IPO: 4.66 लाख करोड़ रुपये के IPO कतार में, Jio और NSE समेत 238 कंपनियां तैयार
भारत में IPO बाजार में बड़ी हलचल है. 238 कंपनियां करीब 4.66 लाख करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में हैं. इनमें Jio Platforms, NSE और PhonePe जैसे बड़े नाम शामिल हैं. 167 कंपनियों को SEBI की मंजूरी मिल चुकी है.

भारतीय शेयर बाजार में IPO का दौर अभी थमने वाला नहीं है. देश में करीब 4.66 लाख करोड़ रुपये के IPO की पाइपलाइन तैयार है. Prime Database के आंकड़ों के मुताबिक, कुल 238 कंपनियां सार्वजनिक निर्गम की तैयारी में हैं. इनमें से 167 कंपनियों को SEBI की मंजूरी मिल चुकी है, जबकि 71 कंपनियां अभी नियामकीय मंजूरी का इंतजार कर रही हैं.
Jio और NSE के IPO पर सबसे ज्यादा नजर
इस पूरी पाइपलाइन में सबसे बड़े प्रस्तावों में Jio Platforms और National Stock Exchange (NSE) शामिल हैं. Jio Platforms करीब 37,700 करोड़ रुपये जुटाने की योजना में है. वहीं NSE का प्रस्तावित IPO करीब 30,000 करोड़ रुपये का है. इसके अलावा PhonePe भी करीब 12,000 करोड़ रुपये का IPO ला सकती है. इन तीन कंपनियों के प्रस्तावित इश्यू का कुल आकार करीब 79,700 करोड़ रुपये बैठता है.
Jio Platforms को 28 अगस्त 2026 को SEBI की मंजूरी मिल चुकी है. करीब 3.8 अरब डॉलर का यह IPO सफल होने पर भारत के सबसे बड़े IPO में शामिल होगा.
NSE के IPO पर भी निवेशकों की नजर है. हाल में सुप्रीम कोर्ट द्वारा SEBI की NSE से जुड़ी अपीलों को खारिज किए जाने के बाद एक्सचेंज के IPO की राह कुछ और साफ हुई है.
कई बड़ी कंपनियां भी कतार में
IPO की इस लंबी सूची में सिर्फ Jio और NSE ही नहीं हैं. Prism करीब 6,650 करोड़ रुपये, Zepto करीब 5,106 करोड़ रुपये, Avaada Electro करीब 7,600 करोड़ रुपये और Sembcorp Green Infra करीब 3,750 करोड़ रुपये का इश्यू प्रस्तावित कर चुकी हैं.
Zepto ने अपनी IPO योजना में देरी की है, लेकिन कंपनी अभी भी पाइपलाइन में शामिल है. इसका मतलब यह है कि किसी कंपनी का नाम IPO पाइपलाइन में होना जरूरी नहीं कि उसका इश्यू तुरंत बाजार में आ ही जाए. बाजार की स्थिति और कंपनी की तैयारी के आधार पर टाइमलाइन बदल सकती है.
इंजीनियरिंग और IT कंपनियों की भी बड़ी हिस्सेदारी
IPO की प्रस्तावित सूची कई सेक्टर में फैली हुई है. मंजूरी पा चुकी कंपनियों की संख्या के लिहाज से इंजीनियरिंग सेक्टर सबसे आगे है. इसके बाद IT और सॉफ्टवेयर, हाउसिंग-कंस्ट्रक्शन-रियल एस्टेट और इलेक्ट्रिकल-इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी कंपनियां शामिल हैं. वित्तीय सेवाओं का भी इस पाइपलाइन में बड़ा योगदान है.
1.66 लाख करोड़ रुपये का अनुमान
इस आंकड़े की एक खास बात यह है कि करीब 1.66 लाख करोड़ रुपये का अनुमान उन कंपनियों से जुड़ा है, जिन्होंने अभी अपने IPO का आकार सार्वजनिक नहीं किया है. Prime Database ने ऐसी 111 कंपनियों के लिए औसतन 1,500 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया है. इसलिए 4.66 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पूरी तरह घोषित इश्यू साइज नहीं है, बल्कि संभावित फंड जुटाने का अनुमान है.
बाजार की चाल तय करेगी IPO की रफ्तार
इतनी बड़ी IPO पाइपलाइन के बावजूद सभी कंपनियां एक साथ बाजार में नहीं आएंगी. कंपनियां बाजार की स्थिति, निवेशकों की मांग और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए इश्यू का समय तय करेंगी. ऐसे में आने वाले महीनों में भारतीय IPO बाजार में बड़ी कंपनियों के साथ कई छोटे और मध्यम इश्यू भी देखने को मिल सकते हैं.