कच्चे तेल से अब ये बनाएगी रिलायंस…पेट्रोल-डीजल पुरानी बात, हर बैरल से निकलेगा ज्यादा मुनाफा!
रिलायंस इंडस्ट्रीज अब कच्चे तेल से सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही नहीं, बल्कि कार्बन फाइबर, स्पेशियलिटी मटेरियल्स, ग्रीन केमिकल्स और अन्य हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स भी बनाएगी. कंपनी का लक्ष्य ऑयल-टू-केमिकल्स कारोबार को नए रूप में विकसित कर कमोडिटी कीमतों और भू-राजनीतिक जोखिमों पर निर्भरता घटाना है. इसके लिए जामनगर रिफाइनरी की क्षमता का इस्तेमाल किया जाएगा.
Reliance AGM: शुक्रवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में मुकेश अंबानी ने कंपनी के पारंपरिक ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) कारोबार को नए सिरे से विकसित करने का बड़ा रोडमैप पेश किया. अब कच्चे तेल (Crude Oil) का इस्तेमाल सिर्फ पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल बनाने तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि इससे कार्बन फाइबर, स्पेशियलिटी मटेरियल्स, ग्रीन केमिकल्स और दूसरे हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स भी तैयार करेगी.
O2C कारोबार को नए सिरे से करेगी तैयार
मुकेश अंबानी ने कहा कि ऑयल-टू-केमिकल्स कारोबार अब तक रिलायंस की ग्रोथ का मुख्य आधार रहा है. उन्होंने कहा कि जैसे ही वैश्विक भू-राजनीतिक हालात सुधरेंगे, इस कारोबार की कमाई में तेजी आएगी. साथ ही कंपनी इस बिजनेस को नए सिरे से तैयार कर रही है, ताकि ऐसे नए रेवेन्यू के सोर्स विकसित किए जा सकें, जो वैश्विक अस्थिरता और कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव से कम प्रभावित हों.
हर बैरल कच्चे तेल से बनाए जाएंगे नए प्रोडक्ट
मुकेश अंबानी ने कहा कि रिलायंस का लक्ष्य प्रोसेस किए जाने वाले हर बैरल कच्चे तेल का इस्तेमाल एडवांस मटेरियल्स और सस्टेनेबल प्रोडक्ट बनाने में करना है. कंपनी कच्चे तेल से कार्बन फाइबर, स्पेशियलिटी मटेरियल्स, ग्रीन केमिकल्स और कई दूसरे हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स तैयार करेगी. उनका कहना है कि इससे कंपनी के मार्जिन में बढ़ोतरी होगी और फ्यूचर के O2C तथा न्यू मटेरियल्स बिजनेस की मजबूत नींव तैयार होगी.
जामनगर रिफाइनरी देगी बड़ा फायदा
रिलायंस के पास गुजरात के जामनगर में दुनिया के सबसे बड़े और अत्याधुनिक रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में से एक है. यही रिफाइनरी कंपनी को पेट्रोल, डीजल, जेट फ्यूल और कई अन्य पेट्रोलियम उत्पाद बनाने में बढ़त देती है.
फिलहाल जामनगर रिफाइनरी के कुल उत्पादन का करीब आधा हिस्सा, यानी लगभग 3.3 करोड़ टन प्रति वर्ष, भारत की घरेलू ईंधन जरूरतों को पूरा करता है. जबकि बाकी उत्पादन स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) स्थित रिफाइनरी के जरिए मुख्य रूप से निर्यात बाजारों और अधिक मूल्य वाले अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के लिए प्रोसेस किया जाता है.
पश्चिम एशिया संकट के बीच नई स्ट्रेटजी
मुकेश अंबानी की यह घोषणा ऐसे समय आई है, जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. ऐसे माहौल में रिलायंस अपने कारोबार को केवल ईंधन पर निर्भर रखने के बजाय अधिक मूल्य वाले और टिकाऊ उत्पादों की ओर ले जाने की तैयारी कर रही है.
ऊर्जा संकट के बीच भी जारी रखा प्रोडक्शन
AGM में रिलायंस के कार्यकारी निदेशक अनंत अंबानी ने बताया कि Strait of Hormuz में व्यवधान के बावजूद कंपनी ने कच्चे तेल की खरीद के सोर्स में विविधता लाकर अपनी रिफाइनरियों को लगभग पूरी क्षमता पर संचालित रखा. जबकि इस दौरान माल ढुलाई और बीमा लागत में काफी बढ़ोतरी हुई. उन्होंने यह भी बताया कि LNG आयात प्रभावित होने पर रिलायंस ने LPG की आपूर्ति चार गुना बढ़ाई और घरेलू प्राकृतिक गैस को सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन, उर्वरक और बिजली उत्पादन जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में उपलब्ध कराया.
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