Jio IPO में बड़ा दांव! OFS नहीं, फ्रेश इश्यू पर फोकस, निवेशकों के लिए क्यों है अच्छी खबर?

रिलायंस इंडस्ट्रीज की कंपनी Jio Platforms का प्रस्तावित IPO हाल के बड़े पब्लिक इश्यू से अलग हो सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें ऑफर फार सेल की बजाय फ्रेश इश्यू के जरिए नए शेयर जारी किए जाएंगे. इससे जुटाई गई रकम सीधे कंपनी के कारोबार, कर्ज घटाने, टेलीकॉम नेटवर्क विस्तार, AI इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल बिजनेस को मजबूत करने में इस्तेमाल होगी.

जियो के आईपीओ Image Credit: Canva/Money9live

Jio IPO: जियो प्लेटफॉर्म ने शुक्रवार को आईपीओ के लिए मार्केट रेगुलेटर SEBI के पास अपना DRHP फाइल किया है. कंपनी अपने प्रस्तावित IPO में ऑफर फार सेल (OFS) की जगह फ्रेश इश्यू के जरिए 27 करोड़ तक नए शेयर जारी करने की तैयारी कर रही है. अगर ऐसा होता है तो यह हाल के बड़े IPO से अलग होगा, क्योंकि इसमें जुटाई गई रकम सीधे कंपनी के पास जाएगी, न कि मौजूदा निवेशकों के पास.

क्या होता है फ्रेश इश्यू और OFS?

आमतौर पर बड़े IPO में OFS के जरिए प्रमोटर या शुरुआती निवेशक अपने कुछ शेयर बेचते हैं. ऐसे में IPO से मिलने वाली रकम कंपनी के बजाय शेयर बेचने वाले निवेशकों के पास जाती है.

वहीं फ्रेश इश्यू में कंपनी नए शेयर जारी करती है. इससे जुटाया गया पूरा पैसा सीधे कंपनी के पास जाता है, जिसका इस्तेमाल कारोबार बढ़ाने, कर्ज कम करने या नए प्रोजेक्ट्स में निवेश के लिए किया जाता है.

Jio IPO क्यों माना जा रहा है अलग?

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, Jio Platforms के प्रस्तावित IPO से जुटाई गई रकम में से करीब 25,000 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर्ज कम करने के लिए किया जा सकता है. बाकी राशि टेलीकॉम नेटवर्क के विस्तार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और डिजिटल बिजनेस को मजबूत करने में खर्च की जा सकती है.

यही वजह है कि इस IPO को हाल के बड़े पब्लिक इश्यू से अलग माना जा रहा है, क्योंकि इसमें जुटाई गई कैपिटल सीधे कंपनी की ग्रोथ में इस्तेमाल होगी.

रिलायंस और मौजूदा निवेशकों पर क्या होगा असर?

फिलहाल रिलायंस इंडस्ट्रिज के पास Jio Platforms में करीब 67 फीसदी हिस्सेदारी है. फ्रेश इश्यू आने पर नए शेयर जारी होंगे, जिससे सभी मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी अनुपातिक रूप से कम होगी.

वहीं अगर IPO OFS के जरिए आता, तो केवल शेयर बेचने वाले निवेशकों की हिस्सेदारी घटती, जबकि कंपनी की कुल शेयर कैपिटल में कोई बदलाव नहीं होता.

निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?

फ्रेश इश्यू की सबसे बड़ी खासियत यह है कि IPO से जुटाया गया पैसा सीधे कंपनी के कारोबार में लगाया जाता है. इससे निवेशकों को यह भरोसा मिलता है कि कंपनी फ्यूचर की ग्रोथ के लिए पूंजी जुटा रही है, न कि केवल पुराने निवेशकों को बाहर निकलने का मौका दे रही है.

अगर IPO की वैल्यूएशन संतुलित रहती है, तो इससे बड़े IPO को लेकर निवेशकों का भरोसा भी मजबूत हो सकता है.

Jio के मौजूदा निवेशक बने रहेंगे साथ

रिपोर्ट के मुताबिक, Jio Platforms के मौजूदा निवेशक IPO के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेचने के बजाय कंपनी में निवेश बनाए रखेंगे. इनमें Google, Meta, Saudi Arabia’s Public Investment Fund, Vista Equity Partners, KKR, Silver Lake, General Atlantic, Abu Dhabi Investment Authority, TPG, L Catterton, Intel Capital और Qualcomm Ventures जैसे बड़े वैश्विक निवेशक शामिल हैं.

इसका मतलब है कि IPO के बाद भी ये निवेशक कंपनी के साथ बने रहेंगे, जिसे Jio के लंबी अवधि के ग्रोथ प्लान पर भरोसे के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.

रिटेल निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?

अगर IPO Fresh Issue के रूप में आता है, तो इससे जुटाई गई कैपिटल कंपनी के कारोबार को मजबूत करने में लगेगी. ऐसे में रिटेल निवेशकों के लिए यह एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, क्योंकि उनका पैसा मौजूदा निवेशकों की एग्जिट के बजाय कंपनी की ग्रोथ में इस्तेमाल होगा.

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