7 साल बाद भारत के लिए फिर खुलेगा ईरानी तेल का रास्ता? कम हो सकता है पेट्रोल-डीजल का दबाव
7 साल बाद भारत के लिए फिर खुल सकता है ईरानी तेल का रास्ता. अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद भारतीय रिफाइनर्स को सस्ता कच्चा तेल, कम फ्रेट कॉस्ट और बेहतर सप्लाई सुरक्षा का फायदा मिल सकता है.
भारत और ईरान के बीच कच्चे तेल का पुराना और गहरा रिश्ता एक बार फिर जिंदा होने जा रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में शुक्रवार को होने वाले ऐतिहासिक शांति समझौते से भारत के लिए बड़ी खुशखबरी आ सकती है. इस डील के बाद करीब सात साल के लंबे अंतराल के बाद ईरानी कच्चे तेल की भारत में बड़े पैमाने पर वापसी का रास्ता साफ हो जाएगा. कभी भारत की जरूरत का 10 से 13 फीसदी तेल अकेले पूरा करने वाले ईरान के लौटने से भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों को न सिर्फ सस्ता तेल मिलेगा, बल्कि माल ढुलाई का खर्च भी आधा हो जाएगा.
भारतीय रिफाइनर्स के लिए ‘बंपर लॉटरी’
साल 2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत को ईरान से तेल खरीदना बंद करना पड़ा था. उससे पहले भारत हर दिन करीब 3 लाख बैरल ईरानी कच्चे तेल का आयात करता था और ईरान हमारे शीर्ष तीन तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल था.
वित्त वर्ष 2017 से 2019 के बीच भारत के कुल तेल आयात में ईरान की हिस्सेदारी 10-13% थी. प्रतिबंधों में अस्थायी ढील के दौरान इसी साल अप्रैल में भारतीय रिफाइनर्स ने 44,000 मीट्रिक टन ईरानी तेल खरीदकर यह साबित कर दिया था कि वे पाबंदियां हटते ही दोबारा पूरी रफ्तार से खरीदारी के लिए तैयार हैं.
सस्ता भाड़ा और उधारी की खुली छूट
ईरान से तेल खरीदने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि वहां से भारत तक तेल लाने का भाड़ा बेहद कम है. ईरान से माल ढुलाई का खर्च महज 30 से 55 सेंट प्रति बैरल आता है, जबकि अफ्रीकी देशों से यह 1-2 डॉलर और अमेरिका या वेनेजुएला से 2-4 डॉलर प्रति बैरल बैठता है. इसके अलावा, ईरान भारतीय कंपनियों को 60 से 90 दिनों की लंबी क्रेडिट अवधि भी देता है, जिससे कंपनियों के पास नकदी का संकट नहीं होता.
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रुपये में कारोबार और व्यापार को बढ़ावा
प्रतिबंधों के दौर में भारत ‘रुपया सेटलमेंट मैकेनिज्म’ के तहत भुगतान करता था. इस पैसे से ईरान भारत से चावल और दवाएं जैसी जरूरी चीजें खरीदता था. क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत वशिष्ठ के मुताबिक, “अगर प्रतिबंध हटते हैं, तो ईरान फिर से भारत का एक बड़ा सप्लायर बन सकता है. अमेरिकी पाबंदियों के अलावा नीतिगत स्तर पर भारत के सामने कोई अन्य रुकावट नहीं है.” साफ है कि ईरान की वापसी से भारत को वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव से निपटने में बड़ी मदद मिलेगी.
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