Jio लाएगा भारत का पहला सैटेलाइट ब्रॉडबैंड नेटवर्क, Starlink को सीधी टक्कर, इंटरनेट में फिर होगा धमाका !
Reliance Jio भारत का अपना सॉवरेन LEO सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन विकसित करने की योजना पर काम कर रही है. कंपनी का लक्ष्य दूरदराज के गांवों, सीमावर्ती क्षेत्रों और दुर्गम इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाना है, जहां पारंपरिक टेलीकॉम नेटवर्क की पहुंच सीमित है. Jio 1,600 से अधिक सैटेलाइट्स के नेटवर्क पर काम कर रही है.
Jio Satellite Network: देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में शामिल Jio अब सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेगमेंट में बड़ा दांव लगाने की तैयारी कर रही है. कंपनी भारत का अपना सॉवरेन लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन विकसित करने की संभावनाओं पर काम कर रही है. रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में Jio के चेयरमैन आकाश अंबानी ने इस योजना की जानकारी दी.
आकाश अंबानी ने कहा कि Jio भारत के लिए एक सॉवरेन LEO सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन विकसित करने की संभावना का मूल्यांकन कर रही है. इस परियोजना का उद्देश्य देश के दूरदराज और दुर्गम इलाकों तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाना है, जहां पारंपरिक टेलीकॉम नेटवर्क की पहुंच सीमित है.
दूरदराज के इलाकों तक पहुंचेगा इंटरनेट
आकाश अंबानी के अनुसार, सैटेलाइट कम्युनिकेशन भविष्य में भारत की डिजिटल कनेक्टिविटी का अहम हिस्सा बनने जा रहा है. उन्होंने कहा कि देश के सुदूर गांवों, द्वीपीय क्षेत्रों और सीमावर्ती चौकियों तक इंटरनेट पहुंचाने में सैटेलाइट कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. उन्होंने कहा कि ऐसे इलाकों में, जहां फाइबर नेटवर्क या मोबाइल टावर पहुंचाना मुश्किल है, वहां सैटेलाइट इंटरनेट लोगों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने का माध्यम बनेगा.
1,600 से ज्यादा सैटेलाइट लॉन्च करने की तैयारी
रिपोर्ट्स के अनुसार, Jio करीब 1,600 से 1,650 LEO सैटेलाइट्स के कॉन्स्टेलेशन पर काम कर रही है. यह नेटवर्क ब्रॉडबैंड और डायरेक्ट-टू-डिवाइस सर्विसेज, दोनों उपलब्ध करा सकेगा. यदि यह परियोजना तय पैमाने पर लागू होती है, तो Jio इस सेगमेंट में बड़े स्तर का सैटेलाइट नेटवर्क विकसित करने वाली पहली भारतीय कंपनी बन जाएगी.
सूत्रों के मुताबिक, कंपनी ने स्पेस रेगुलेटर IN-SPACe को प्रस्ताव भी सौंपा है. यह सैटेलाइट नेटवर्क करीब 650 किलोमीटर की ऊंचाई पर संचालित हो सकता है और अगले दो से तीन वर्षों में इसे तैनात किया जा सकता है.
ग्लोबल पार्टनर्स के साथ भी कर रही है काम
Jio केवल अपने सैटेलाइट नेटवर्क पर ही निर्भर नहीं रहेगी. आकाश अंबानी ने बताया कि कंपनी दुनिया की प्रमुख सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन प्रोवाइडर्स के साथ भी साझेदारी कर रही है. उन्होंने कहा कि यह ड्यूल स्ट्रैटेजी भारत में सैटेलाइट सर्विसेज को तेजी से शुरू करने में मदद करेगी. साथ ही, कंपनी को अपनी घरेलू सैटेलाइट कैपेबिलिटीज विकसित करने का समय भी मिलेगा.
ग्राउंड स्टेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर भी तैयार
इस महत्वाकांक्षी योजना को समर्थन देने के लिए Jio देशभर में ग्राउंड स्टेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर भी विकसित कर रही है. ये ग्राउंड स्टेशन पार्टनर सैटेलाइट नेटवर्क्स और भविष्य में Jio के अपने सैटेलाइट्स, दोनों को सपोर्ट करेंगे. कंपनी का लक्ष्य स्पेस इन्फ्रास्ट्रक्चर और टेरेस्ट्रियल नेटवर्क को जोड़ते हुए एक एंड-टू-एंड सैटेलाइट ब्रॉडबैंड इकोसिस्टम तैयार करना है.
Starlink और प्रोजेक्ट Kuiper को मिलेगी चुनौती
वैश्विक स्तर पर सैटेलाइट इंटरनेट मार्केट में फिलहाल एलन मस्क की Starlink का दबदबा है, जिसके लगभग 10,000 सैटेलाइट्स ऑर्बिट में मौजूद हैं. वहीं, अमेजन का प्रोजेक्ट Kuiper 3,200 से अधिक सैटेलाइट्स के नेटवर्क पर काम कर रहा है. इसके अलावा, भारती ग्रुप समर्थित यूटेलसैट वनवेब के पास करीब 650 सैटेलाइट्स का नेटवर्क है.
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