प्री-वॉर लेवल की ओर बढ़ रहा कच्चा तेल, ब्रेंट $80 के नीचे फिसला; पेट्रोल-डीजल होंगे सस्ते!
पश्चिम एशिया में युद्धविराम (सीजफायर) के ऐलान का असर वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखने लगा है. हाल के दिनों में भू-राजनीतिक तनाव के चलते रिकॉर्ड तेजी दिखाने वाले कच्चे तेल के दाम अब नरम पड़ रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों बेंचमार्क प्री-वॉर स्तर की ओर बढ़ रहे हैं. तेल कीमतों में यह गिरावट भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए राहत की खबर मानी जा रही है, क्योंकि इससे पेट्रोल और डीजल के दाम घटने की संभावना बढ़ सकती है.
Crude Oil Price Today : पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद जिस कच्चे तेल ने तेज उड़ान भरी थी, अब उसकी कीमतों में नरमी के संकेत दिखने लगे हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल (WTI) 76.53 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट 79.36 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. कीमतें धीरे-धीरे उस स्तर की ओर लौट रही हैं, जहां वे युद्ध से पहले थीं. ऐसे में भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए राहत की उम्मीदें बढ़ गई हैं. अगर आगे भी कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रहा, तो देश में पेट्रोल-डीजल की कीमत में कमी आ सकती है.
ब्रेंट-WTI में तेजी गिरावट
सीजफायर के ऐलान के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में दोनों प्रमुख बेंचमार्क में गिरावट देखने को मिली. अमेरिकी कच्चा तेल (WTI Crude) 76.53 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, जबकि ब्रेंट क्रूड 79.36 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है. हाल के दिनों में भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल की कीमतों में आई तेजी अब कमजोर पड़ती दिख रही है. 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने से पहले ब्रेंट 64 डॉलर प्रति बैरल और WTI 67 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था.
पेट्रोल-डीजल के दाम घटाने का बन सकता है दबाव
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों से प्रभावित होती हैं. यदि क्रूड ऑयल प्री-वॉर लेवल के करीब पहुंचता है और कुछ समय तक वहीं बना रहता है, तो तेल कंपनियों पर ईंधन कीमतों में कटौती का दबाव बढ़ सकता है. ऐसे में आने वाले दिनों में आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल के मोर्चे पर राहत मिलने की उम्मीद की जा सकती है. अभी दिल्ली में डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर पर मिल रहा है.
सीजफायर से सप्लाई संकट का घटा खतरा
सीजफायर के ऐलान के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव देखने को मिला. दरअसल, निवेशकों को अब तेल आपूर्ति बाधित होने का खतरा कम नजर आ रहा है. युद्ध या तनाव की स्थिति में उत्पादन और सप्लाई प्रभावित होने की आशंका रहती है, जिससे कीमतें बढ़ती हैं. लेकिन सीजफायर की घोषणा के बाद बाजार को राहत मिली और सप्लाई सामान्य रहने की उम्मीद मजबूत हुई, जिसके चलते कच्चे तेल के भाव में गिरावट दर्ज की गई.
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