NSE IPO: 10 साल का लंबा इंतजार, रेगुलेटरी मुश्किलें पार, आखिरकार आ रहा ₹23000 करोड़ का मेगा इश्यू
करीब 10 साल के लंबे इंतजार के बाद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) अपने ₹23,000 करोड़ तक के मेगा आईपीओ के साथ शेयर बाजार में उतरने जा रहा है. सेबी से मंजूरी मिलने के बाद देश के सबसे बड़े एक्सचेंज की लिस्टिंग का रास्ता साफ हो गया है. यह इश्यू भारतीय इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल हो सकता है और NSE की वैल्यूएशन ₹6 लाख करोड़ तक पहुंच सकती है.

भारतीय शेयर बाजार पर एकछत्र राज करने वाला नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) आखिरकार अपने IPO के लिए पूरी तरह तैयार है. लगभग एक दशक के लंबे इंतजार और कई कानूनी अड़चनों को पार करने के बाद, NSE ने बाजार नियामक सेबी के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस (DRHP) जमा कर दिया है. इसी साल 6 फरवरी 2026 को सेबी से हरी झंडी (NOC) मिलने के बाद, एनएसई के लिस्टिंग का रास्ता साफ हो गया था. यह आईपीओ भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास के सबसे बड़े पब्लिक इश्यू में से एक होने जा रहा है.
पूरी तरह ‘ऑफर फॉर सेल’ होगा यह आईपीओ
इस मेगा आईपीओ का साइज ₹22,000 करोड़ से ₹23,000 करोड़ के बीच होने की उम्मीद है. यह पूरा इश्यू ‘ऑफर फॉर सेल’ (OFS) के रूप में आ रहा है. इसका मतलब है कि NSE खुद के लिए कोई नया फंड नहीं जुटाएगा, बल्कि उसके पुराने संस्थागत शेयरधारक अपनी 4 से 4.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर बाहर निकलेंगे.
इस इश्यू साइज के आधार पर एनएसई की कुल मार्केट वैल्यू ₹4.7 लाख करोड़ से ₹6 लाख करोड़ के बीच आंकी जा रही है. इस बड़े ट्रांजैक्शन को संभालने के लिए कोटक महिंद्रा, मॉर्गन स्टेनली और एसबीआई कैप्स जैसे 20 दिग्गज मर्चेंट बैंकर्स को नियुक्त किया गया है.
को-लोकेशन स्कैम और 10 साल का कठिन सफर
NSE की लिस्टिंग का यह सफर आसान नहीं रहा है. एक्सचेंज ने पहली बार दिसंबर 2016 में ₹10,000 करोड़ के आईपीओ के लिए ड्राफ्ट जमा किया था. लेकिन तभी कुख्यात ‘को-लोकेशन घोटाला’ सामने आ गया. आरोप था कि कुछ एल्गोरिद्मिक ट्रेडिंग ब्रोकर्स को एनएसई के सर्वर तक खास पहुंच मिली हुई थी, जिससे उन्हें दूसरों से कुछ मिलीसेकंड पहले डेटा मिल जाता था.
इसके बाद सेबी ने बड़ी जांच शुरू की, मैनेजमेंट बदला और कड़े आर्थिक दंड लगाए. पिछले 10 सालों में एनएसई ने अपने पूरे सिस्टम को सुधारा और तकनीकी खामियों को दूर किया, जिसके बाद अब जाकर उसे मंजूरी मिली है.
बाजार पर एनएसई का ‘एकछत्र राज’
एनएसई का बिजनेस मॉडल बेहद मजबूत है, जो इसकी भारी-भरकम वैल्यूएशन को सही ठहराता है. देश के डेरिवेटिव्स (F&O) मार्केट में एनएसई की हिस्सेदारी 93 से 98 फीसदी है, जिससे यह वॉल्यूम के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव एक्सचेंज बनता है.
वहीं कैश इक्विटी सेगमेंट में भी इसका 85 से 90 फीसदी बाजार पर कब्जा है. भारत में बढ़ते डीमैट खातों और रिटेल निवेशकों की वजह से एक्सचेंज की कमाई लगातार बढ़ रही है.
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लिस्टिंग के बाद क्या बदलेगा?
वर्तमान में बीएसई (BSE) देश का एकमात्र लिस्टेड एक्सचेंज है. एनएसई की लिस्टिंग के बाद दोनों दिग्गजों के बीच सीधी तुलना शुरू हो जाएगी, जिससे बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी. हालांकि, लिस्टेड होने के बाद एनएसई पर दोहरी जिम्मेदारी होगी. उसे कंपनियों के लिए रेगुलेटर की भूमिका भी निभानी होगी और अपने शेयरधारकों के प्रति जवाबदेह भी होना होगा. अनुमान है कि सेबी की अंतिम मंजूरी के बाद यह आईपीओ दिसंबर 2026 से पहले बाजार में दस्तक दे देगा.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.