजीशन को क्लोज आउट/स्क्वायर ऑफ करने की इजाजत दे दी है.

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