Jio IPO: मुनाफे से लेकर रेवेन्यू तक, मुकेश अंबानी की जियो के पास हैं कितने करोड़ ग्राहक?

अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) के अनुसार, रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स ने FY26 में सब्सक्राइबर्स, रेवेन्यू और मुनाफे के मामले में जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की है. भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम और डिजिटल सर्विस कंपनी अपनी लंबे समय से प्रतीक्षित पब्लिक लिस्टिंग की ओर बढ़ रही है.

रिलायंस जियो आईपीओ. Image Credit: tv9 bharatvarsh

Jio IPO: रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं सालाना आम बैठक (IPO के बाद) के बाद शुक्रवार को जियो प्लेटफॉर्म्स ने मार्केट रेगुलेटर ‘सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया’ (SEBI) के पास अपना प्रॉस्पेक्टस जमा किया. जियो प्लेटफॉर्म्स अपने प्रस्तावित ‘इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग’ (IPO) से मिलने वाले लगभग 27,500 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करने की योजना बना रही है. मुकेश अंबानी की कंपनी ने लगभग 27 करोड़ शेयरों का ‘प्योर फ्रेश इश्यू’ लाने का प्रस्ताव रखा है. हालांकि, इश्यू के साइज के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है.

रेवेन्यू और मुनाफे के मोर्चे पर ग्रोथ

अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) के अनुसार, रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स ने FY26 में सब्सक्राइबर्स, रेवेन्यू और मुनाफे के मामले में जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की है. यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है जब भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम और डिजिटल सर्विस कंपनी अपनी लंबे समय से प्रतीक्षित पब्लिक लिस्टिंग की ओर बढ़ रही है.

रेवेन्यू

FY26 में ऑपरेशन से होने वाला रेवेन्यू सालाना आधार पर 14.6 फीसदी बढ़कर 1.47 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि FY25 में यह 1.28 लाख करोड़ रुपये था. पिछले दो साल में सब्सक्राइबर की संख्या में बढ़ोतरी, ज्यादा ARPU और डिजिटल सेवाओं के विस्तार की वजह से रेवेन्यू में 34 फीसदी से अधिक की बढ़त हुई है. ऑपरेटिंग मुनाफा मजबूत बना रहा. EBITDA एक साल पहले के 64,170 करोड़ रुपये से बढ़कर FY26 में 76,255 करोड़ रुपये हो गया, जबकि EBITDA मार्जिन बेहतर होकर 51.9 फीसदी हो गया.

मुनाफा

FY25 में ₹26,109 करोड़ रुपये के मुकाबले, FY26 में टैक्स के बाद मुनाफा बढ़कर 30,049 करोड़ रुपये हो गया, जो पहली बार 30,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है. Jio का PAT मार्जिन सुधरकर 20.5% हो गया, जो पिछले तीन साल से लगातार बढ़ रहा है.

Jio Platforms ने कहा, ‘2016 में लॉन्च होने के बाद से सिर्फ 10 साल में हमने यह मुकाम हासिल किया है और इस दौरान रेवेन्यू के मामले में भारत का सबसे बड़ा बिजनेस बन गए हैं.’ वित्त वर्ष 2024 और वित्त वर्ष 2026 के बीच, हमारे ऑपरेशन से होने वाले रेवेन्यू और EBITDA में क्रमशः 15.79% और 17.79% की CAGR से बढ़ोतरी हुई.

कर्ज

इस बीच, कंपनी की बैलेंस शीट काफी मजबूत हुई है. नेट लेवरेज FY24 में 0.88 गुना और FY25 में 0.71 गुना से घटकर FY26 में सिर्फ 0.36 गुना रह गया. इस बारे में जियो ने कहा, ‘हमारी बैलेंस शीट मजबूत है, जो हमारी बेहतर होती लेवरेज स्थिति से साफ पता चलता है. हमारा नेट लेवरेज फाइनेंशियल ईयर 2024 में 0.88x से घटकर फाइनेंशियल ईयर 2026 में 0.36x हो गया है.’

सबसे अहम सुधार कैश जेनरेशन में देखने को मिला. EBITDA में से कैश कैपिटल एक्सपेंडिचर घटाने के बाद बची रकम FY26 में बढ़कर 42,071 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले साल के 19,902 करोड़ रुपये से दोगुनी से भी अधिक और FY24 के 1,449 करोड़ रुपये से कहीं ज्यादा है. इसका मतलब है कि जियो अपने सबसे अधिक इन्वेस्टमेंट वाले दौर से आगे बढ़ चुकी है और अब ज्यादा फ्री कैश फ्लो बना रही है.

कस्टमर बेस

IPO फाइलिंग के अनुसार, Jio का कस्टमर बेस FY26 के आखिर में बढ़कर 524.4 मिलियन यूजर्स हो गया, जो एक साल पहले 488.2 मिलियन था. कंपनी ने साल के दौरान 36.2 मिलियन नए सब्सक्राइबर जोड़े, जो FY25 में जोड़े गए 6.4 मिलियन सब्सक्राइबर से कहीं ज्यादा हैं. सब्सक्राइबर बढ़ने के साथ-साथ कस्टमर का खर्च भी बढ़ा, क्योंकि प्रति यूजर औसत रेवेन्यू (ARPU) बढ़कर 214 रुपये प्रति महीना हो गया. यह FY25 में 206.2 रुपये और FY24 में 181.7 रुपये था.

आउटलुक

आगे चलकर, Jio को उम्मीद है कि समय के साथ डिजिटल सेवाओं पर ग्राहकों का खर्च बढ़ेगा, ब्रॉडबैंड और अन्य डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले घरों की संख्या में बढ़ोतरी होगी, और भारतीय कंपनियों में डिजिटल प्लेटफॉर्म और सेवाओं को बड़े पैमाने पर अपनाया जाएगा. ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस में कहा गया कि एक्सेस के अलावा, हम इंटीग्रेटेड डिजिटल अनुभव और बेहतर नेटवर्क परफॉर्मेंस के जरिए अलग पहचान बनाने की कोशिश जारी रखेंगे. हम अपने ग्राहकों को सबसे अच्छा अनुभव देने के लिए अपने नेटवर्क में निवेश करना जारी रखेंगे.

इसके अलावा, टैरिफ में बढ़ोतरी के साथ-साथ ARPU (प्रति यूजर औसत रेवेन्यू) में बढ़ोतरी से कमाई बढ़ने की उम्मीद है. कनेक्टिविटी से मिलने वाले ARPU में बढ़ोतरी की काफी गुंजाइश है, जिसके पीछे कई स्ट्रक्चरल कारण हैं.

  • समय-समय पर टैरिफ में बदलाव जिससे बेहतर वैल्यू मिलती है
  • अधिक कीमत वाले बंडल प्लान का ज्यादा इस्तेमाल
  • भारत में प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी

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