डोनाल्ड ट्रंप ने खाई कसम, कहा- ईरान खत्म हो चुका है… उसे एक पैसा भी नहीं मिलेगा
ट्रुथ सोशल पर पोस्ट में, ट्रंप ने राजनीतिक विरोधियों की आलोचना को खारिज कर दिया और कहा कि युद्ध ने ईरान की सैन्य ताकत को बहुत कम कर दिया है. ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब ईरान की सैन्य क्षमताओं पर टकराव के असर और वॉशिंगटन व तेहरान के बीच बातचीत के भविष्य को लेकर बहस चल रही है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान ‘खत्म’ हो चुका है और कसम खाई कि तेहरान को अमेरिका से ‘दस सेंट भी’ नहीं मिलेंगे. उन्होंने दावा किया कि युद्ध ने देश की सैन्य क्षमताओं को बर्बाद कर दिया है और अब उसके पास न तो एयर फ़ोर्स है, न नेवी और न ही कोई जरूरी डिफेंस सिस्टम.
ईरान के पास कुछ भी नहीं बचा
ट्रुथ सोशल पर पोस्ट में, ट्रंप ने राजनीतिक विरोधियों की आलोचना को खारिज कर दिया और कहा कि युद्ध ने ईरान की सैन्य ताकत को बहुत कम कर दिया है. ट्रंप ने लिखा, ‘युद्ध ने ईरान को कमजोर कर दिया है. अब उसके पास एयर फोर्स, नेवी, एंटी-एयरक्राफ्ट उपकरण, रडार या असल में कुछ भी नहीं बचा है.’
एक पैसा भी नहीं मिलेगा
ट्रंप ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, ‘हम मजबूरी में नहीं मिले थे, ईरान मिला था. उनका खेल खत्म हो चुका है. हम 60 दिन का समय पूरा करेंगे. उन्हें कोई पैसा नहीं मिलेगा, एक पैसा भी नहीं.

ईरान को नहीं देंगे आर्थिक मदद
ट्रंप ने कहा, ‘फिर भी डेमोक्रेट्स का कहना है कि ईरान की हालत चार महीने पहले की तुलना में अब बेहतर है. क्या आप सोच सकते हैं कि कोई ऐसी बात कह कर बच सकता है? कुछ लोग कितने बेवकूफ हो सकते हैं?’
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अपनी मौजूदा समय-सीमा के अनुसार काम करता रहेगा और तेहरान को कोई आर्थिक मदद नहीं देगा.
वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत
ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब ईरान की सैन्य क्षमताओं पर टकराव के असर और वॉशिंगटन व तेहरान के बीच बातचीत के भविष्य को लेकर बहस चल रही है. ट्रंप की टिप्पणियां उनके प्रशासन के इस दावे पर भी जोर देती हैं कि ईरान पर दबाव का असर हुआ है, भले ही आलोचक इस बात पर सवाल उठाते हों कि क्या इस रणनीति से कोई स्थायी समाधान निकल सकता है.
अमेरिका-ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते पर दस्तखत होने के बाद अपने पहले बयान में, मुज्तबा ने गुरुवार को ईरानी लोगों से कहा कि शुरू में उन्होंने ‘सिद्धांत के तौर पर’ इस समझौते का विरोध किया था, लेकिन बाद में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सदस्यों से यह भरोसा मिलने के बाद उन्होंने इसे मंजूरी दे दी कि देश और रेजिस्टेंस फ्रंट” के हितों की रक्षा की जाएगी.
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